मुंबई। लोकसभा में 2 अप्रैल को वक्फ संशोधन बिल पेश किए जाने की संभावनाओं और चर्चाओं के बीच AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने दावा किया है कि लोकसभा में यह बिल पारित नहीं हो सकेगा क्योंकि सदन में भाजपा के पास बहुत नहीं है। AIMIM प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा को समर्थन दे रहे चार दल यानी नीतीश कुमार की जेडीयू, चंद्रबाबू नायडू के टीडीपी, चिराग पासवान की लोजपा (आर) और जयंत चौधरी का लोकदल अगर वक्फ बिल का पास कराने में भाजपा का साथ देते हैं तो देश के मुसलमान उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे।
वारिस पठान ने कहा, “…हम सुन रहे हैं कि ईद के बाद वक्फ विधेयक संसद में लाया जाने वाला है लेकिन लोकसभा में इस विधेयक का पारित होना बहुत मुश्किल है, क्योंकि वहां भाजपा के पास बहुमत नहीं है। अगर भाजपा को यह विधेयक पारित करना है, तो पार्टी को चंद्रबाबू नायडू, नीतीश कुमार, चिराग पासवान और जयंत चौधरी का समर्थन प्राप्त करना आवश्यक होगा। अगर ये लोग विधेयक का समर्थन करते हैं, तो भारत के मुसलमान उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे। यह विधेयक असंवैधानिक है। यह अनुच्छेद 14, 25 और 26 का पूरी तरह से उल्लंघन है।”
भाजपा की पूर्व नियोजित साजिश: पठान
पठान ने आगे कहा, “आप मुस्लिम वक्फ बोर्ड में किसी गैर-मुस्लिम को कैसे शामिल कर सकते हैं?…वक्फ संशोधन विधेयक भाजपा की पूर्व नियोजित साजिश का नतीजा है, जिसके तहत वे मुसलमानों की जमीन हड़पना चाहते हैं। वक्फ को बचाने के लिए ऐसा करने का उनका दावा बिल्कुल झूठा है…संविधान ने हमें यह अधिकार दिया है कि अगर सरकार कोई काला कानून लाती है, तो हम उसका कड़ा विरोध दर्ज करा सकते हैं। लाखों लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। इस विधेयक के खिलाफ़ हम भी विरोध प्रदर्शन का हिस्सा हैं… अगर विधेयक लाया जाता है, तो हम संवैधानिक तरीके से विरोध करेंगे।”
ईसाइयों के संगठन ने किया वक्फ बिल का समर्थन
इस बीच, ईसाइयों के प्रमुख संगठन कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) ने वक्फ संशोधन विधेयक का सोमवार को समर्थन किया और यह भी मांग की है कि केरल में मुनम्बम क्षेत्र की सैकड़ों आवासीय संपत्तियों को वक्फ दावे से मुक्ति दिलाई जाए। सीबीसीआई ने कहा कि यह एक वास्तविकता है कि मौजूदा केंद्रीय वक्फ अधिनियम के कुछ प्रावधान संविधान और देश के धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ असंगत हैं।
सीबीसीआई ने कहा है कि केरल में वक्फ बोर्ड ने मुनंबम क्षेत्र में 600 से अधिक परिवारों की पैतृक आवासीय संपत्तियों को वक्फ भूमि घोषित करने के लिए इन प्रावधानों का प्रयोग किया है। पिछले तीन वर्षों में, यह मुद्दा एक जटिल कानूनी विवाद में बढ़ गया है। तथ्य यह है कि केवल एक कानूनी संशोधन एक स्थायी समाधान प्रदान कर सकता है, और इसे लोगों के प्रतिनिधियों द्वारा मान्यता दी जानी चाहिए।
क्या कहता है लोकसभा-राज्यसभा का नंबरगेम?
