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*’बॉलीवुड ने देशप्रेम से ज्यादा प्रेम कहानियों को तरजीह दी’-लिट चौक में बोले CM मोहन यादव*

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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लिट चौक में कहा कि बॉलीवुड ने देशप्रेम की तुलना में प्रेम कहानियों को अधिक दिखाया। उन्होंने संयुक्त परिवार, सादगीपूर्ण विवाह, मित्रता, शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से नौकरी देने वाला बनने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि मनोज कुमार ने देशप्रेम पर आधारित कई प्रभावशाली फिल्में बनाईं, लेकिन बड़े बैनरों ने इस दिशा में गंभीरता नहीं दिखाई।

मुख्यमंत्री ने प्रश्नोत्तर सत्र में संयुक्त परिवार की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार में रहने से एक-दूसरे को सहारा मिलता है और कुटुंब की छाया बनी रहती है। अपने निजी जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक व्यस्तताओं के कारण वे अपनी पहली बेटी के बचपन के कई पड़ाव जैसे बैठना और चलना, खुद नहीं देख पाए, यह बातें उन्हें परिवार के लोग बताते थे।

अपने बेटे की सामूहिक विवाह में हुई शादी को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के परिवार से उन्हें प्रेरणा मिली। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के भाई के बेटे की शादी भी सादगी से हुई थी। इसी प्रेरणा से जब उनका बेटा सामूहिक विवाह के लिए तैयार हुआ, तो उन्होंने उसी माध्यम से विवाह कराया।

मुख्यमंत्री ने मित्रता के महत्व पर बोलते हुए श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सच्चे मित्र को संकट में कभी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। सुदामा जब कष्ट में कृष्ण से मिलने गए, तो कृष्ण ने उन्हें छह माह तक अपने पास रखा। लौटते समय कुछ नहीं दिया, लेकिन पीछे से उनकी ऐसी सहायता की कि उनके जीवन में समृद्धि आ गई।

उन्होंने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने संदीपनी आश्रम में शिक्षा ग्रहण की, तभी उनके मुख से गीता का उपदेश निकला। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने सपनों को पूरा करने के लिए पूरी तन्मयता से जुट जाएं और नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इसी दिशा में निरंतर प्रयासरत है।

 ‘पत्रकारिता में विचारधारा का घालमेल नहीं होना चाहिए’, लिट चौक में वक्ताओं ने रखी अपनी बात

इंदौर के लिट चौक के तीसरे दिन पत्रकारिता, साहित्य और राजनीति पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता में विचारधारा का घालमेल नहीं होना चाहिए। फेक खबरों से सावधानी जरूरी है। साहित्य में साहस, संघर्ष और संस्कृति को अनिवार्य बताया गया।वक्ताओं ने कहा कि न्यूज रूम में घड़ी देखकर काम नहीं किया जाता, क्योंकि घटनाएं समय देखकर नहीं होतीं। नौकरी में न्यूज रूम पत्रकार के साथ चलता है।

वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी ने कहा कि दंगों जैसी संवेदनशील घटनाओं के दौरान पत्रकारों को भड़काऊ सामग्री से बचने की हिदायत दी जाती है, ताकि तनाव न बढ़े। इसका सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

विचारधारा से खबरों के प्रभावित होने के सवाल पर वक्ताओं ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी सोच और विचारधारा होती है, लेकिन यदि काम के दौरान विचारधारा हावी हो जाए तो वह पत्रकारिता नहीं रह जाती। पत्रकार को अपनी विचारधारा घर पर छोड़कर आना चाहिए। मतदान केंद्र के बाहर भी यदि विचारधारा साथ चलती है तो घालमेल होता है। वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता में विचारधारा से पहले देश होना चाहिए। पत्रकारिता केवल ग्लैमर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का काम है।

सुमित अवस्थी ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि मीडिया की साख गिर रही है। मीडिया को अपनी सीमाएं तय करनी होंगी। खबर परोसने से पहले उसे पूरी तरह जांचना जरूरी है। दर्शकों को भी सोशल मीडिया कंटेंट को संदेह की नजर से देखना चाहिए, क्योंकि यह डीपफेक का दौर है। फेक खबरों को अपने स्तर पर रोकना होगा।

वायरल कंटेंट के दबाव पर उन्होंने कहा कि यदि कोई घटना सच है और मोबाइल में कैद है तो उसे दिखाने में हर्ज नहीं है, लेकिन यह भी देखना होगा कि पाठक क्या देखना चाहता है। कंटेंट को वायरल दर्शक ही करता है, वही अपनी पसंद बताता है।

साहित्य में साहस, संघर्ष और संस्कृति जरूरी
लेखक नीलोत्पल मृणाल ने कहा कि बोलचाल की भाषा पाठकों को सबसे ज्यादा पसंद आती है। साहित्य में साहस, संघर्ष और संस्कृति का होना जरूरी है। यदि इनका अभाव है तो वह साहित्य श्रेष्ठ नहीं हो सकता। किसी भी विषय पर लिखने के लिए उसकी गहरी जानकारी होना जरूरी है। केवल उपन्यास पढ़कर उपन्यास नहीं लिखा जा सकता।

Ramswaroop Mantri

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