इंदौर
इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित महिला दिवस के कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंची अमृता सिंह ने कहा कि मैंने स्वयं मध्यप्रदेश की विधानसभा में यह बात सुनी थी कि पिछले 310 दिनों में करीब 10 हजार महिला उत्पीड़न के केस दर्ज हुए हैं। मुझे अफसोस हुआ कि मैं ऐसे प्रदेश में रहती हूं। मुझे लगता है कि ये दिन बदलने चाहिए।
पूरी दुनिया 1909 से लेकर अब तक नारी दिवस मना रही है। तब से लेकर हमने 100 से सवा सौ सालों तक का एक सफर तय किया है। हम यहां पहुंचे हैं। सिर्फ यह बात में अपने लिए नहीं कह रही हूं। यह बात उन सभी कर्मठ महिलाओं के लिए कह रही हूं, जिन्होंने हर फील्ड में अपनी एक अलग पहचान बनाई।
अमृता सिंह ने कहा कि मैं समझती हूं कि महिलाएं वही करती हैं, जो उनका स्वभाव, जो उनका स्वाभाविक गुण है, लेकिन पुरुष भी काम करते हैं। यह पूरा ब्रम्हांड महिला और पुरुष को मिलाकर ही बना हुआ है। कई बार पुरुष महिलाओं को बराबरी की नजर से नहीं देखते हैं, इसलिए हमें महिला दिवस को मनाना पड़ता है।
अमृता सिंह ने कहा कि गांव, देश, समाज सभी धीरे-धीरे बदल रहे हैं और मैं बड़ी आशावादी हूं , मैं निराशावादी नहीं। आजादी के समय जिस जगह जो हमने शुरुआत की थी उस जगह से हम बहुत आगे बढ़ चुके हैं।गांव की बच्ची अब घरों से बाहर निकल कर अपने हक की बातें करती है। सभी महिलाएं अपना एक अलग मुकाम हासिल कर रही है। कोई खेल के मैदान में तो कोई राजनीति के मैदान में तो कोई IAS अफसर बनकर अपना मुकाम हासिल कर रही है। सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि जो बच्चियां अब आगे बढ़ रही है, उन्हें यह समाज अब एक्सेप्ट नहीं कर रहा है। महिलाओं की सोच समाज में तेजी से आगे बढ़ रही है। उस हिसाब से समाज को भी अब बदलने की जरूरत है।
इंदौर प्रेस क्लब में महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मंत्री उषा ठाकुर, नगर निगम आयुक्त, ASP मनीषा पाठक सोनी सहित कई महिलाओं का सम्मान भी किया गया।





