भोपाल
बैरसिया के बसई गांव की गौ सेवा भारती गौशाला में 100 नहीं 850 गायों की मौत हुई है। यह दावा गायों को दफनाने के लिए गड्ढा खोदने वाले JCB ड्राइवर शाहरुख ने किया है। उनका कहना है कि गाड़ियों में भर-भरकर गायों के शव आ रहे थे। शाम चार बजे से बैरसिया कचरा खंती में गड्ढा खोदने का काम शुरू हुआ। 8-9 फीट गहरा गड्ढा खोदकर इसमें रात 12 बजे तक गायों के शवों को दफनाया गया।
800 से 900 गायों में आधे कंकाल थे। दफनाने के बाद नमक और केमिकल डाला गया, ताकि दुर्गन्ध न फैले। शाहरुख, नगर पालिका बैरसिया के JCB ड्राइवर हैं। रविवार से वह कचरा खंती में ही डटे हुए हैं।
दो दिन में कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपेंगे बैरसिया SDM
भोपाल के बैरसिया में भाजपा नेत्री निर्मला शांडिल्य की गौशाला में रविवार को कुएं में 20 गायों के शव, तो मैदान में 80 से ज्यादा गायों के शव और कंकाल पड़े मिले थे। इनमें से 8 गायों की मौत तो शनिवार रात को ही हुई थी।
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने गौशाला संचालिका निर्मला पर केस दर्ज किया, वहीं प्रशासन ने गौशाला का संचालन अपने हाथ में ले लिया। निर्मला 20 साल से इस गौशाला का संचालन कर रही हैं। इधर, सोमवार से मजिस्ट्रियल जांच भी शुरू हो गई। दो दिन के अंदर बैरसिया SDM कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपेंगे।

गौशाला में रविवार को कुएं में 20 गायों के शव मिले थे।
गौशाला से दिनभर निकलते रहे गायों के शव
गायों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा। सोमवार को सुबह 2 गायों के शव निकाले गए। देर शाम तीन और गायों के शव ट्रैक्टर से ले जाए गए। इनकी मौतें सोमवार को उस दौरान हुईं, जब प्रशासन के अमले के साथ पशु चिकित्सकों की टीमें गौशाला में मौजूद थीं। चिकित्सकों ने इलाज किया, लेकिन वे गायों को नहीं बचा पाए। मरने वाली अधिकतर गायों की उम्र 5 से 7 साल के बीच रही होगी।
शव सड़क किनारे फेंके, नपा ने भी नहीं उठाया
गौशाला में रविवार देर रात मरी गायों के शव गौशाला से थोड़ी दूर सड़क किनारे फेंक दिए गए। गायों के शव को दिनभर कुत्ते नोंचते रहे। शाम को नगर पालिका के कर्मचारी ट्रैक्टर लेकर गौशाला पहुंचे। यहां से तीन गायों के शव को ट्रैक्टर में लोड किया गया। ट्रैक्टर उसी रास्ते से गुजरा, जिस रास्ते में गायों के शव पड़े थे, लेकिन कर्मचारियों ने इन शवों को नहीं उठाया।

