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 बंदियों को पुरोहित की ट्रेनिंग देना संविधान विरोधी कृत्य

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एक समाचार के अनुसार केन्द्रीय जेल में बंदी पुरोहित बनने की ट्रेनिंग ले रहे हैं। मुझे इस बात पर सख्त आपत्ति है। एक सरकारी संस्थान में इस तरह की ट्रेनिंग देना पूरी तरह से हमारे सेक्युलर संविधान के विरूद्ध है। जेल में अकेले हिन्दू धर्म के मानने वाले नहीं होते हैं। जेल एक ऐसा स्थान है जहां सभी धर्मों के मानने वाले रखे जाते हैं। क्या हिन्दू धर्म के अलावा दूसरे धर्मों को मानने वालों को भी पुरोहित बनने की ट्रेनिंग दी जा रही है?

अच्छा होता कि जेल में बंदियों को शिक्षक बनने की ट्रेनिंग दी जाती। शिक्षक का कार्य पूरी तरह से सेक्युलर है। पहले तो सभी बंदियों को शिक्षित किया जाए और फिर उन्हें आवश्यक डिग्री दिलवाकर शिक्षण कार्य के लिए प्रशिक्षित किया जाए। उन्हें स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारी निभाने के लिए भी प्रशिक्षित किया जाए। इस तरह की ट्रेनिंग लेकर ये बंदी प्राथमिक चिकित्सा, ड्रेसिंग, पट्टी बांधना, दवाई देने आदि का काम कर सकते हैं। ये ऐसे कार्य हैं जिनमें किसी की धार्मिक आस्था बाधक नहीं बन सकती।

मेरी मांग है कि सभी राजनैतिक पार्टियां इसका विरोध करें। परंतु दुःख की बात है कि जो पार्टियां सेक्युलर होने का दावा करती हैं वे भी ऐसी संविधान विरोधी गतिविधियों का विरोध करना तो दूर रहा वे मूक दर्शक की भूमिका निभाती हैं। 

–    एल. एस. हरदेनिया,

 संयोजक,  राष्ट्रीय सेकुलर मंच मोबाईल 9425301582

Ramswaroop Mantri

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