भोपाल। बाढ़ पीडि़तों के असंतोष का खामियाजा केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को भोगना पड़ा था नरेन्द्र तोमर के चहेते अधिकारियों की वजह से उनके साथ ही घटी घटना के कारण अब शिवराज मंत्रीमण्डल के मंत्री राष्ट्रीय पर्व १५ अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण करने के लिये जाने से इतने भयभीत हो गये कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास के मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया ने तो राष्ट्रीय पर्व पूर्व संध्या १४ अगस्त की शाम को एक ट्वीटर पर मैसेज कर अपने आपको बीमार होने का बहान लेकर अपने प्रभारी जिले शिवपुरी में जाने के लिये मना कर दिया, इस घटना से यह साफ हो जाता है कि बाढ़ पीडि़तों की मदद के लिये सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान भले ही अपनी चिरपरिचित कार्यशैली के चलते तमाम आश्वासनों का झुनझुना थमा रहे हों लेकिन जमीनी हकीकत उनकी ही कार्यशैली से चिर परिचित उन अधिकारियों जो शिवराज के कार्यकाल में सरकारी योजनाओं की फर्जी आंकड़ों की रंगोली सजाकर मुख्यमंत्री और जनता को गुमराह करते रहे हैं शायद वही खेल इस बाढ़ पीडि़तों के साथ अधिकारी खेलने में लगे होंगे जिसकी वजह से बाढ़ पीडि़तों में असंतोष व्याप्त है इसका एक उदाहरण तो शिवपुरी जिले के नरवर तहसील की तहसीलदार रुचि अग्रवाल के इस कार्यशैली और उनके द्वारा बाढ़ पीडि़तों को यह फरमान देना कि अब सरकार ने बहुत कुछ खिला दिया जाओ कुछ काम धाम करो, इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश शासन के मुखिया की तरह ही बाढ़ पीडि़तों के साथ किस तरह का बर्ताव सरकार और उनकी चहेती नौकरशाही कर रही है इससे पूर्व जब भयंकर बाढ़ के दौरान जब लोग अपनी जान बचाकर सरकारी सहारे की उम्मीद पाल रहे थे तो उस समय भी इन्हीं बाढ़ पीडि़त इलाकों के जिम्मेदार अधिकारी नाव में बैठकर मौज-मस्ती और अटखेलियां करने में लगे हुए थे? इन दो घटनाओं से यह स्पष्ट हो जाता है कि सरकार के मुखिया भले ही बाढ़ पीडि़तों की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिये अपनी घोषणावीर होने की परम्परा के अनुरूप नित्य नये-नये आश्वासनों का झुनझुना थमाने में लगे हुए हैं लेकिन इन बाढ़ पीडि़तों की समस्याओं से मुक्ति दिलाने का काम तो उसी शिवराज के १६ साल के लगभग के समय की सरकार की कार्यशैली से परिचित नौकरशाही ही मुक्ति दिलायेगी और यदि वह नौकरशाही नरवर जिले की तहसीलदार और भयंकर बचाव कार्य का दिखावा कर मौज मस्ती करने वाले अधिकारियों का भी जो वीडियो वायरल हुआ था उसे देखकर तो यही लगता है कि प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ की सत्ताधीशों के साथ मिलीभगत कर नूरा कुश्ती की बदौलत इन बाढ़ पीडि़तों को राम भरोसे छोड़ दिया गया है यह अलग बात है कि कमलनाथ व उनके विधायक बाढ़ पीडि़तों के हमदर्द होने की नौटंकी कर रहे हों यदि वह सच में इन बाढ़ पीडि़तों के हितैषी हैं तो विधानसभा के चार दिवसीय निर्धारित सत्र के दौरान वह इन बाढ़ पीडि़तों के मुद्दे को लेकर सदन में बहस कर सकते थे, तो उस बहस के दौरान सरकार द्वारा जो आश्वासन इन बाढ़ पीडि़तों के बचाव के लिये किया जाता वह एक दस्तावेज होता लेकिन नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ व उनके विधायकों की सत्ताधीशों से नूरा कुश्ती के चलते चार दिनी विधानसभा सत्र नहीं चलने दिये जाने के बाद जो चर्चायें लोग चटकारे लेकर करते नजर आ रहे हैं उनसे तो यही आभास होता है कि कमलनाथ और सत्ताधीश पार्टी के नेता इन बाढ़ पीडि़तों के हितैषी नहीं हैं।
