अग्नि आलोक
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क्योंकि तुम पुलिस हो! 

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मंजुल भारद्वाज

जो वर्दी आपने पहनी है
इसका इक़बाल जानते हो
इसका इतिहास जानते हो
इसका ईमान जानते हो
इसका विधान संविधान
सम्मान जानते हो !

ये वर्दी पहनकर
जिन निहत्थे नागरिकों को
तुम रौंद रहे हो
उन्हीं नागरिकों ने
अपने बलिदान से
हासिल की थी
यह ख़ाकी वर्दी
अंग्रेजों को खदेड़कर !

जब स्वतंत्रता सेनानी
अपने प्राणों की आहुति
दे रहे थे तब तुम्हारे आक़ा
अंग्रेजों की पेंशन खा खा कर
उनके तवले चाट रहे थे !

इस वर्दी का सम्मान करो
संसद में बैठी उस भीड़ को गिरफ्तार करो
जिसने संविधान को लहूलुहान कर
CAA पास किया है
जो NRC लाकर
देश को तबाह करना चाहती है
जिस वोटर ID पर चुनकर आई
उसी वोटर ID को अवैध मानने वाली
इस अवैध सरकार को गिरफ्तार करो !

ख़ाकी वर्दी में आप
सिर्फ़ और सिर्फ़
संविधान के वफ़ादार हो
पर तुम तलवे चाटते हो
गद्दार नेताओं के
और तुम बहादुरी दिखाते हो
छात्रों को पुस्तकालयों में
विश्वविद्यालय में गोलियों से भूनकर
लड़कियों को पीटकर
महिलाओं को उठाकर
संविधान को बचाने वाले
शांतिपूर्ण प्रतिरोध करने वाले
नागरिकों को अपने बूटों तले
रौंद कर !

होश में आओ
संविधान से वफ़ादारी है तो
भरी सभा में सरेआम
नागरिकों को कपड़ों से
आतंकी बताने वाले
देशद्रोही को गिरफ्तार करो !

पर तुम नहीं करोगे
क्योंकि तुम पुलिस हो
ख़ाकी रंग का कपड़ा
पहने गुंडे … !

अभी भी अपनी वर्दी का मान रखो
याद रखो यह निहत्थे नागरिक
इस देश के मालिक हैं
तुम्हारे सत्ताधीश आकाओं को
उखाड़ फेंकेंगें.. !

पर तुम विकार से भरे हुए
मरे हुए जिस्म हो
क्योंकि तुम पुलिस हो!

Ramswaroop Mantri

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