संसद के चालू बजट सत्र के दूसरे चरण में सरकार वक्फ संशोधन बिल लाने की तैयारी में है. यह बिल 2 अप्रैल को लोकसभा में पेश किया जा सकता है. संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू ने 8 अगस्त 2024 को ये बिल लोकसभा में पेश किया था जिसे विपक्ष के हंगामे के बाद संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया था. जगदंबिका पाल की अगुवाई वाली जेपीसी की रिपोर्ट के बाद इससे संबंधित संशोधित बिल को कैबिनेट ने पहले ही मंजूरी दे दी है. सरकार यह बिल संसद में लाती है तो इसे पारित कराना कम चुनौतीपूर्ण नहीं रहने वाला. ये बिल पहले ही जेपीसी से होकर आ रहा है.
कसभा की वर्तमान स्ट्रेंथ 542 है और 240 सदस्यों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है. बीजेपी की अगुवाई वाले सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सदस्यों की संख्या 293 है जो बिल पारित कराने के लिए जरूरी 272 के जादुई नंबर से अधिक हैं. विपक्ष की बात करें तो कांग्रेस के 99 सदस्य हैं और इंडिया ब्लॉक में शामिल सभी दलों को मिला लें तो भी संख्याबल 233 ही पहुंचता है. आजाद समाज पार्टी के एडवोकेट चंद्रशेखर, शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल भी सांसद हैं जिनकी पार्टियां एनडीए या इंडिया ब्लॉक, किसी भी गठबंधन में नहीं हैं. कुछ निर्दलीय सांसद भी हैं जो किसी भी गठबंधन के साथ खुलकर नहीं हैं.
ऊपरी सदन राज्यसभा की बात करें तो सदन की स्ट्रेंथ इस समय 236 सदस्यों की है. इसमें बीजेपी का संख्याबल 98 है. गठबंधनों के लिहाज से देखें तो एनडीए के सदस्यों की संख्या 115 के करीब है. छह मनोनीत सदस्यों को भी जोड़ लें जो आम तौर पर सरकार के पक्ष में ही मतदान करते हैं तो नंबरगेम में एनडीए 121 तक पहुंच जा रहा है जो विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी 119 से दो अधिक है. कांग्रेस के 27 और इंडिया ब्लॉक के अन्य घटक दलों के 58 सदस्य राज्यसभा में हैं. कुल मिलाकर विपक्ष के पास 85 सांसद हैं. वाईएसआर कांग्रेस के नौ, बीजेडी के सात और एआईएडीएमके के चार सदस्य राज्यसभा में हैं. छोटे दलों और निर्दलीय मिलाकर तीन सदस्य हैं जो न तो सत्ताधारी गठबंधन में हैं और ना ही विपक्षी गठबंधन में.
बिल पर सरकार बनाम विपक्ष क्यों
सत्तापक्ष का कहना है कि वक्फ संशोधन बिल के माध्यम से इसकी संपत्तियों से संबंधित विवादों के निपटारे का अधिकार मिलेगा. वक्फ की संपत्ति का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और इससे मुस्लिम समाज की महिलाओं को भी मदद मिल सकेगी. बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल की अगुवाई वाली जेपीसी ने एनडीए के घटक दलों की ओर से प्रस्तुत किए गए 14 संशोधनों के साथ अपनी रिपोर्ट संसद में पेश कर दी थी. जेपीसी ने विपक्ष की ओर से प्रस्तावित किए गए 44 संशोधनों को खारिज कर दिया था.
वक्फ बिल पर प्रमुख आपत्तियां क्या
1. वक्फ के किसी संपत्ति विवाद पर अब फैसले के लिए खिलाफ हाई कोर्ट जा सकते हैं. हालांकि पहले वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला ही आखिरी माना जाता था.
2. अब दान किए बिना किसी संपत्ति पर वक्फ अपना अधिकार नहीं जता सकता, लेकिन इससे पहले दावे के साथ ही कोई भी संपत्ति वक्फ का अधिकार हो जाती थी.
3. वक्फ बोर्ड में महिला और अन्य धर्म से दो सदस्य होने चाहिए. लेकिन पहले बोर्ड में महिला और अन्य धर्म के सदस्य नहीं होते थे.
4. कलेक्टर वक्फ की संपत्ति का सर्वेक्षण कर सकेगा और उसे संपत्ति का निर्धारण करने का अधिकार दिया गया है.
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