इंदौर
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को दो माह से सैलरी नहीं मिली है। उनका कहना था कि वे अस्पताल के अधीक्षक से लेकर जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तक से पगार दिलवाने की गुहार लगा चुके हैं। वे कहते हैं कि सरकार की ओर से पैसा रुका है, आएगा तो देंगे। चारों ओर से जब कोई समाधान नहीं निकला तो वे मजबूरी में सड़क पर बैठ गए। उन्होंने इस दौरान चक्काजाम कर नारेबाजी के साथ जमकर हंगामा किया। चक्काजाम से ट्रैफिक की समस्या बढ़ गई, जिसके बाद पुलिस ने मोर्चा संभाला। एंबुलेंस फंसने के बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर कर्मचारियों को हटाया।

पुलिस और कर्मचारियों के बीच जमकर बहस हुई।
ऐसा था पूरा नजारा
चक्काजाम कर रहे कर्मचारियों को जब पुलिस हटाने पहुंची तो वे बड़े अधिकारी को बुलाने पर अड़ गए। इस पर पुलिस का कहना था कि बिना किसी ज्ञापन के सड़क पर बैठकर ट्रैफिक जाम कर दिया। तुम्हारे कहने से अधिकारी को सड़क पर बुलाएंगे क्या। साइड में चलो और बात करो। इस पर महिलाकर्मी सहित सभी कर्मचारी पुलिस से बहस करने लगे। पुलिस का कहना था कि हमारा काम सैलरी दिलवाना नहीं है। आपने इसे लेकर किसी को ज्ञापन दिया था क्या। उनके नहीं कहने पर कहा कि यहां दादागिरी चल रही है क्या कि चक्काजाम कर लोगों को परेशान करोगे। अस्पताल का यह रोड है। आपकी जो समस्या है, आप अपना ज्ञापन दो, हम भी आपके लिए अधिकारियों से बात करेंगे। इसके बाद पुलिस ने बलपूर्वक कर्मचारियों को हटाया।

पुलिस ने कर्मचारियों को हटाकर ट्रैफिक खुलवाया।
कंपनी के डिप्टी मैनेजर अतुल ने कहा कि इनकी कोई मांग नहीं है। बस दिसंबर की सैलरी नहीं हुई है। शनिवार को हमने सैलरी को लेकर प्रोसेस कर दिया है। सोमवार को सभी को सैलरी मिल जाएगी। दो महीने की सैलरी नहीं मिलने के सवाल पर कहा कि जनवरी की सैलरी तो किसी भी कर्मचारी को अब तक नहीं मिली है। कोविड में 10-10 हजार देने के सवाल पर कहा कि ऐसे 10 हजार कोई बोलेगा तो हम नहीं दे सकते हैं। शासन के अनुसार जो ऑर्डर है, वही देंगे। एनएचएम से बजट नहीं आने के कारण सैलरी नहीं हो पाई थी। हम अपने पास से इन्हें पेमेंट कर रहे हैं।

जाम में फंसी एंबुलेंस में एक महिला मरीज सवार थी।

कर्मचारियों ने इस प्रकार से पूरी सड़क को जाम कर दिया था।






