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कश्मीर बैठक में भाजपा ही रही सफल …!

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सुसंस्कृति परिहार
5अगस्त 2019 से कश्मीर में जो बेनूरी छाई हुई है उसे रौनकें अता करने की पहली कोशिश केन्द्र ने आज की है जिसमें उन्होंने कश्मीर के 14 राजनैतिक दलों के साथ दिल्ली में बात करने की मुहिम शुरू की है । तकरीबन दो साल से वहां राज्यपाल शासन है। स्थितियां वहां कैसी हैं यह इस बात से ही पता चल रहा है कि बातचीत दिल्ली में हो रही है और कश्मीर में 48घंटे पूर्व से एलर्ट जारी है।यह बहुत अहम बैठक है जिस पर शामिल नेताओं ने जो अपेक्षाएं ज़ाहिर की हैं उन्हें जानना  ज़रूरी है-नेशनल कॉन्फ़्रेंस के फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि उम्मीद है हम पीएम और गृह मंत्री के सामने अपना एजेंडा रख पाएंगे. हमारी मांग है कि जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल हो।पीडीपी की महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हम बातचीत का मौक़ा नहीं खोना चाहते। हम बताएंगे कि 5 अगस्त 2019 को जो हुआ, वो कितना गलत था।कांग्रेस के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा हमारी पहली मांग होगी।CPIM के नेता मो यूसुफ़ तारिगामी ने कहा कि उनकी बात सुनने का और अपनी बात रखने का मौक़ा है. जब तक वो फ़ैसला नहीं करते तब तक सही क़दम नहीं कह सकते।अपनी पार्टी केअल्ताफ़ बुख़ारी ने कहा कि लोग अब भी दर्द और ग़ुस्से में हैं। पीएम को खुला दिल दिखाने की ज़रूरत है. पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल हो।चुनाव होने चाहिए।ज्ञातव्य हो कि गुपकार संगठन ने जिला विकास परिषद( डी डी सी) में सबसे ज्यादा सीटें जीतकर भाजपा को धारा 370हटाने पर करारा जवाब दिया था।मतलब साफ़ समझ आता है कि नेता ही नहीं बल्कि वहां की अवाम धारा370 लगाने और पूर्ण राज्य का दर्जा समाप्त करने के खिलाफ है।

  • दूसरी तरफ  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जम्मू-कश्मीर को लेकर सर्वदलीय बैठक से पहले कश्मीरी पंडित इसके विरोध में उतरे। कश्मीर पंड़ितों ने सर्वदलीय बैठक का विरोध किया और जम्मू में प्रदर्शन भी किया गया। महबूबा के पाकिस्तान से बातचीत की बात पर डोंगरा फ्रंट भी प्रर्दशन कर रहा है।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रैना ने साधा महबूबा पर निशाना पीएम मोदी संग बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना होने से पहले जम्मू-कश्मीर के भाजपा अध्यक्ष रविंद्र रैना ने महबूबा मुफ्ती पर हमला किया। पाकिस्तान वाले बयान पर बोलते हुए रैना ने कहा कि गोली और बोली एक साथ नहीं चल सकती।बीजेपी नेता विजय सोनकर शास्त्री ने ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा है कि हमने कई बार परिसीमन का विषय इस आशय से उठाया कि अनुसूचित जातियों व जनजातियों की लगभग 25 सीटें बढ़ेंगी।वह आज पूरा होगा जो प्रधानमंत्री का सपना है

दोनों तरफ से आए इन विचारों से साफ झलकता है कि कश्मीर के नेता पूर्ण राज्य के दर्जे पर अडिग हैं जिसकी घोषणा गृहमंत्री अमित शाह ने केन्द्र शासित दर्जा देने के बाद कहीं थी। चुनाव कराने पर उनका ज़ोर है ताकि जम्हूरियत कायम हो । बैठक में लगभग एक सुर से सभी नेताओं ने पूर्ण राज्य की मांग पर मुहर लगाई  उन्हें आश्वासन भी मिला । गुलाम नबी आजाद ने कहा जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराना जरूरी है पहली मांगकश्मीर में लोकतंत्र मजबूत करना है. केंद्र जम्मू-कश्मीर में रोजगार की गारंटी देकश्मीरी पंड़ितों की वापसी के लिए कदम उठाए कश्मीर में राजनैतिक कैदियों को रिहा किया 
 पंडितों की घर वापसी पर ज़ोर दिया। बैठक में सिर्फ बातें ही हुई जो बेनतीजा ही साबित हुई।

  1. जबकि भाजपा का प्रमुख ध्येय दुनिया को ये दिखाना है कि कश्मीर के तमाम नेताओं से मिलकर ही कार्ययोजना बनाते हैं जबकि पिछली जबरिया घटनाओं से सिर्फ कश्मीर ही नहीं सारी दुनिया वाकिफ है। इसीलिए भाजपा  अपनी लोकतांत्रिक नीति को प्रचारित करने सबसे पहले तमाम नेताओं के साथ फोटो सेशन करती है।

 इस बैठक की ज़रूरत और अहमियत इससे भी पता चलती है कि जम्मू-कश्मीर के भाजपा नेताओं से अध्यक्ष जेपी नड्डा करीब 40 मिनट तक बातचीत करते हैं। फिर गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री दोनों बैठक से पूर्व बहुत पहले पहुंच बैठक का एजेंडा तय करते हैं । आने वाले कश्मीरी नेताओं को इससे पूर्व कोई एजेंडा नहीं बताया जाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजित डोभाल, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और अन्य बड़े अधिकारी रहेंगे। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर से फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, गुलाम नबी आजाद, निर्मल सिंह, रविंद्र रैना, हुसैन बैग, सज्जाद लोन, भीम सिंह, युसूफ तारिगामी शामिल रहे।

जैसा कि पहले से ही ज़ाहिर था कि एजेंडा विहीन यह बैठक मात्र औपचारिकता ही थी। सबके साथ फोटो सेशन से देश दुनिया में भाजपा की छवि ज़रूर निखरेगी।वे अपने मकसद में सफल रहे ।कश्मीर के नेताओं की उम्मीदें धरी रह गई। सबसे अच्छी बात ये रही कि इन शामिल तमाम प्रतिनिधियों ने अवाम की आवाज जिस एकजुटता से बुलंद की वह सराहनीय है। हालांकि कश्मीर के हालात में फिलहाल सुधार के कोई संकेत नहीं मिले।ये बात ज़रूर है साथ बैठने से मन की बातें तो साफ़ साफ़ कह दी गई।   कश्मीर के नेताओं से बातचीत से तो स्पष्ट यही हो रहा है कि यह  अंतरराष्ट्रीय दबाव और चीनी घुसपैठ के बीच बीजेपी के लिए स्थानीय समर्थन हासिल करना ही मुख्य मकसद था जिसमें वह सफल रही।

Ramswaroop Mantri

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