अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

एक सुनियोजित साजिश के तहत बैंक डुबाए जा रहे हैं : अजय खरे

Share

यदि डूबे हुए बैंक मेंक करोड़ जमा है तो केवल 500000 ही मिलेंगे 
बैंकों में ग्राहकों का जमा पैसा डूबना अमानत में खयानत  

रीवा । समाजवादी जन परिषद के नेता अजय खरे ने कहा है कि देश के बैंकों में जमा जनधन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग होने से उसका मनमानी लाभ लूटेरे पूंजीपतियों को मिल रहा है और बैंकों के डुबाने का खतरा बढ़ता जा रहा है । श्री खरे ने कहा कि बैंक डूब नहीं रहे बल्कि एक सुनियोजित साजिश के तहत बैंकों को डुबोया जा रहा है । आजकल अक्सर सुनने को मिलता है कि बैंक डूबेंगे या दिवालिया होंगे , तो ग्राहकों की 5 लाख तक की रकम सुरक्षित रहेगी ।

यह भारी विडंबना है कि इस बात को बैंक जमाकर्ताओं के लिए खुशखबरी के रूप में प्रचारित किया जा रहा है । इधर मोदी सरकार इस बात का लगातार ढिंढोरा पीट रही है कि पहले बैंक डूबने पर केवल ₹100000 तक की रकम सुरक्षित रहती थी लेकिन अब उसकी सीमा बढ़ाकर पांच लाख कर दी गई है । श्री खरे ने कहा कि बैंक क्यों डूब रहे और दिवालिया हो रहे , इस को लेकर मोदी सरकार को जरा भी फिक्र नहीं है । पहले बैंकों के डूबने की स्थिति पर ₹100000 तक की रकम सुरक्षित होती थी , तब अधिकांश लोगों के पास बैंकों में ₹100000 की जमा राशि नहीं होती थी और बैंक डूबते भी नहीं थे । सरकार उस समय बैंकों का राष्ट्रीयकरण करके उन्हें डूबने से बचाती थी । अपने भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए इधर करोड़ों लोगों की लंबे समय की गाढ़ी कमाई ₹500000 से भी काफी अधिक राशि बैंकों में जमा है । लाखों कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय 50 लाख से एक करोड़ रुपए तक मिलते हैं जो राशि बैंकों में ही जमा होती है , यदि बैंक डूबेंगे तो उन्हें महज ₹500000 देकर मामला निपटा दिया जाएगा । श्री खरे ने कहा कि मोदी सरकार के चलते सेवानिवृत्त लोगों का बुढ़ापा भी खतरे में पड़ गया है । लोग पेट काटकर किस तरह बचत करते हैं और शहरी क्षेत्र में एक प्लाट खरीद कर घर बनाना भी उनके लिए मुश्किल है । शहर में एक एमआईजी घर खरीदने में करोड़ रुपए का बजट बनाना होता है । नियमानुसार घर में अधिक नकदी नहीं रख सकते हैं , ऐसी स्थिति में बैंकों में पैसा रखना लोगों की मजबूरी बन गया है । लेकिन जिस तरह से बैंकों का डूबने का सिलसिला जारी है उसको लेकर उन करोड़ों ग्राहकों की दिल की धड़कन बढ़ी है जिनकी बैंकों में जमा राशि ₹500000 से अधिक है । बैंकों में यदि ग्राहकों के पैसे डूबते हैं तो निश्चित रूप से यह अमानत में खयानत है । सरकार मैं बैठे भ्रष्ट लोगों , अधिकारियों और लुटेरे पूंजी पतियों की नापाक सांठगांठ के चलते इधर यह खतरा बहुत तेजी से बढ़ा है । यह साफ नजर आ रहा है कि मोदी सरकार की नीयत में खोट है । समाजवादी जन परिषद के नेता अजय खरे ने कहा कि पहले लोगों की संपत्ति हड़पने के लिए सूदखोर बदनाम थे , लेकिन इधर जिस तरह ₹500000 से अधिक जमा राशि वाले ग्राहकों की लाखों करोड़ों रुपए गाढ़ी कमाई को बैंकों को डुबोकर हड़पने का गंदा खेल शुरू है , वह सूदखोरों के काले कारनामों से कम नहीं है , जिसका पर्दाफाश कर तत्काल रोका जाना चाहिए ।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें