नोबेल शांति पुरस्कार का सपना देखने वाले ट्रंप ने असल में दुनिया को यह संदेश दिया है कि शांति तभी तक है, जब तक तुम हमारी बात मानोगे. वरना हम आएंगे, और तुम्हें उठा ले जाएंगे. मादुरो तो गए, लेकिन वेनेजुएला में जो कुछ भी हुआ, उसे देखकर कई राष्ट्राध्यक्षों के माथे पर पसीना आ रहा होगा. लेकिन क्या अब दुनिया में न्याय सिर्फ उसकी मुट्ठी में है जिसके पास सबसे बड़ी लाठी है?वेनेजुएला की राजधानी काराकास शुक्रवार देर रात (स्थानीय समयानुसार) अमरेकी हमलों से दहल उठी। अमेरिका के विमानों ने देश में कई जगहों पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी हमलों के बीच अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को बंधक बना लिया है।रूस के विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई को कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे सशस्त्र आक्रामकता करार दिया है। मंत्रालय ने शनिवार को टेलीग्राम पर जारी बयान में कहा कि वेनेजुएला को बिना किसी बाहरी, विशेष रूप से सैन्य हस्तक्षेप के, अपने भविष्य का निर्धारण करने का पूरा अधिकार है। बयान में कहा गया कि किसी भी तरह का दबाव या सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों के खिलाफ है।
दुनिया के नक्शे पर एक लकीर खिंच गई है. यह लकीर डिप्लोमेसी और दादागिरी के बीच की है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप ने एक मिलिट्री ऑपरेशन से मिटा दिया है. ट्रंप ने जिस अंदाज में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके घर से टंगवा लिया, यह किसी हॉलीवुड की एक्शन फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा लग सकता है, लेकिन हकीकत में यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के ताबूत में आखिरी कील है.
वेनेजुएला में जो हुआ, उसे आप लोकतंत्र की बहाली का नाम दे सकते हैं, लेकिन तरीका बताता है कि हम एक ऐसे दौर में लौट आए हैं जहां जंगल का कानून चलता है- जिसकी लाठी, उसकी भैंस. जो ट्रंप दिन-रात शांति के नोबेल पुरस्कार का सपना देखते हैं, जो खुद को युद्ध रोकने वाला मसीहा बताते हैं, उन्होंने वेनेजुएला में जो किया, वह शांति नहीं, बल्कि एक संप्रभु राष्ट्र के सिर पर नंगानाच है. अब बारी ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की है…

रिजीम चेंज का काउबॉय स्टाइल
अमेरिका का इतिहास रिजीम चेंज से भरा पड़ा है. लैटिन अमेरिका तो वैसे भी अमेरिका का बैकयार्ड माना जाता रहा है, जहां सीआई ने न जाने कितनी सरकारें गिराईं और कितने तख्तापलट करवाए. लेकिन पहले और अब में एक बड़ा फर्क है. पहले अमेरिका पर्दे के पीछे रहकर खेलता था. वह विद्रोहियों को हथियार देता था, आर्थिक प्रतिबंध लगाता था, या सेना को भड़काता था. खुद सामने आने से बचता था ताकि कह सके कि हमने कुछ नहीं किया, यह तो वहां की जनता का विद्रोह है.
वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज, उपराष्ट्रपति डेल्सी को अंतरिम राष्ट्रपति बनाए जाने का दावा
वेनेजुएला में सत्ता को लेकर बड़ी राजनीतिक हलचल के बीच खोजी पत्रकार लौरा लूमर ने शनिवार को दावा किया कि मौजूदा उपराष्ट्रपति डेल्सी को जल्द ही देश का अंतरिम राष्ट्रपति घोषित किया जा सकता है। लूमर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सूत्रों के हवाले से कहा कि यह फैसला अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर किए गए बड़े सैन्य हमले के बाद लिया जा रहा है।
लूमर के अनुसार, अमेरिकी विशेष बलों द्वारा मादुरो की गिरफ्तारी के बाद सत्ता शून्यता की स्थिति पैदा हुई है, जिसे भरने के लिए डेल्सी को अंतरिम नेतृत्व सौंपे जाने की तैयारी है। हालांकि वेनेजुएला सरकार या आधिकारिक संस्थानों की ओर से अभी तक इस दावे की पुष्टि नहीं की गई है।
रूस ने अमेरिकी कार्रवाई को बताया सशस्त्र आक्रामकता
रूस के विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई को कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे सशस्त्र आक्रामकता करार दिया है। मंत्रालय ने शनिवार को टेलीग्राम पर जारी बयान में कहा कि वेनेजुएला को बिना किसी बाहरी, विशेष रूप से सैन्य हस्तक्षेप के, अपने भविष्य का निर्धारण करने का पूरा अधिकार है। बयान में कहा गया कि किसी भी तरह का दबाव या सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों के खिलाफ है।
रूस ने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर तनाव को और बढ़ा सकते हैं। मॉस्को ने सभी पक्षों से संयम बरतने और हालात को बिगड़ने से रोकने के लिए संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की। साथ ही रूस ने वेनेजुएला की जनता और सरकार के प्रति अपनी एकजुटता दोहराई। विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग का समर्थन करता है, ताकि मौजूदा स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो सके और किसी भी संभावित टकराव को रोका जा सके। रूस का कहना है कि लैटिन अमेरिका को शांति का क्षेत्र बने रहना चाहिए और किसी भी देश की संप्रभुता का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है।
अमेरिका ने मादुरो पर कौन से आरोप लगाए?
