धार
धार में हिंदुओं की आस्था का केंद्र भोजशाला में मां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित करने का प्रयास किया गया है। इसको लेकर रविवार सुबह से ही कुछ फोटो- वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे हैं। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में पुलिस बल और आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। दूसरी तरफ सुबह से ही हिंदू समाज के लोग भी मूर्ति के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। हालांकि अभी भोजशाला में मूर्ति नहीं है।
भोज उत्सव समिति के संयोजक अशोक जैन ने कहा कि प्रशासन ने जो मूर्ति हटाई है, उसे वहां पर वापस लाकर स्थापित करें। मां वाग्देवी प्रतिमा प्रकट होना हमारे लिए उत्साह का विषय है। हम यहां विधिवत पूजन करेंगे। प्रशासन ने मूर्ति को गुप्त स्थान पर शिफ्ट कर दिया है। वापस मूर्ति नहीं लगाई जाती तो आगे आंदोलन किया जाएगा। जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की रहेगी।
इंदौर से स्पेशल फोर्स की टीम धार पहुंच गई है। इसके साथ ही एएसपी, एडीएम, 2 सीएसपी, 3 डीएसपी, 8 थाना प्रभारी सहित 180 से अधिक पुलिस जवान तैनात हैं। भोजशाला में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए आसपास के इलाके में पुलिसकर्मियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

इंदौर से स्पेशल टीम धार पहुंच गई है। यहां 180 से अधिक पुलिस जवान तैनात हैं।
फेंसिंग काटकर मूर्ति रखने का प्रयास
जानकारी के मुताबिक, भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन स्थित भोजशाला परिसर के बाहर लगी तार फेंसिंग को काटकर कुछ लोगों ने रात में मूर्ति रखने का प्रयास किया। हांलाकि जिन लोगों ने ऐसा करने की कोशिश की है, उनके बारे में अब तक कुछ पता नहीं चला है।
भोजशाला के आसपास लगे CCTV खंगाल रही पुलिस
एडिशनल एसपी डॉ. इंद्रजीत बाकलवार ने बताया कि ऐसा कृत्य करने वाले लोगों की पहचान की जा रही है। पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई करेंगे। भोजशाला के आसपास लगे CCTV फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने वाले लोगों पर भी पुलिस की कड़ी नजर है। फिलहाल शहर में शांति कायम है।
हिंदू महासभा ने जारी किया VIDEO
इस मामले में हिंदू महासभा की ओर से एक वीडियो जारी किया गया है। जिसमें 5 लोग खड़े दिखाई दे रहे हैं। उनमें से एक व्यक्ति कह रहा है कि मुझे जानकारी मिली है कि, धार भोजशाला के गर्भगृह में मां वाग्देवी का प्राकट्य हुआ है। यह पूरे सनातन धर्म के लिए के लिए हर्ष का विषय है। मां बागेश्वरी देवी ने जो आराधना स्वीकार की है वह हिंदू महासभा की है।
मैं उन कार्यकर्ताओं को जिन्होंने मां की सच्चे मन से आराधना की, जिनकी वजह से मां का प्राकट्य हुआ, उन्हें साधुवाद देता हूं। सभी सनातनियों से मैं अपील करता हूं कि मां आपको दर्शन देने के लिए भोजशाला में पधारी है। आप ज्यादा से ज्यादा संख्या में भोजशाला जाएं और मां के दर्शन करें।

इन लोगों ने खुद को हिंदू महासभा का सदस्य बताते हुए वीडियो जारी किया है।
हिंदू भोजशाला और मुस्लिम मस्जिद मानते हैं
