एस पी मित्तल, अजमेर
विपक्ष के तमाम नेताओं को पता है कि राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा के गठबंधन एनडीए को पूर्ण बहुत है और एनडीए द्वारा घोषित उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ही राष्ट्रपति चुनी जाएंगी। लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों की ओर से यशवंत सिन्हा को विपक्ष का उम्मीदवार घोषित किया गया है। सिन्हा की उम्मीदवारी से अब राष्ट्रपति पद के लिए 18 जुलाई को मतदान होगा। विपक्ष चाहता तो राष्ट्रपति का चुनाव निर्विरोध हो सकता था। लेकिन कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल नहीं चाहते कि एनडीए का उम्मीदवार निर्विरोध चुना जाए। इसे भारत की स्वास्थ्य लोकतांत्रिक व्यवस्था ही कहा जाएगा कि हार तय होने के बाद भी यशवंत सिन्हा राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे हैं। चूंकि कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के समर्थन से यशवंत सिन्हा चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से पूछा जा रहा है कि यशवंत सिन्हा को उम्मीदवार क्यों बनाया गया है? असल में गत दिनों जब राजस्थान में राज्यसभा की चार सीटों के लिए चुनाव हुआ तो तय था कि भाजपा का एक ही उम्मीदवार जीतेगा, लेकिन भाजपा के निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष चंद्रा को समर्थन देकर कांग्रेस के तीन उम्मीदवारों का निर्विरोध चुनाव रोक दिया। भाजपा की इस राजनीतिक चाल से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कांग्रेस और समर्थक विधायकों को 10 दिनों तक होटलों में बंद रहना पड़ा। तब सीएम गहलोत ने निर्दलीय उम्मीदवार को मैदान में उतारने के लिए भाजपा की कड़ी आलोचना की। भाजपा पर विधायकों को खरीदने का आरोप भी लगाया गया। गहलोत इस तर्क को मानने को तैयार नहीं थे कि यह राजनीतिक निर्णय है। राजस्थान में कांग्रेस के 108 विधायक है, जबकि राज्यसभा के तीन उम्मीदवारों को जीतवाने के लिए 123 विधायकों के वोट चाहिए थे। यानी कांग्रेस को 15 वोटों का जुगाड़ करना था, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा को सिर्फ 11 वोटों का ही जुगाड़ करना था, क्योंकि चंद्र के भाजपा के 30 सरप्लस वोट पहले से ही थे। राज्यसभा चुनाव में गहलोत ने अपने राजनीतिक चातुर्य से कांग्रेस के तीनों उम्मीदवार जीतवा दिए। गहलोत ने राज्यसभा चुनाव के समय जो आलोचना की, अब वही उनको जवाब देय बना रही है। राज्यसभा चुनाव के समय यदि भाजपा का कृत्य गलत था तो क्या अब राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस और विपक्ष का कृत्य सही है? गहलोत को बताना चाहिए कि बहुमत नहीं होने के बाद भी राष्ट्रपति चुनाव में यशवंत सिन्हा को उम्मीदवार क्यों बनाया गया है?





