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*राजू की गिरफ्तारी के बाद ईरानी गैंग में नेतृत्व को लेकर नई खींचतान शुरू*

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भोपाल में ईरानी गैंग की कमान संभालने वाला राजू ईरानी पुलिस की गिरफ्त में है, जिसके बाद पूरे नेटवर्क में खलबली मची हुई है। पुलिस 14 राज्यों तक फैले आपराधिक तंत्र की परतें खोलने की कोशिश कर रही है, वहीं गैंग के भीतर नेतृत्व को लेकर नई खींचतान शुरू हो गई है।

राजधानी भोपाल में सक्रिय ईरानी गैंग का सरगना और ईरानी डेरे का सरदार राजू ईरानी इस समय भोपाल पुलिस की रिमांड पर है। पुलिस उससे देश के 14 राज्यों में फैले गैंग नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी है, लेकिन राजू ईरानी खुद को प्रॉपर्टी डीलर, समाजसेवी और डेरे का सरदार बताकर अपराधियों से जुड़ी अहम जानकारियां देने से बच रहा है।

भोपाल में ऐसे पनपा ईरानी डेरा

मध्यप्रदेश के गठन के बाद करीब एक दर्जन ईरानी परिवार शरण की तलाश में भोपाल रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। उन्होंने स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर छह के बाहर झाड़ियों से घिरी खाली शासकीय जमीन पर डेरा डाल लिया। यहीं से भोपाल में ईरानी समुदाय और गैंग की जड़ें मजबूत होने लगीं। करीब डेढ़ एकड़ से अधिक इस जमीन को बाद में वक्फ की संपत्ति बताकर हुसैनी जनकल्याण समिति ने खरीदने का दावा किया, लेकिन राज्य सरकार यह मामला वर्षों पहले भोपाल जिला अदालत में जीत चुकी है। तत्कालीन भाजपा सरकार ने मानवीय आधार पर पूरे डेरे को हटाने की कार्रवाई नहीं की।

रेल लाइन और सड़क चौड़ीकरण से सिमटा डेरा

भोपाल रेलवे स्टेशन से निशातपुरा के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने और सड़क चौड़ीकरण के चलते ईरानी डेरे का बड़ा हिस्सा खाली कराया जा चुका है। इसी इलाके से भोपाल में ईरानी गैंग की शुरुआत करने वाले कुख्यात बदमाश मुन्ने ईरानी ने अपना अपराध का सफर शुरू किया था।

मुन्ने ईरानी ने बसाई अमन कॉलोनी

मुन्ने ईरानी ने 1970 के दशक में बदमाशों को छिपाने और पुलिस से दूर रखने के लिए भोपाल से बाहर अमन कॉलोनी बसाई थी। कॉलोनी का नाम इसलिए रखा गया ताकि गैंग के लोग वारदात के बाद शांति से वहां रह सकें। मुन्ने ईरानी की कई पत्नियां थीं। बाद में वह अपनी एक पत्नी के साथ अमन कॉलोनी में रहने लगे, लेकिन शहर से दूरी बढ़ने के कारण उनकी राजनीतिक और प्रशासनिक पकड़ कमजोर पड़ने लगी। जीवन के अंतिम वर्षों में वह फिर रेलवे स्टेशन के पास पुराने ईरानी डेरे में आकर रहने लगे।

बेटा ‘बादशाह’ नहीं बन सका सरगना

मुन्ने ईरानी की मौत के बाद उनकी पहली पत्नी से जन्मा बेटा मुख्तार ईरानी, जिसे लोग बादशाह के नाम से जानते हैं, आज भी उसी डेरे में परिवार के साथ रहता है। बचपन से ही वह बच्चों की गैंग बनाकर सक्रिय रहता था और लोग उसे बादशाह कहकर बुलाने लगे थे। हालांकि मुन्ने ईरानी चाहते थे कि उनका बेटा अपराध से दूर रहे और गैंग का नेतृत्व किसी और परिवार के बच्चे को सौंपा जाए। इसी वजह से मुख्तार गैंग का सरगना नहीं बन सका और राजू ईरानी डेरे का सरदार बनकर उभरा, जिसने अरबों की संपत्ति खड़ी कर ली।

मुन्ने ईरानी का बेटा आज भी भोपाल रेलवे स्टेशन के पास स्थित पुराने ईरानी डेरे से छोटा गिरोह संचालित करता है। उसका नेटवर्क भोपाल और आसपास तक सीमित है। बड़े और कुख्यात बदमाश आमतौर पर राजू ईरानी गैंग में शामिल हो जाते हैं। वह कई बार अमन कॉलोनी जाकर काला ईरानी और मस्तान ईरानी के साथ मिलकर डेरे का सरदार बनने की कोशिश कर चुका है, लेकिन हर बार नाकाम रहा।

राजू की गिरफ्तारी के बाद फिर हलचल

अब जब वर्षों बाद राजू ईरानी पुलिस की गिरफ्त में आया है, तो सत्ता संतुलन फिर बदलता दिख रहा है। काला ईरानी और मस्तान ईरानी लंबे समय से गैंग का नेतृत्व पाने की कोशिश में हैं। इस बीच मुन्ने ईरानी का बेटा फिर से अमन कॉलोनी के डेरे का सरदार बनने की कोशिश में जुट गया है। रेलवे स्टेशन वाले डेरे में आज भी 500 से ज्यादा परिवार रहते हैं, लेकिन वह सभी बदमाशों को अपने इशारे पर नहीं चला पा रहा। अधिकतर बदमाश छोटे-छोटे गुटों में वारदात करते हैं और पकड़े भी जाते हैं।

राजू ईरानी की गिरफ्तारी के बाद उसका छोटा भाई जाकिर ईरानी और बेटा गिरोह को संभाल रहे हैं। जाकिर लंबे समय से राजू के साथ मिलकर आधा दर्जन गैंगों के संचालन में भूमिका निभा रहा था। पुलिस की नजर अब जाकिर ईरानी पर भी बनी हुई है। वहीं काला ईरानी खुद को नया सरदार साबित करने के लिए डेरे के लोगों का समर्थन जुटाने में लगा है और उन्हें पुलिस व कानूनी सुरक्षा का भरोसा दिला रहा है।

Ramswaroop Mantri

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