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वरदान अभिषाप हम साथ साथ हैं….

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शशिकांत गुप्ते इंदौर

महामारी से संक्रमित होने से बचने के लिए वैक्सीन उपलब्ध हो रही है।यह वैक्सीन निर्धारित समयावधि के अंतर में दो बार लगवानी पड़ती है।प्रकृति का खेल भी निराला है।अभिषाप और वरदान दोनों ही प्राकृतिक रूप से साथ साथ चलतें हैं।

महामारी का प्रकोप शुरू हुआ आमजन को एहतियात बरतने की सलाह दी गई।जो कोरोना की टेस्टिंग में Positive हुए उन्हें उपचार की सुविधाओं के लिए चिकित्सकों और चिकित्सालयों के उपकार पर निर्भर होना पड़ा।जो मरीज उपकृत हुए वे मरीज और उनके परिवारजन, बीमारी की तीव्रता से ज्यादा चिकित्सालयों की सुविधाओं और चिकित्सकों की फीस के असामान्य से गति दौड़ते मीटर की रफ्तार देखकर मानसिक रूप से Coma में अर्थात प्रगाढ़ बेहोशी में चले गए।

प्रख्यात हस्यव्यंग्य के कवि स्व. काका हाथरसी ने अपने एक व्यंग्य में लिखा है कि, एक सामान्य आदमी के घर चोरी हुई।पुलिस तहकीकात करने आई।पुलिसकर्मी चोरी हुई वस्तुओं की सूची बना रहा था।फरियादी ने बहुत विनम्र भाव प्रकट करते हुए पुलिसकर्मी से कहा साहब चोरी हुए सारे समान की सूची में  ये जो तवा, दो थाली, और परात बचें है इन्हें भी चोरी के सामान की सूची में लिख दो।पुलिसकर्मी ने पूछा ऐसा क्यो?फरियादी ने  बहुत ही विनम्रता से कहा साहब आप  चोर को पकड़ने की  औपचारिकता का निर्वाह करोगे उसका गुप्त मेहनताना मैं यह बेंचकर ही तो दे पाऊंगा?महामारी से पीड़ित अधिकांश लोगों के अनुभव उक्त सामान्य आदमी की तरह ही हो गएं हैं।यही तो आमजन के लिए अभिषाप सिद्ध हुआ।ऐसी विकट परिस्थिति में Public domain ( सार्वजनिक क्षेत्र ) में यह चर्चा है।भू माता की खरीदी बिक्री के सौदे धड़ल्ले से हुएं हैं।अचल संपत्ति के व्यापार की मंदी को चिकित्साक्षेत्र में कार्यरत लोगों द्वारा ना सिर्फ ऑक्सीजन मिला बल्कि अचल संपत्ति के कारोबार को अंग्रेजी के Bulk ( थोक ) में आर्थिक मदद भी मिल गई है।यह fact समाचार है, या fack न्यूज है।यह रामजी जाने अपन तो सिर्फ Public domain में जो चर्चा हो रही है,उसे ही दोहरा रहें हैं।अपने देश में भू माता का बहुत महत्व है।राम भगवानजी की अर्धाग्निनी मा सीता इसी भू मात से प्रकट हुई थी।जो लोग नास्तिक हैं,उन्हें रामजी की कथा सुनाने वाले प्रकाण्ड विद्वान लोग,लाखों रूपयों के मानधन को प्राप्त कर सुनाते हैं।

इसीलिए रामजी के दरबार में भी भू माता की खरीद फरोख्त होती है तो आश्चर्य नहीं होता है।यह आलोचना का विषय नहीं है।रामजी के आस्थावान सेवकों द्वारा जमीन की सौदेबाजी की गई। यह खबर पढ़ सुनकर एक व्यंग्यकार मित्र ने अपनी टिप्पणी  सिर्फ दो बार *राम-राम, राम राम* कह कर दी।साथ ही अपने व्यंग्यकार होने का परिचय देतें हुए एक कहावत का स्मरण दिलाया  “डायन भी सात घरों को बक्श देती है।” सम्भवतः डायन अपने कृत्य को जिस कर में आंजाम देती होगी उसे सातवां घर ही समझती होगी।जिस तरह एक पीड़ित पति या पत्नी  वर्तमान जन्म को ही सातवां जन्म मानकर समाधान कर लेतें हैं।व्यंग्यकार ने यह कहावत और उदाहरण क्यों सुनाया यह तो व्यंग्यकार जाने?इसके उपरांत भी यदि किसी की भावनाएं आहत हो रही हो तो लेखक क्षमा पार्थी है।जो भी हो अभिषाप और वरदान साथ साथ चलतें है यह बात पक्की है।महामारी हो प्राकृतिक आपदाएं हो यह विकट परीस्थितियां किस्मत वालों के लिए वरदान सिद्ध होतीं हैं और बदनसीब वालों के लिए अभिषाप सिद्ध होतीं हैं।
शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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