मरने वाली अधिकतर गायों की उम्र 5 से 7 साल के बीच थी।
ठंड से बचाने पर्दे लगाए, गायों को बोरों से ढंका
गौशाला में भूख-प्यास से तड़प रही गायों के लिए सोमवार को खाने-पानी की व्यवस्था की गई। उन्हें भूसा तो दिया गया, लेकिन वह सूखा था। इसके साथ ही उन्हें ठंड से बचाने के लिए गौशाला में चारों तरफ टीन शेड लगाए गए। कई गंभीर गायों को ठंड से बचाने के लिए बोरे से ढंका गया।
दिनभर राजनीति, नारेबाजी, श्रद्धांजलि
गायों की मौत के बाद बसई गांव में दिनभर राजनीतिक दलों के लोगों का आना-जाना लगा रहा। इस दौरान कांग्रेस, आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गौशाला के सामने नारेबाजी की। वहीं, गायों की कब्रगाह में जाकर कई नेताओं ने गायों को श्रद्धांजलि अर्पित की। आम आदमी पार्टी के नरेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि निर्मला को गौशाला खोलने के लिए जमीन दिग्विजय सरकार के कार्यकाल में दी गई थी।
भूखी-प्यासी बंद हैं 500 गायें
भोपाल के बैरसिया के बसई गांव की गौसेवा भारती गौशाला, 100 से अधिक गायों की मौतों की वजह से सुर्खियों में है। यहां गायों की मौत का सिलसिला अब तक थमा नहीं है। दैनिक भास्कर की टीम रविवार रात 1 बजे जमीनी हकीकत जानने गौशाला पहुंची, जहां 500 से अधिक गाय ठंड में कंपकंपाती मिलीं। इन सभी को खुले आसमान के नीचे छोड़ दिया गया था। रात करीब डेढ़ बजे एक गाय हमारे सामने ही लड़खड़ाकर गिर गई। करीब 10 मिनट बाद उसने दम तोड़ दिया। उसका शव वहीं पड़ा रहा। सुबह ट्रॉली भरकर गायों की हड्डियां गौशाला से निकाली गईं। पढ़िए रूह कंपा देने वाली ये रिपोर्ट…
टीम जब मौके पर पहुंची तो देखा कि वहां गायें ठंड में कंपकंपा रही थीं। उनके लिए शेड तक की व्यवस्था नहीं थीं। गायों के खाने के लिए भूसा और पानी तक का इंतजाम नहीं था। जिस जगह चारा डाला जाता है, वहां मिट्टी जमी हुई थी।
गौशाला की सुरक्षा में तैनात पुलिस बल ने बताया कि रात करीब 10 बजे प्रशासन ने गायों के लिए 1 ट्रक भूसा भेजा था, लेकिन वो गायों को दिया ही नहीं गया। भूसा ट्रक पर ही लदा रहा, क्योंकि प्रशासन ने गायों की देखरेख के लिए किसी की ड्यूटी नहीं लगाई थी।
अब तक 100 से ज्यादा गायों की मौत
भोपाल के बैरसिया में भाजपा नेता निर्मला देवी शांडिल्य की गौशाला में रविवार को कुएं में 20 गायों के शव, वहीं मैदान में 80 से ज्यादा गायों के शव और कंकाल पड़े मिले थे। 8 गायों की मौत शनिवार रात को ही हुई थी। इसके बाद पुलिस ने गौशाला संचालक निर्मला देवी पर केस दर्ज किया। वहीं प्रशासन ने गौशाला का संचालन अपने हाथ में ले लिया। निर्मला देवी 20 साल से गौशाला का संचालन कर रही हैं।

गौशाला से गायों की इतनी हडि्डयां निकलीं कि उन्हें ट्रॉली पर लादकर ले जाना पड़ा।
देखरेख के लिए किसी की तैनाती नहीं
गायों की मौत के बाद प्रशासन ने गौशाला का अधिकार अपने हाथ में ले लिया, लेकिन देख-रेख के लिए अमला तैनात नहीं किया। गायें भूख-प्यास से तड़पती रहीं। उन्हें देखने वाला कोई नहीं था। कई गायें भोजन के लिए गौशाला से निकलकर तालाब की तरफ घूमती रहीं। इस दौरान उन्हें रोकने वाला भी कोई नहीं था। इधर कुत्तों के झुंड ने गायों पर हमला भी कर दिया।
10 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा
बैरसिया की यह गौशाला सरकारी जमीन पर है। करीब 10 एकड़ जमीन पर कब्जा किया गया है। यहां तार फेंसिंग कर बाड़ा बनाया गया है। आसपास के गांवों के किसान मवेशियों को गौशाला में छोड़ जाते हैं। मवेशी की सेवा के लिए किसान 100-200 रुपए का अनुदान देते हैं।

गौशाला में गायों की हड्डियां इकट्ठा करने के लिए सफाईकर्मियों को लगाया गया।
डेढ़ रुपए में गाय की सेवा मुश्किल
गौशाला की संचालक निर्मला देवी रात करीब डेढ़ बजे बाहर आईं। उन्होंने बताया, ‘एक गाय की सेवा के लिए प्रशासन से डेढ़ रुपए मिलता है। वह भी दो-तीन साल में। ऐसे में इतने कम पैसे में गाय की सेवा करना मुमकिन नहीं। फिर भी मैं अपने स्तर पर गायों की सेवा कर रही हूं’। वहीं रात में गायों को खुले आसमान के नीचे रखने पर उन्होंने कहा, ‘प्रशासन ने गायों को बाहर रखा है। मैंने गायों के लिए पन्नी लगाकर उनके रहने की व्यवस्था बनाई थी, जिसे प्रशासन ने निकाल दिया’।
गौशाला में गायों के लिए खाना नहीं होने पर उन्होंने कहा कि वे हर रोज भूसा मंगाती हैं। निर्मला देवी ने हंसते हुए भास्कर से बातचीत में कहा, ‘मैं भाजपा की नेता हूं। 30 साल से सक्रिय कार्यकर्ता रही हूं। भाजपा से ब्लॉक अध्यक्ष रही हूं। मंडी सदस्य भी रही हूं। पहले मंडी वाली और अब गौशाला वाली मैडम के नाम से जानी जाती हूं। ठंड के कारण 3-4 गायें मर गई हैं। हम कितना ध्यान दें। पन्नी (पॉलीथिन) के कारण मौत हो जाती हैं। मैं बुजुर्ग महिला हूं। मुझे परेशान किया जा रहा है। जो आरोप लगा रहे हैं, वो हमारे विरोधी हैं। हमारे पास 400 गायें हैं। अधिकतर गायें किसानों की हैं।’





