बड़वानी में भूअर्जन एवं पुनर्वास कार्यालय , नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण कार्यालय का घेराव किया
आज सरदार सरोवर से विस्थापित मछुआरों के द्वारा कसरावद से राजघाट तक नाव की रैली निकालकर अपना अधिकार जताया।राजघाट (कुकरा) में नर्मदा किनारे सभी भाई बहनों ने संकल्प लिया की हम हमारा अधिकार नही छोड़ेंगे, जलाशय में ठेकेदारी नही होने देंगे।राजघाट (कुकरा) से बड़वानी के मुख्य मार्ग से होते हुए बड़वानी में भूअर्जन एवं पुनर्वास कार्यालय , नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण कार्यालय का घेराव किया।
भूअर्जन एवं पुनर्वास कार्यालय, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण बड़वानी में SDM महोदय श्री भूपेंद्र रावत जी, कार्यपालन यंत्री श्री चोंगड जी, मत्स्य विभाग के अधिकारी श्री लोकेश चौहान जी व क्षेत्रीय विधायक राजेन मंडलोई जी एवं नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर के साथ सैकड़ों विस्थापित मछुआरे ने इनके समक्ष बात रखी।
मध्यप्रदेश की मत्स्यव्यवसाय नीति तथा विविध आदेश और घोषणाओं का, योजनाओं का पालन होकर हमें हमारा हर अधिकार प्राप्त हो, यही हमारी अपेक्षा है|
हम सभी सरदार सरोवर के विस्थापित प्रभावित होने से हम नर्मदा ट्रिब्यूनल फैसला (1979) तथा नर्मदा योजनाओं के लिए, एवं सरदार सरोवर के लिए विशेष रूप से, घोषित हुए पुनर्वास संबंधी आदेशों का भी संपूर्ण और न्यायपूर्ण अमल त्वरित किया जाने की मांग कर रहे हैं| निम्नलिखित मुद्दों की गंभीर दखल लेकर, हमारे साथ संवाद करके, जरूरी मुद्दों को विभागीय तथा राज्य स्तरीय शासनकर्ताओं और संबंधित शासकीय संस्थाओं तक पहुंचाकर आप हर मुद्दे पर निराकरण और / या अमल करेंगे या करवाएंगे यह भी हमारी अपेक्षा है!
1. सरदार सरोवर आंतरराज्य परियोजना होकर, इस संबंधी सभी मुद्दों पर- लाभ, हानि, पुनर्वास इत्यादि आंतरराज्य जलविवाद पर 10 सालों बाद पारित हुए नर्मदा ट्रिब्यूनल के फैसले के तहत् दिये आदेश के अनुसार ही कार्यवाही की जानी है| ट्रिब्यूनल का यह फैसला 18.10.2000 के सर्वोच्च अदालत के फैसले अनुसार भी, कानून माना जाता है इसलिए इसके पालन की जिम्मेदारी तथा कर्तव्य शासनकर्ताओं का है, यह आप भी जानते होंगे!
इस फैसले के अनुसार [धारा XI, उपधारा V(8)] सरदार सरोवर जलाशय में मत्स्य पालन / व्यवसाय का अधिकार राज्य शासन का है| इसी के तहत् आयोजन करने संबंधी संयुक्त संचालक / सचिव रहे केंद्रीय कृषि मंत्रालय में शामिल मत्स्यविभाग के अधिकारी ने कुछ साल पहले ही महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात इन तीनों राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा था| उसके बाद और आधार पर महाराष्ट्र ने सहकारी समितियां, जो आदिवासी, विस्थापित मछुआरों की रही है, गठित करके कार्य को काफी सहयोग देकर आगे बढ़ाया है! महाराष्ट्र शासन ने 21 मत्स्य सहकारी समितियों के संघ का पंजीयन करके, उन्हें खाद, बीज, प्रशिक्षण, नावडी- जाल, गाडीयां आदि देकर सरदार सरोवर जलाशय में मत्स्यव्यवसाय को विकसित किया है! मध्यप्रदेश शासन ने हमारी 31 मत्स्य सहकारी सोसायटीयों के प्रस्तावित संघ को, दिनांक 19.11.2017 के रोज प्रस्तुत किये प्रस्ताव को, इंदौर के संभागीय अधिकारियों की अनुशंसा के बावजूद आज तक पंजीयन नहीं दिया है| यह बहुत दुखद एवं अन्यायपूर्ण है| कृपया इस पर निर्णय की कार्यवाही की जाए!
