बिहार में चल रही इलेक्शन कमीशन की SIR प्रक्रिया पर टीडीपी ने पहले सवाल खड़े किए। हालांकि, जल्द ही उन्होंने इससे किनारा कर लिया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनकी आपत्तियां सिर्फ आंध्र प्रदेश के लिए हैं, बिहार के लिए नहीं। टीडीपी ने गठबंधन धर्म का पालन करते हुए लोगों के हित में बात की है।
तेलुगु देशम पार्टी ने बिहार में चुनाव आयोग की ओर से चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कुछ कमियां बताईं। पार्टी ने कहा कि लोगों को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए परेशान न किया जाए। टीडीपी के इस तेवर से सियासी हलचल तेज हो गई। इसी बीच एनडीए में शामिल तेलुगुदेशम पार्टी ने अहम फैसला लिया है। टीडीपी ने बिहार में चल रहे वोटर लिस्ट अपडेट के काम से अपनी आपत्तियों को अलग कर लिया है। पार्टी ने कहा कि वह एनडीए गठबंधन का समर्थन करती है, लेकिन लोगों के हितों का भी ध्यान रखना जरूरी है। टीडीपी ने ECI से वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया को आसान बनाने का आग्रह किया है।
तेलुगुदेशम पार्टी, जिसके 16 सांसद हैं और जो बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को महत्वपूर्ण समर्थन देती है। पार्टी ने एक दिन पहले बिहार में चुनाव आयोग की प्रक्रिया SIR (Special Intensive Revision) पर एक संतुलित रणनीति अपनाई। TDP ने कहा कि चुनाव आयोग को विशेष गहन पुनरीक्षण पर जो सुझाव दिए गए हैं, वे बिहार से जुड़े नहीं हैं। वे सिर्फ आंध्र प्रदेश के लिए हैं।
विशेष बातचीत में टीडीपी सांसद लावू श्री कृष्ण देवरायुलु ने बताया कि उनकी चुनाव आयोग के साथ हुई मीटिंग को बिहार में चल रही प्रक्रिया SIR से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे पार्टियों के विचारों को जानने के लिए चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिले थे। यह एक चल रही प्रक्रिया का हिस्सा था।
‘वोटर लिस्ट में नाम के लिए लोगों को चक्कर नहीं काटना चाहिए’
TDP ने गठबंधन धर्म का पालन करते हुए लोगों के हित में भी बात की। पार्टी ने कहा कि ECI अच्छा काम कर रही है। लेकिन, वोटर सबसे महत्वपूर्ण है। वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए उन्हें इधर-उधर भटकना नहीं चाहिए। टीडीपी ने ECI से कहा कि अगर SIR शुरू किया जाता है, तो वेरिफिकेशन की प्रक्रिया आसान होनी चाहिए।
टीडीपी ने चुनाव आयोग को लेटर में जताई थी आपत्तियां
मंगलवार को TDP ने चुनाव आयोग को चार पेज का एक पत्र सौंपा था। इसमें तेलुगुदेशम पार्टी ने कहा था कि SIR का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए। इसे नागरिकता वेरिफिकेशन से अलग रखा जाना चाहिए। यह चुनाव से कम से कम छह महीने पहले पूरा हो जाना चाहिए। वोटर पर कोई बोझ नहीं डालना चाहिए। टीडीपी ने लोगों के हित में बात करते हुए गठबंधन को भी बनाए रखने की कोशिश की है। इससे पता चलता है कि वह अभी गठबंधन में कोई परेशानी नहीं चाहती है।
टीडीपी के नए स्टैंड से एनडीए में सब ठीक
टीडीपी ने लोगों के हित में बात की है, लेकिन उसने गठबंधन धर्म को भी ध्यान में रखा है। इससे पता चलता है कि वह अभी गठबंधन को बिगाड़ना नहीं चाहती है। इस रणनीति का समय भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले आई है। बिहार से इसे अलग करके, टीडीपी कांग्रेस को सरकार पर हमला करने का मौका नहीं देना चाहती है।
टीडीपी ने पूरे मामले में अब क्या कहा जानिए
टीडीपी की राष्ट्रीय प्रवक्ता ज्योत्सना तिरुनागरी ने बताया कि ECI के सामने उनकी बातों का बिहार से कोई लेना-देना नहीं था। उनकी चिंताएं वोटर लिस्ट में एक ही नाम कई बार होने, डुप्लीकेट नामों को हटाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने, वोटर आईडी कार्ड में बायोमेट्रिक्स का इस्तेमाल करने, प्रवासी मजदूरों को नाम जुड़वाने का मौका देने और वोटर लिस्ट अपडेट करने में राजनीतिक कार्यकर्ताओं को शामिल करने को लेकर थीं। उनकी बातचीत सिर्फ आंध्र प्रदेश तक ही सीमित थी।