अमेरिका के न्याय विभाग ने 2020 में वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो पर नार्को-आतंकवाद के गंभीर आरोप लगाए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान दायर कई अभियोगों में कहा गया कि मादुरो और उनके सहयोगियों ने वेनेजुएला को मादक पदार्थ तस्करों और आतंकी संगठनों के हित में काम करने वाले एक आपराधिक उद्यम में बदल दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए अरबों डॉलर की लूट की गई। उस समय के अटॉर्नी जनरल विलियम बोर ने इसे भ्रष्ट वेनेजुएला शासन करार दिया था।
न्यूयॉर्क में दायर एक आरोपपत्र में मादुरो और सत्तारूढ़ पार्टी के नेता कैबेलो पर कोलंबियाई विद्रोहियों और सैन्य अधिकारियों के साथ साजिश कर अमेरिका में कोकीन की बाढ़ लाने का आरोप लगाया गया। अभियोगों के साथ 14 अधिकारियों के नाम उजागर किए गए और मादुरो सहित पांच लोगों पर कुल 5.5 करोड़ डॉलर का इनाम घोषित किया गया, जिसे यूनाइटेड स्टेट्स न्याय विभाग ने ड्रग व्यापार को अमेरिका के खिलाफ हथियार बताकर उचित ठहराया।
अमेरिकी हमलों के बाद वेनेजुएला ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक मांगी
वेनेजुएला सरकार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। विदेश मंत्री गिल ने कहा कि अमेरिका द्वारा किए गए हमले वेनेजुएला की संप्रभुता पर आपराधिक आक्रमण हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा के लिए सुरक्षा परिषद को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
अमेरिकी हमले पर ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
ईरान ने वेनेजुएला पर कथित अमेरिकी सैन्य हमले की कड़ी निंदा की है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूएस की यह कार्रवाई वेनेजुएला की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है और यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ है। ईरान ने वेनेजुएला के साथ एकजुटता जताते हुए ऐसे किसी भी सैन्य हस्तक्षेप को अस्वीकार्य बताया।
मादुरो के खिलाफ अमेरिका में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू, रिपब्लिकन सीनेटर का दावा
अमेरिका में एक रिपब्लिकन सीनेटर ने दावा किया है कि यूएस ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू की है। सीनेटर के अनुसार, यह जानकारी उन्हें अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो से बातचीत के दौरान मिली
लेकिन ट्रंप ने इस पुराने मैनुअल को फाड़कर फेंक दिया है. मादुरो को सीधे उठा लेना और देश से बाहर निकाल फेंकना, यह कूटनीति नहीं, यह गैंगस्टर स्टाइल ऑपरेशन है. यह तरीका बताता है कि अब अमेरिका को किसी बहाने की जरूरत नहीं है. अगर उसे कोई नेता पसंद नहीं है, तो वह कमांडो भेजेगा और उसे उठा लाएगा. यह ‘रिजीम चेंज’ का 2.0 वर्जन है, जो बेहद खौफनाक है. यह एक संप्रभु देश के राष्ट्रपति का अपहरण है, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति ने अंजाम दिया है.
यूएन को ठेंगा…
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दयनीय स्थिति अगर किसी की है, तो वह है संयुक्त राष्ट्र की.ट्रंप ने मादुरो को हटाने का फैसला लिया, ऑपरेशन चलाया और दुनिया को बता दिया. इस बीच यूएन कहां था? अंतरराष्ट्रीय कानून कहां थे? किसी देश की संप्रभुता का सम्मान कहां गया? हकीकत यह है कि ट्रंप ने यूएन को ठेंगा दिखा दिया. संयुक्त राष्ट्र अब न्यूयॉर्क में बनी एक इमारत से ज्यादा कुछ नहीं है, जहां दुनिया भर के नेता साल में एक बार पिकनिक मनाने जाते हैं. जब बात अमेरिका के हितों की आती है, या ट्रंप की सनक की, तो यूएन के चार्टर की अहमियत रद्दी के कागज के बराबर भी नहीं रह जाती.
