मणिपुर में हिंसा के 21 महीनों के बाद आखिरकार रविवार को राज्य के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बीरेन सिंह के इस्तीफे से मणिपुर की राजनीति में उथल-पुथल मच गई है। देखना होगा कि राज्य में आगे क्या होता है। इसमें केंद्र सरकार की भूमिका भी अहम रहने वाली है। सूत्रों के मुताबिक अगले दो दिनों के अंदर भाजपा नए मुख्यमंत्री का नाम तय कर सकती है।
सोमवार से शुरू हो रहे राज्य विधानसभा के सत्र में कांग्रेस बीरेन सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली थी। अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होने की संभावना थी। कोंराड संगमा की नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) के समर्थन वापस लेने के बाद भी सरकार को बचाए रखने के लिए भाजपा के पास पर्याप्त संख्या थी। लेकिन सूत्रों की मानें तो कई विधायक पार्टी के व्हिप को नकारते हुए अविश्वास प्रस्ताव पर बीरेन सिंह के खिलाफ वोट दे सकते थे, क्योंकि वे मुख्यमंत्री बदलने के पक्ष में थे। सूत्रों के अनुसार, मणिपुर में लगभग 12 विधायक मुख्यमंत्री परिवर्तन के पक्ष में थे। यहां तक कि मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष के साथ भी बीरेन सिंह के मतभेद सामने आए हैं।
बताया जा रहा है कि इन सभी परिस्थितियों पर केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत के बाद ही बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में भाजपा की जीत के बाद मणिपुर की स्थिति पर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं चाहता है। अब यह देखना होगा कि बीरेन सिंह के स्थान पर कौन मुख्यमंत्री बनता है।
राज्य में शांति स्थापना में मदद मिलेगी
भाजपा के सूत्रों ने उम्मीद जताई है कि बीरेन सिंह के इस्तीफे से राज्य में दो मुख्य जातीय समुदायों के बीच शांति स्थापित करने के लिए केंद्र के प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा। सूत्रों ने कहा कि राज्य में शांति और सुरक्षा उपायों में तेजी लाने के मकसद से ही पिछले साल दिसंबर में अजय भल्ला को राज्यपाल नियक्त किया गया था। सिंह के इस्तीफे से इस प्रक्रिया में मदद मिलेगी।





