सुसंस्कृति परिहार
लंबी जद्दोजहद और अफवाहों के बाद आखिरकार पल्टीकुमार बनने जा रहे कमलनाथ ने अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुन ली। जिसमें इंदिरा जी के तृतीय पुत्र की मंगल ध्वनि गूंज रही थी। राजीव और सोनिया जी के अलावा राहुल गांधी द्वारा दिया सम्मान सामने खड़ा हो गया।उनके ज़मीर ने उन्हें बचा लिया वरना भाजपा में उनकी गति सांप छछूंदर से भी गई बीती हो जाती। ज्योतिरादित्य ने जिस तरह अपने ज़मीर को गिरवी रखा और वहां कैसी हालत में हैं सब देख रहे हैं। कमलनाथ पर जो 1984 दंगे का भय था वे इससे मुक्त हो निडरता के रास्ते पर हैं वह स्वागतेय और महत्वपूर्ण है।राहुल ऐसे ही डरे लोगों का आव्हान भारत जोड़ो न्याय यात्रा में ‘सहो मत -डरो मत’के ज़रिए कर रहे हैं। बुज़दिल और कायर ही कथित विश्वगुरु की शरण में जा सकते हैं। उन्हें जाना ही चाहिए क्योंकि कांग्रेस अंग्रेज़ी शासन काल से ही निडरता की प्रतीक है। बहुसंख्यक भ्रष्टाचारी लोग ही अपने बचाव के लिए भाजपा में जा रहे हैं यह चतुर्दिक चर्चा में है। दागदारों से समृद्ध होती जा रही है भाजपा। मोदीजी दाग धोने की गारंटी देते हैं।ऐसी और कोई पार्टी नहीं है।
बहरहाल भाजपा का वह ख्वाब टूट गया कि राहुल गांधी के मध्य प्रदेश में प्रवेश करते ही यहां कांग्रेस के भारी भरकम पलायन का तोहफा दिया जायेगा।जिससे प्रदेश में कांग्रेसी सोच में बदलाव आएगा। विदित हो मध्यप्रदेश में हमेशा कांग्रेस और भाजपा में टक्कर होती रही है।इस दौरान कमलनाथ इस द्वंद में उलझे रहे उनके समर्थक कांग्रेसी भाजपा में जाने का हौसला बढ़ाते दिखे लेकिन कमलनाथ ने यू-टर्न नहीं लिया।इसकी वजहें भी साफ़ हैं भाजपा में उनकी उम्र को देखते हुए कोई पद नहीं मिल सकता था। दूसरा भाजपा पार्टी में एक बड़ा धड़ा कमलनाथ के खिलाफ विचार रखता था। जहां तक सवाल उनके पुत्र का है वह कांग्रेस सांसद है और पार्टी उसे छिंदवाड़ा से उम्मीदवार सूची में शामिल कर चुकी है।
ये सच है कि भाजपा का करिश्मा और कथित लोकप्रियता की चकाचौंध से कमलनाथ घबराए हुए थे तिस पर उनका प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद छिनने पर उन्हें निश्चित आघात लगा होगा किंतु यह भी सच है कि प्रदेश में युवाओं को किनारे रखा गया जिस पर राहुल की परिपक्व नज़र थी।उससे असहमति और राज्य चुनाव में अखिलेश यादव के साथ उनकी कड़वी बात सबको बुरी लगी। कांग्रेस के एक बुजुर्ग और समझदार व्यक्ति का ये व्यवहार बेशक अनुचित था।लगा वे सठिया गए हैं। इसलिए बदलाव ज़रूरी था।आज की स्थितियों में संघर्ष हेतु जुझारू युवा ही इन हालात में परिवर्तन कारी हो सकते हैं।
कमलनाथ जी जिस तरह इस कांड में, भले ही कुछ ना बोले हों पर वे यदि प्रारंभ में ही यह हौसला दिखा देते तो शायद कांग्रेस में वे यथास्थिति रहकर देशसेवा कर सकते थे इसी बीच वे राज्यसभा में जाने तत्पर दिखे जो गलत था संभावित है उन्होंने भाजपा से भी ऐसी ही दरकार की हो वहां से निराशा के बाद वे मन बदलने मज़बूरी हुए होंगे। बहरहाल उनका कांग्रेस में बरकरार रहना फायदेमंद होगा किन्तु उनकी ज़मीन खिसक चुकी है यह यथार्थ है। उन्होंने अपनी विश्वसनीयता कांग्रेस में लगभग खो दी है।अब यही बचता है कि वे पद और सत्ता के सम्मोहन से मुक्ति के साथ कांग्रेस का साथ दें।
देखिए,राजनीति में सिर्फ अपना क्षेत्र, अपना बेटा और पद से बढ़कर भी बहुत से सम्मान ऐसे होते हैं जो चिरस्मरणीय होते हैं। इस कड़ी में महात्मा गांधी,विनोबा, राम मनोहर लोहिया ,जयप्रकाश को याद रखना चाहिए। जो सत्ता से दूर रहकर भी बेहद सम्मानीय हैं। कमलनाथ को चाहिए कि वे सामाजिक क्रांति या सद्गभाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।आज देश को इसकी बहुत ज़रुरत है।ये शोहरत हमेशा ज़िंदा रहेगी।विदित हो कांग्रेस और समाजवादियों के आज़ादी के संग्राम में यही आदर्श रहे हैं। उन्हें आगे बढ़ाना कांग्रेस को बहुमूल्य अवदान होगा।





