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महाराष्ट्र ब्राह्मण बैंक के तीनों भवन 6.57 करोड़ में बिके, अब 700 वर्गफीट के कमरे से होगा बैंक का संचालन

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इंदौर

करोड़ों के घाटे में डूबी शहर की सबसे पुरानी महाराष्ट्र ब्राह्मण सहकारी बैंक के तीनों भवन आखिरकार 6.57 करोड़ रु. में बिक गए। इनमें से तीन पार्टियों से बैंक को 1 करोड़ रु. एडवांस बतौर प्राप्त भी हो गए हैं। इनमें से दो भवनों को तीन माह के भीतर पार्टी को सुपुर्द किया जाना है। इसके बाद बैंक का संचालन लोकमान्य नगर स्थित 700 वर्गफीट के कमरे से होगा। सारी राशि मिलने के बाद सबसे पहले बैंक की 18 करोड़ रु. देनदारियां चुकाई जाएगी और उसके बाद सालों से बाट जोह रहे बैंक जमाकर्ताओं को राशि के मामले में विचार होगा।

सहकारिता के क्षेत्र में सालों पुरानी स्थापित तथा 29 हजार सदस्यों वाली महाराष्ट्र ब्राह्मण सहकारी बैंक 2004 में तत्कालीन संचालक मंडल की गड़बड़ियों के कारण करोड़ों के घाटे में आकर डूब गई थी। इसके बाद से उसकी हालत बहुत खराब है। दूसरा यह कि तब संचालक मंडल को भंग करने के बाद से ही सहकारिता विभाग ने परिसमापक नियुक्त किया है और 16 साल से संचालन उन्हीं के द्वारा किया जा रहा है। बैंक को अभी 18 करोड़ से ज्यादा की देनदारी चुकानी है जिसके चलते तीन-चार साल से बैंक के तीनों भवन खातीपुरा, सुखलिया व लोकमान्य नगर को बेचने की तैयारी चल रही थी। इसके लिए कई बार अलग-अलग वेल्युअर्स से भवनों की कीमतें निकाली गई थी। कुछ समय पहले एक अन्य वेल्युअर से भी रिपोर्ट मंगाई गई। इसके साथ बैंक के जेल रोड (खातीपुरा) स्थित भवन की औसतन कीमत जानी तो 3 से 3.30 करोड रु. व विजय नगर क्षेत्र (सुखलिया) के भवन की कीमत 1 करोड़ से 1.10 करोड़ रुपए आंकी गई। इसके बाद फिर प्रयास हुए और टेंडर प्रक्रिया शुरू की।

लोकमान्य नगर स्थित बैंक का भवन 40 लाख रु. में बिका।

लोकमान्य नगर स्थित बैंक का भवन 40 लाख रु. में बिका।

4.21 करोड़ रु. में मुख्य भवन और 1.96 करोड़़ में विजय नगर भवन बिका

27 जुलाई को टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई और बैंक का जेल रोड स्थित 1948 में बना पुराना भवन 4.21 करोड़ रु. में बिका जिसे गौरव पटेल नामक व्यक्ति ने खरीदा है। ऐसे ही 6 अगस्त को विजय नगर स्थित भ‌वन (ऊपरी फ्लोर) 1.96 करोड़ में बिका जिसे भगवती प्रसाद यादव बिल्डर द्वारा खरीदा गया। यह फ्लोर बैंक ने 2001 में खरीदा था। नियम-शर्तों के तहत हाल ही में दोनों पार्टियों ने 10 फीसदी राशि (60 लाख रु.) जमा कर दी है। अब बाकी राशि तीन महीने में अदा की जाएगी और बैंक को ये दोनों भवन खाली कर सुपुर्द करना होंगे।

लीज पर दी गई जमीन पर बना भवन 40 लाख रु. में बिका

बैंक का एक अन्य भवन लोकमान्य नगर में भी है। 1991 में लोकमान्य नगर सोसायटी द्वारा बैंक को यहां करीब 700 वर्गफीट की जमीन 99 साल के लिए बैंकिंग कार्य के लिए लीज पर दी गई थी। इसमें 10 रु. सालाना लीज थी। इस बीच 2004 में जैसे ही बैंक घाटे में गई और सहकारिता विभाग के अधीन आई तभी से लोकमान्य नगर सोसायटी द्वारा जमीन वापस देने के लिए दस्तावेजी कार्यवाही चल रही थी लेकिन इस बीच बैंक ने वहां अपना तीन मंजिला भवन भी बना लिया था। इसे लेकर सहकारिता विभाग व लोकमान्य नगर सोसायटी में पत्र व्यवहार होता रहा। कुछ समय पहले ज्वाइंट रजिस्ट्रार जगदीश कनौज ने फिर लीज निरस्ती का आदेश जारी कर दिया। फिर 3 अगस्त को बैंक द्वारा लीज की जमीन पर बनाए गए भवन का 40 लाख रु. में सौदा हुआ। लोकमान्य नगर सोसायटी ने 40 लाख रु. बैंक को चुकाते हुए यह भवन अपने कब्जे में ले लिया। वैसे शर्तों के तहत बैंक के आखिरी सदस्य तक का हिसाब नहीं होता तब तक बैंक इसी भवन के 700 वर्गफीट के कमरे से संचालित होगी।

Ramswaroop Mantri

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