हाँ, यह जरूर है कि नित्य नये-नये आश्वासनों का झुनझुना थमाकर इन बाढ़ पीडि़तों के बचाव में वही सब किया जायेगा जो शिवराज सरकार की कार्यशैली का नमूना है और ऐसा ही कोरोना काल में भी हुआ था तभी तो ११ करोड़ से भी अधिक की राशि कोविड-१९ कोरोना संक्रमण काल में भी कोरोना से पीडि़त लोगों को न तो ठीक से ऑक्सीजन मिल पाई और न रेमडेसिविर के इंजेक्शन मिल पाए, मजे की बात तो यह है कि सरकार के ही संरक्षण में इन इंजेक्शनों के चोरी होने की घटनाएं भी सुर्खियों में रही लेकिन आज तक उन इंजेक्शनों की चोरी करने वाले लोग नहीं पकड़े गये तो वहीं भाजपा से जुड़े संगठन जबलपुर के एक अस्पताल में डॉक्टर ने कोरोना संक्रमण के दौर में रेमडेसिविर के इंजेक्शन लगाने से भी नहीं परहेज किया। ऐसी स्थिति भाजपा शासन की हो तो वहीं मध्यप्रदेश में दो दलीय व्यवस्था के चलते सबसे बड़ा विपक्षी दल होने का दावा करने वाले कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष की भूमिका बाढ़ पीडि़तों को राम भरोसे छोडऩे के लिये जो नीति नूरा कुश्ती कर अपनाई गई उसको लेकर भी तरह-तरह की चर्चायें प्रदेश के जनमानस में व्याप्त हैं, इसी के साथ-साथ शिवराज सिंह चौहान की कार्यशैली के चलते भ्रष्ट और चहेते अधिकारियों का स्थानान्तरण उनकी मनचाही स्थानों पर किये जाने की भी परम्परा आम है और श्योपुर में जो कुछ केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के साथ जो घटना घटी उससे तो यही संदेश मिलता है कि उस जिले की ही नहीं बल्कि चंबल क्षेत्र के मुरैना के साथ-साथ ग्वालियर चंबल संभाग के अधिकांश अधिकारी नरेन्द्र तोमर जैसे नेता की सिफारिश पर अपनी मनचाही पदस्थापना कराने में सफल होते हैं और इस सफलता के प्राप्त होने के साथ ही वह जिस तरह का बर्ताव शिवराज के कार्यशैली के तहत फर्जी आंकड़ों की रंगोली सजाकर सरकार और गुमराह कर अपनी तिजोरी भरने का काम करते हैं उसी के परिणामस्वरूप श्योपुर में नरेंद्र तोमर के साथ यह घटना घटित हुई इस घटना को देखते हुए जहां शिवराज मंत्रीमण्डल के मंत्री भी इतने भयभीत हो गये कि वह १५ अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व पर ध्वजारोहण के कार्यक्रम में शामिल नहीं होने का बहाना ढूंढते हैं और इसका जीता-जागता उदाहरण पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया हैं, ग्वालियर-चंबल संभाग में पंचायत एवं ग्रामीण विकास के अधिकारियों व कर्मचारियों में चल रही चर्चाओं पर भरोसा करें तो इन्हीं महेंद्र सिंह सिसौदिया ने ग्वालियर-चंबल संभाग ही नहीं प्रदेश के तमाम जिलों में विधायकों, सांसदों व जनप्रतिनिधियों के नाम का सहारा लेकर भ्रष्ट जनपद सीईओ की पदस्थापना की गई है तो वहीं कुछ जनपद पंचायत के सीईओ तो ऐसे हैं जिनका मोह ग्वालियर-चंबल संभाग ही नहीं बल्कि प्रदेश के कई जिलों से मोह खत्म नहीं होता और हर बार वह वहीं पदस्थापना करवा लेते हैं, हालांकि जिन केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ जो घटना घटित हुई उसी श्योपुर में जो सीईओ का स्थानान्तरण भी तोमर द्वारा पंचायत विभाग के सेवानिवृत्त प्रमुख सचिव के द्वारा कराई गई थी जबकि इन दोनों जनपद सीईओ की कार्यशैली के बारे में पंचायत विभाग में जो चर्चायें चल रही हैं यदि उन पर भरोसा करें तो वह शिवराज सरकार की कार्यशैली में पूरी तरह से परिपक्व हैं तभी तो उनका मोह श्योपुर से नहीं खत्म नहीं हो पा रहा है ऐसे एक नहीं कई कारण हैं यही वजह है कि शिवराज सरकार के पंचायत एंव गामीण विकास विभाग के मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया भी ऐसे अधिकारियों की पदस्थापना करने के आरोप इन पर लगे हैं, मामला जो भी हो लेकिन १५ अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व पर अपने प्रभार वाले जिस जिले की जनता भयंकर बाढ़ की पीड़ा से जूझ रही है और राष्ट्रीय पर्व पर ध्वजारोहण करना सिसौदिया का वहां न जाना यह तो उजागर करता ही है कि नरेंद्र तोमर के साथ घटी घटना के बाद अब शिवराज सिंह मंत्रीमण्डल के सदस्य बाढ़ पीडि़तों से रूबरू होने में भयभीत नजर आ रहे हैं?
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