भोजशाला में वाग्देवी यानी सरस्वती की पूजा होती है। इस भोजशाला को मुस्लिम मस्जिद मानते हैं, तो हिंदू भोजशाला। बसंत पंचमी पर भोजशाला को लेकर विवाद भी लगातार होते रहे हैं। यहां मंगलवार को ढोल, झांझ, मजीरे के साथ हिंदू समाज के लोग सुंदरकांड का पाठ करते हैं। इसके अलावा शुक्रवार को मुस्लिम समाज जुमे की नमाज पढ़ता है। बता दें, बाकी दिनों में परिसर सभी धर्म के लोगों के लिए खुला है। वहां कोई भी टिकट लेकर अंदर जा सकता है।
हिंदू समाज हर मंगलवार करेगा सत्याग्रह
भोज उत्सव समिति के महामंत्री हेमंत दौराया ने बताया कि भोजशाला की मुक्ति और मां वाग्देवी की पुर्नस्थापना के लिए पूरा हिंदू समाज सैकड़ों वर्षों से संघर्ष कर रहा है। हर मंगलवार हिंदू समाज सत्याग्रह करता है। उस सत्याग्रह के प्रताप के ही बल से मां वाग्देवी प्रकट हुई है।
पूरे समाज को जब यह बात मालूम हुई तो समाज स्वत: ही दर्शन के लिए भोजशाला आया तो पता चला कि प्रशासन ने वाग्देवी की प्राकट्य मूर्ति को कही दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया है। इससे भोज उत्सव समिति और पूरे हिंदू समाज में रोष है।
भोजशाला का इतिहास और इसे लेकर अब तक क्या-क्या संघर्ष हुआ
- प्रथम आक्रमण के समय भोजशाला के 1400 प्रकाण्ड विद्वानों ने संघर्ष कर अपनी आहुति दी।
- सन 1305 में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय तत्कालीन राजा महलक देव और गोगा देव ने युद्ध करते हुए वीरगति प्राप्त की।
- मेहमूद खिलजी के आक्रमण के समय राजपूत सरदार मेदिनी राय ने वनवासियों की सेना बनाकर विद्रोह किया।
- अंग्रेजों के शासनकाल में सन 1875 में भोपावर के पॉलिटिकल एजेंट मेजर किनकैड ने भोजशाला में खुदाई करवाई। कहा जाता है कि वे मुगल आक्रमणकारियों द्वारा खंडित कर जमीन में गाड़ दी गई वाग्देवी की प्रतिमा को लंदन लेकर गए, जो आज भी ब्रिटिश म्यूजियम ग्रेट रसल स्ट्रीट लंदन में रखी है।
- सन 1936 में मुसलमानों ने तत्कालीन दीवान नाडकर से नमाज के लिए भोजशाला में जगह मांगी, लेकिन हिंदू समाज के आक्रामक प्रतिकार के कारण इस मंदिर में नमाज नहीं हो सकी।
- सन 1937 से लेकर 1942 तक नमाज ना पढ़ने देने को लेकर हिंदू समाज ने संघर्ष किया।
- सन 1942 में धार स्टेट के तात्कालीन राजा ने मुस्लिम समाज को नमाज पढ़ने के लिए बख्तावर मार्ग पर मस्जिद के लिए स्थान दिया, जहां पर आज भी रहमत मस्जिद मौजूद है।
- राजा के द्वारा दी गई रहमत के कारण ही इसे रहमत मस्जिद का नाम दिया गया।
- सन 1952 में धार के हिंदू समाज ने महाराज भोज वसंतोत्सव समिति के नेतृत्व में प्रत्येक वसंत पंचमी पर धार्मिक एवं सांस्कृति कार्यक्रमों का आयोजन कर जनजागरण प्रारंभ किया।
- हिंदूवादी संगठन द्वारा ब्रिटिश म्यूजियम लंदन में कैद मां वाग्देवी की प्रतिमा को लाने का प्रयास शुरू हुआ। सरकार को ज्ञापन देकर इसे लेकर प्रयत्न होने लगे।
- सन 1961 में इतिहासकार पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर स्वयं लंदन गए और प्रतिमा को धार की मां वाग्देवी होने को लेकर प्रमाणित किया।
- वर्ष 1977 के बाद मंदिर परिसर में नमाज प्रारंभ हुई। इस दौरान पूर्व के एक आदेश का उल्लेख कर कुछ लोगों ने षड्यंत्र किया।