मादुरो का शासन चाहे कितना भी क्रूर क्यों न रहा हो, लेकिन एक देश के राष्ट्रपति को दूसरे देश की सेना द्वारा गिरफ्तार करना अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का मखौल उड़ाना है. अगर अमेरिका आज वेनेजुएला के साथ यह कर सकता है, तो कल किसी भी उस देश के साथ कर सकता है जो उसकी जी-हुजूरी नहीं करेगा. यूएन को ठेंगा दिखाकर अमेरिका ने साबित कर दिया है कि दुनिया में कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है, ताकतवरों के लिए नहीं.
नोबेल का ख्वाब और मादुरो का अपहरण
यह विरोधाभास देखिए. डोनाल्ड ट्रंप को लगता है कि उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए. वे अब्राहम एकॉर्ड्स की दुहाई देते हैं, वे दावा करते हैं कि वे नए युद्ध शुरू नहीं करते. लेकिन वेनेजुएला में उन्होंने जो किया, क्या वह शांति का मार्ग है?
शांति का नोबेल उन लोगों को मिलता है जो संवाद से, समझौते से विवाद सुलझाते हैं. बंदूक की नोक पर किसी नेता को गद्दी से उतारना और अपनी पसंद की सरकार थोपना, शांति नहीं है. यह साम्राज्यवाद का नया चेहरा है. ट्रंप शायद सोचते हैं कि मैंने एक तानाशाह को हटाया, इसलिए मैं मसीहा हूं. लेकिन इतिहास गवाह है कि जब-जब अमेरिका ने दूसरे देशों में जबरन लोकतंत्र थोपने की कोशिश की है- चाहे वह इराक हो, लीबिया हो या अफगानिस्तान वहां शांति नहीं, बल्कि दशकों की अस्थिरता आई है.
क्या अब ईरान की बारी है?
मादुरो के हश्र को देखकर दुनिया के कई देशों की राजधानियों में पसीना छूट रहा होगा. सबसे बड़ा सवाल क्या अब ईरान की बारी है? वेनेजुएला और ईरान, दोनों ही अमेरिका विरोधी धुरी के अहम हिस्से रहे हैं. मादुरो का गिरना तेहरान के लिए खतरे की घंटी है. ट्रंप ने दिखा दिया है कि वे रेड लाइन पार करने में संकोच नहीं करते.
ईरान के सु्प्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और वहां की सरकार सोच रही होगी कि अगर मादुरो को उनके बेडरूम (या जहां से भी) से उठाया जा सकता है, तो वे कितने सुरक्षित हैं? हालांकि, ईरान और वेनेजुएला में फर्क है. ईरान की सैन्य क्षमता और उसका प्रॉक्सी नेटवर्क वेनेजुएला से कहीं ज्यादा मजबूत है. ईरान पर सीधा हाथ डालना अमेरिका के लिए भी आसान नहीं होगा और यह तीसरे विश्व युद्ध को न्योता देने जैसा होगा. लेकिन मादुरो एपिसोड ने एक मनोवैज्ञानिक दबाव तो बना ही दिया है. अब अमेरिका के दुश्मन चैन से नहीं सो पाएंगे. ट्रंप ने डर का व्यापार शुरू कर दिया है.
लेकिन ये कब तक चलेगा?
सवाल यह है कि जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली यह नीति कब तक चलेगी? शॉर्ट टर्म में ट्रंप को वाहवाही मिल सकती है. उनके समर्थक इसे अमेरिकन पावर की वापसी कहेंगे. वे कहेंगे कि देखो, अमेरिका अब कमजोर नहीं है. लेकिन लॉन्ग टर्म में इसके परिणाम भयानक हो सकते हैं.
विश्वास का संकट: दुनिया का कोई भी देश अब अमेरिका पर भरोसा नहीं करेगा. संप्रभुता का मतलब खत्म हो जाएगा. हर देश अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु हथियार या घातक मिसाइलें बनाने की दौड़ में लग जाएगा, क्योंकि उन्हें पता है कि अंतरराष्ट्रीय कानून उन्हें नहीं बचा पाएगा.
बदले की आग: जब आप किसी देश के नेता को इस तरह अपमानित करके हटाते हैं, तो आप वहां की जनता के एक बड़े हिस्से को अपना दुश्मन बना लेते हैं. यह तरीका भविष्य में अमेरिका के खिलाफ नफरत और आतंकवाद को जन्म दे सकता है.
चीन और रूस का फायदा: अमेरिका की यह गुंडई छोटे देशों को चीन और रूस की गोद में धकेल देगी. वे सुरक्षा के लिए बीजिंग और मॉस्को की तरफ देखेंगे.




