कोलकाता
क्वीन ऑफ पॉप कही जाने वालीं मशहूर पार्श्व गायिका ऊषा उत्थुप का कहना है कि पूरा सिस्टम बेवजह के मुद्दों पर कीमती पैसा और कीमती वक्त बर्बाद कर रहा है। पहले रोटी, कपड़ा और मकान पर बात कीजिए। इन असल मुद्दों पर कोई बात नहीं हो रही। कोरोना में हमारे लिए सरकार ने जो किया, उस पर हमें गर्व और खुशी होना चाहिए। हमेशा सरकार को क्रिटिसाइज करना सही नहीं। ऊषा उत्थुप से बातचीत के प्रमुख अंश…
मेरा कोई गॉडफादर-गॉडमदर नहीं
मैं 51 साल से गा रही हूं। इंडस्ट्री में मेरा गॉडफादर या गॉडमदर नहीं है। ऑडियंस ही मेरा गॉड है। इंडस्ट्री में मेरे आने का टाइमिंग सही रहा। मैं नाइट क्लब में गाती थी, आज भी गाती हूं और इस पर मुझे गर्व है। 1969 में दिल्ली में ओबेरॉय होटल में गा रही थी, तभी आरडी बर्मन, देव साहब ने मुझे सुना। फिर फिल्म में गाने का मौका दिया। उसके बाद से बहुत सारे प्रोजेक्ट्स मैंने पूरे किए। अब तक की जर्नी फैंटास्टिक रही।
लैंग्वेज से प्यार किया, इसलिए 17 भाषाओं में गा सकी
मैंने 17 लैंग्वेज में गाने गाए हैं। 6 फॉरेन लैंग्वेज में भी। क्योंकि मैं एक पीपल सिंगर हूं। लोग पूछते हैं आपको जॉनर क्या है तो मैं कहूती हूं मेरा जॉनर पीपल म्यूजिक है। जो लोगों को पसंद आता है, मैं वो गाती हूं। मैं बहुत जल्दी जान गई थी कि लोकल लैंग्वेज में गाने पर लोगों से कनेक्ट ज्यादा होता है। स्कूल के दिनों से ही पढ़ने में बहुत अच्छी थी। मुंबई के जिस स्कूल में पढ़ी हूं, वहां मेरा मीडियम इंग्लिश था। हिंदी दूसरी, मराठी तीसरी और फ्रेंच चौथी लैंग्वेज थी।
इस कारण फाउंडेशन बचपन से ही बहुत मजबूत था। मुझे लैंग्वेज सीखने का शौक भी बहुत है। अलग-अलग भाषाएं आने का ही नतीजा रहा कि मैंने बिहार से लेकर असम तक के छोटे-छोटे शहरों में भी लाइव प्रोग्राम दिए हैं। जो लोग इस फील्ड में आना चाहते हैं, उन्हें भी कहूंगी कि ज्यादा से ज्यादा लैंग्वेज सीखिए। इससे आपको काम के मौके भी ज्यादा मिलने लगेंगे।ऊषा कहती हैं कि देश में कई महापुरुष हुए हैं और ये पूरे देश के हैं। जैसे जमशेदजी टाटा सिर्फ मुंबई नहीं, बल्कि हम सबके हैं। ऐसे ही रविंद्रनाथ टैगोर सिर्फ बंगाल के नहीं बल्कि पूरे भारत के हैं।
गाना गाती हूं, तब असल में कम्युनिकेट कर रही होती हूं
मैंने कभी संगीत की फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं ली। मुझे जो मिला, वो भगवान की देन है। म्यूजिक मेरा बिजनेस नहीं है। मेरा काम तो कम्यूनिकेशन करने का है। मैं जो गाना गा रही होती हूं, असल में ऑडियंस से कम्यूनिकेट कर रही होती हूं। जैसे मैं गा रही हूं कि,’कसमें वादे प्यार वफ़ा सब / बातें हैं बातों का क्या’ तो मैं खुद को उस सिचुएशन में रखकर ऑडियंस के साथ कम्यूनिकेट कर रही हूं। फिल्म के बारे में सोचकर कभी नहीं गाया। ऊषा अपने लुक के बारे में कहती हैं- मेरी परवरिश एक मिडिल क्लास फैमिली में हुई है। इसलिए पहनावा भी वैसा ही है। पहले बिंदी थोड़ी छोटी लगाती थी, बाद में थोड़ी बड़ी हो गई। साड़ी हमेशा पहनती हूं। जैसी दिखती हूं, वैसी ही हूं।
राजनीति में नए लोगों की जरूरत
मैं पॉलिटिक्स में कभी नहीं आना चाहती। मैं बहुत सेल्फिश हूं। सभी का प्यार चाहती हूं। जो लोग पॉलिटिक्स ज्वॉइन कर रहे हैं, उन्हें गुडलक कहूंगी। यदि आप लोगों के भले के लिए काम करना चाहते हैं तो ये अच्छी बात है। हमें पॉलिटिक्स में नए खून और युवाओं की जरूरत है, जो देश के बारे में सोचें, बात करें और जिन्हें लोग सुनें। ऊषा कहती हैं- हमेशा सरकार की आलोचना करना सही नहीं। कोविड महामारी पूरी दुनिया पर आई है, सिर्फ हम पर नहीं। ऐसे में यदि सरकार आपसे मास्क लगाने को कह रही है, सोशल डिस्टेंसिंग फॉलो करने को कह रही है तो कर लीजिए न। क्या बचपन में घरों में पैरेंट्स नहीं कहते थे कि हाथ-पैर धोकर अंदर आओ। इसमें इतनी बहस क्यों? सरकार ने जो हमारे लिए किया, उसके लिए हमें सरकार का शुक्रिया अदा करना चाहिए।
बंगाल का कल्चर इतना नाजुक नहीं कि एक झोंके से टूट जाए
देश में कई महापुरुष हुए हैं। और ये पूरे देश के हैं। जैसे जमशेदजी टाटा सिर्फ मुंबई नहीं, बल्कि हम सबके हैं। ऐसे ही रविंद्रनाथ टैगोर सिर्फ बंगाल के नहीं बल्कि पूरे भारत के हैं। उन्हें देश में हर जगह पढ़ा और पसंद किया जाता है। इन चीजों पर किसी का कॉपीराइट नहीं हो सकता। इसलिए जो लोग बंगाल के कल्चर खत्म होने की बात करते हैं, उन्हें कहना चाहती हूं, यह इतना कमजोर नहीं कि एक झोंके में टूट जाए। और न ही यह कोई बचाकर रखने की चीज है। ये है और हमेशा रहेगा।
नए सिंगर्स पर ऊषा कहती हैं कि मौजूदा दौर में बहुत सारे सिंगर्स बहुत अच्छा गा रहे हैं। इनमें श्रेया घोषाल, अरिजीत सिंह, सुनिधि चौहान, अमित मिश्रा, ऋचा शर्मा जैसे तमाम नाम शामिल हैं। चुनाव के पहले वोटर्स से यही अपील करना चाहती हूं कि वोट जरूर डालिए। कोरोना के सभी नियम फॉलो कीजिए। और सबसे जरूरी बात ये है कि शांति बनाए रखिए। शांति हमारे लिए बहुत जरूरी है।