2. सरदार सरोवर जलाशय में मछुआरों के घर, नाव, जाल भी डूबग्रस्त हो चुके हैं| हमारे ट्रिब्यूनल का फैसला याने कानून, पुनर्वास नीति, मत्स्यव्यवसाय नीति तथा उसी का हिस्सा रहे शासन के 2017 तक के आदेशों के अनुसार, पात्रता आधारित पुनर्वास के जो लाभ बाकी है, उसके कारण भी अन्याय हो रहा है| कईयों को घर के लिए भूखंड नहीं मिला है, तो शासकीय भवनों में रहना पडा है, मकान निर्माण के लिए 5.80 लाख रु. का अनुदान न मिलने पर भूखंड प्राप्त होने पर भी निर्माण नहीं कर पाये हैं, हमारी आजीविका बांध से प्रभावित हो चुकी है और 2023 में तथा पूर्व में भी जो बांध संबंधित बाढ़ से डूबग्रस्त हुए घर, सामान इत्यादि की भरपाई नहीं मिली है| इसपर शासन के पास जानकारी तैयार है और हमारी ओर से भी शासन के विविध स्तर पर आवेदन प्रस्तुत है| आप इस पर कार्यवाही कराके, कानून, नीति तथा न्यायालयीन आदेशों का उल्लंघन रुकवायेंगे, यही अपेक्षा है|
3. सरदार सरोवर और जलाशय में, नर्मदा घाटी के अन्य बड़े बांधों की तरह मत्स्यव्यवसाय ठेकेदारों को सौंपकर उनकी बड़ी कमाई और मछुआरों की लूट होना हमें मंजूर नहीं है| सहकारी समितियां, जो उच्च न्यायालय में राज्य शासन से शपथ पत्र / आश्वासन देने पर, गठित हुई है, उनका हक छिनना भी गलत होगा, इसकी दखल ली जाए|
4. हमें पता चला है कि गुजरात का प्रस्ताव है, तीनों राज्यों का एक बोर्ड गठित करके उसके द्वारा सरदार सरोवर में मत्स्याखेट / मत्स्यव्यवसाय चलाने का| महाराष्ट्र शासन को यह मंजूर नहीं और कानूनी अधिकार के तहत् मध्यप्रदेश शासन ने भी इसे वर्षों तक नकारा है| अभी भी, हमारा हक और राज्य का भी अधिकार नकारकर यह विकल्प मंजूर नहीं करें, मध्यप्रदेश सरकार, यही हमारा स्पष्ट मानना है, जिस पर कई आवेदन हम राज्य स्तर तक दे चुके हैं!
5. हमारी पीढियों से चल रही आजीविका नर्मदा नदी और अब बने जलाशय पर निर्भर रही है| हमें सरदार सरोवर विस्थापित के नाते अन्यथा भी प्रभावित (घर, गांव इत्यादि) होने से वैकल्पिक आजीविका का अधिकार है और वह देने का निर्णय तथा नियोजन 1993 से, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण तथा नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण से किये आयोजन, अहवालों में प्रस्तुत हुआ है| लेकिन आजतक मध्यप्रदेश शासन ने सरदार सरोवर बांध से हमारी आजीविका पर हुए असर की दखल सही तरीके से नहीं ली है| औद्योगिक तथा अजैविक खेती से जलाशय में (स्थिर जलसंचय होने पर) अवशिष्ट पदार्थ तथा शहरों का सीवेज, ट्रीटमेंट प्लांट के बिना बहने पर तथा अवैध रेतखनन से जो प्रदूषण भयावह मात्रा में हो रहा है, उससे मछली की कई सारी प्रजातियां लुप्त हो चुकी है| मत्स्यविभाग इस पर क्या कार्यवाही कर रहा है, कृपया बताइये!
