भोपाल गैस त्रासदी के डरावने और दिल दहला देने वाले मंजर की यादों को ताजा रखने में फिल्म निर्माता भी पीछे नहीं रहे, कई डॉक्यूमेंट्रीज इस पर बनीं हैं, तो कई किताबें भी प्रकाशित की गई हैं।

भोपाल। आज भोपाल गैस त्रासदी को 38 साल हो चुके हैं। यह मौत का वो दिन है जिसने चंद घंटों में हजारों जिंदगियों को हमेशा के लिए सुला दिया था, तो पीढिय़ों तक को विकलांग करके रख दिया। 2-3 दिसंबर 1984 की दर्दनाक और खौफजदा स्याह रात आज भी लोगों के रोंगटे खड़े कर देती है। सुनाने वाला सिसकता है, तो सुनने वाला रोता है। तस्वीरें देखकर रूह कांप जाती है, जैसे सबकुछ अपने ही सामने हुआ हो…। ऐसे में इस डरावने और दिल दहला देने वाले मंजर की यादों को ताजा रखने में फिल्म निर्माता भी पीछे नहीं रहे, कई डॉक्यूमेंट्रीज इस पर बनीं हैं, तो कई किताबें भी प्रकाशित की गई हैं। अगर आप भी उस रात के खौफनाक मंजर की केस स्टडी करना चाहते हैं, तो यह खबर आपके काम की है।
भोपाल में यूनियन कार्बाइड कैमिकल प्लांट से निकली जहरीली गैस से 24 घंटों में हजारों लोगों की जान चली गई और हजारों उसके बाद अलग-अलग तरह की शारीरिक विसंगतियों का शिकार हो गए। कई लोगों को फेफड़ों संबंधी बीमारी हो गई तो कई जिंदगी भर के लिए विकलांग हो गए। उनकी पीढिय़ां आज भी जहर का बेहद गंभीर असर झेल रही हैं।
भोपाल- ए प्रेयर फॉर रेन
साल 2014 में ‘भोपाल- ए प्रेयर फॉर रेन’ नाम की एक फिल्म बनी थी। इस फिल्म में भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े कानूनी पहलू या इंसाफ को नहीं बल्कि पूरी घटना को बड़े परदे पर दिखाया गया था। फिल्म में देसी कलाकारों के साथ-साथ हॉलीवुड अभिनेता कल पेन ने भी किरदार निभाया था। इस फिल्म की खासियत ये थी कि इस फिल्म को तैयार करने में सात साल का समय लगा था।
वन नाइट इन भोपाल
बीबीसी ने 2004 में यह डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जिसमें भोपाल गैस त्रासदी पीडि़तों के बारे में दिखाया गया था। इसमें पीडि़तों के दर्द और अनुभवों को उन्हीं की जुबानी पर्दे पर चित्रित किया गया था।
भोपाल एक्सप्रेस
भोपाल एक्सप्रेस 1999 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। महेश मथाई के डायरेक्शन में बनी ये फिल्म दो नए शादीशुदा जोड़ों की कहानी थी जिनकी जिंदगी भोपाल गैस त्रासदी के बाद बिल्कुल बदल जाती है। फिल्म में केके मेनन, नसीरुद्दीन शाह जैसे कलाकारों ने काम किया था।
द यस मेन फिक्स द वल्र्ड
यह डॉक्यूमेंट्री फिल्मकार एंडी बिचलबम और माइक बोनान्नो ने मिलकर बनाई थी। फिल्म मुख्य रूप से भोपाल गैस त्रासदी के पीडि़तों के हक और न्याय की लड़ाई पर केंद्रित थी।
भोपाली (2011)
वैन मैक्सीमिलियन कार्लसन की यह डॉक्यूमेंट्री उस स्याह रात के दर्दनाक मंजर को बयां करती है। पीडि़तों का दर्द उनकी जिंदगी पर इसके दुष्प्रभावों को इसमें दिखाया गया है। खासतौर पर न्याय के लिए उनकी कभी खत्म न होने वाली लड़ाई पर भी फोकस किया गया है।
गैस त्रासदी पर प्रकाशित प्रमुख किताबें
– भोपाल गैस ट्रेजेडी आधी रात का सच- इसे लेखक विजय कुमार तिवारी ने लिखा है।
– भोपाल गैस त्रासदी और मीडिया – इसे लिखा है सत्य सिंह राठौड़ ने।
-भोपाल गैस त्रासदी का सच – इसे लिखा है मोती सिंह ने।
– भोपाल गैस ट्रेजेडी : आफ्टर 30 इयर्स – इसे लिखा है सुनीता नारायण और चंद्र भूषण के साथ ही रिचार्ड महापात्रा ने
– द भोपाल ट्रेजेडी : व्हाट रियली हैपेन्ड एंड व्हाट इट मीन्स फोर अमेरिकन वर्कर्स एंड कम्यूनिटीज एट रिस्क- इस किताब के लेखक हैं एम. अरुण सुब्रमन्यम ने।
– गैस ट्रेजेडी-भोपाल : वल्र्ड ग्रेटेस्ट इंडस्ट्रियल डिजास्टर – इसे लिखा है एच.एल. प्रजापति ने।
– भोपाल गैस ट्रेजेडी : ए सर्वाइवरर्स टेल मैमोअर – इसे लिखा है एल बी थापा ने।
– भोपाल गैस ट्रेजेडी- इसे लिखा है सुरूपा मुखर्जी ने।
– सर्वाइविंग डिजास्टर्स : सलीम्स जर्नी थ्रो हेल : द नेवर-एंडिंग सागा ऑफ द भोपाल गैस ट्रेजेड़ी : 4 इसे लिखा है सुरूपा मुखर्जी ने।
– 30 ईयर्स ऑफ टीयर्स : भोपाल गैस ट्रेजेडी- इसे लिखा है आमिर फैज ने।
– भोपाल – इसे लिखा है आकाश शुक्ला ने।
– भोपाल डिजास्टर : एन आईविटनेस एकाउंट इसे लिखा है ललीता शास्त्री ने।
– फाइव पास्ट मिडनाइट इन भोपाल : द एपिक स्टोरी ऑफ द वल्डर्स डेडलाइस्ट इंडस्ट्रियल डिजास्टर – इसे लिखा है डोमिनिक लैपिएरे और जेवियर ने।
वेबसीरीज भी बनकर तैयार
कई बॉलीवुड फिल्मों, डॉक्यूमेंट्रीज, किताबों के बाद अब एक वेबसीरीज के रूप में भी भोपाल गैस ट्रेजेडी दर्शकों के लिए बनाई जा चुकी है। ट्रू स्टोरी बेस्ड इस वेबसीरीज का फोकस उन गुमनाम हस्तियों के नाम है, जिन्होंने अपनी जिंदगी की परवाह किए बिना कई लोगों की जान बचाई। वाईआरएफ एंटरटेनमेंट की इस वेबसीरीज का नाम है ‘द रेलवे मेन, द अनटॉल्ड स्टोरी ऑफ भोपाल 1984’। बाबिल खान की इस वेबसीरीज को निर्देशित किया है डायरेक्टर शिव रवैल ने। ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर अब इसे देखा जा सकेगा।