गर्मी में जलाशय में जलस्तर काफी कम होने से हमारे मत्स्याखेट पर गंभीर असर हो रहा है| कई गावों में काफी दिनों तक हर साल मत्स्याखेट बंद होता है तो मछुआरे भी मजदूर बन जाते हैं| गर्मी में जनवरी से मई- जून 15 तक सरदार सरोवर में पर्याप्त मात्रा में पानी रखने की सुनिश्चिती की जाए, जिसकी जरूरत है, मछुआरों के अलावा किसानों को और पेयजल के ग्रामीण, शहरी सभी लाभार्थियों को भी!
6. सरदार सरोवर जैसे जलाशय में क्रूझ चलाने से जल, जलसंपदा, हवा पर भी गंभीर असर होगा, यह रिपोर्ट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल की है| इससे हमारे आजीविका बर्बाद होगी| इस कार्य को राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण- भोपाल खंड ने 2022 में तथा सर्वोच्च न्यायालय के 4 मार्च, 2024 के आदेश ने प्रतिबंधित किया है| इसके बावजूद बड़वानी से केवडिया तक पर्यटन के नाम पर क्रूझ चलाया जाए तो वह आदेशों तथा पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन होगा| इस पर तत्काल रोक लगाये|
7. महाराष्ट्र की तरह हमारी, हर सहकारी समिति को तौलकेंद्र बनाने, बीज, खाद की व्यवस्था करने, नावडीयाँ- जाल देने, तथा मछली मंडी हर तहसील में नदी किनारे से 5 किलोमीटर के अंदर उपलब्ध करने की मांग है|
8. हमारी समितियों के सदस्य तथा पदाधिकारीयों को सहकार प्रक्रिया, कानूनी नियोजन एवं मत्स्याखेट संबंधी (बीज- खाद निर्माण जैसे) कार्य पर प्रशिक्षण देना बहुत जरूरी है| यह मत्स्यविभाग और सहकार विभाग ने मिलकर करना मंजूर किया लेकिन इस दिशा में कोई पर्याप्त और प्रभावी कदम आजतक नहीं उठाये गये हैं| कृपया इसका नियोजन, हमारी सहभागिता से किया जाए|
9. मत्स्याखेट करने वाले ‘किसानी’ वर्ग में ही आते हैं| सभी मछुआरा भाई और बहनों को भी किसान क्रेडिट कार्ड तथा सभी शासकीय योजनाओं का लाभ दिया जाए|| 06 जून के राज्य शासन से सभी जिलाधिकारियों को दिये निर्देशों के तहत् सभी मछुआरों को (समितियों के सदस्यों को और अन्य भी) राशन- सस्ता अनाज मात्र 5 किलो अनाज के बदले 15 किलो अनाज, तेल, दाल का लाभ दिया जाए| 15 जून से 15 अगस्त के दौर में मत्स्याखेट बंद रखना जरूरी होते हुए हमें 3000/- के बदले 10,000/- रुपए का सहयोग शासन से दिया जाए| हमें हर समिति के लिए एक वाहन मछली के परिवहन के लिए, मंडी नजदीक नहीं हो तो उपलब्ध कराया जाए|
10. कुक्षी तहसील के मछुआरों के तथा सामने के नर्मदा किनारे के बडवानी जिले के बिजासन जैसे गाव के मछुआरों के साथ कुछ किसान उनके मोटरपंप चुराने रात को आते हैं, ऐसा झूठा आरोप लगाकर काफी अन्याय कर रहे हैं| कोई सबूत न होते हुए, पुलिसों की भी साथ लेते हैं| इससे मछुआरों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है| बिना कोई सबूत के किसी भी मछुआरे के साथ अन्याय नही किया जाये|





