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ब्रेकिंग समाचार -साल का पहला सूर्य ग्रहण आज, ब्रेकिंग समाचार -सियासत में वंशवाद की नई बेल:सात दशक बाद भी दिल्ली अधूरी 

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इजरायल-हमाल संघर्ष पर बोले यूके के पीएम सुनक, बंद होना चाहिए युद्ध,अफगानिस्तान में महसूस हुए भूकंप के झटके, रिक्टर पैमाने पर 4.3 रही तीव्रता,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बिहार के नवादा और पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी के दौरे पर हैं। रोड शो और चुनावी रैली का आयोजन जोर-शोर से हो रहा है।  बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा, “आज मैंने नीतीश कुमार का एक चित्र देखा जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पैर छुए… हमें बहुत बुरा लगा। क्या हालात हो गए हैं? नीतीश कुमार हमारे अभिभावक हैं… इतना अनुभवी मुख्यमंत्री और कोई नहीं है जितने नीतीश कुमार हैं और वे प्रधानमंत्री मोदी के पैर छू रहे हैं…”

साख का सवाल: कांग्रेस बीते 10 साल में 51 चुनाव हारी, 50 कद्दावर नेताओं ने छोड़ी पार्टी; 12 पूर्व सीएम भी शामिल

गौरव वल्लभ, संजय निरुपम और विजेंदर सिंह…इसे कमल का आकर्षण कहें या अवसरवादिता। देश की सबसे पुरानी पार्टी का हाथ छोड़ने की होड़ मची हुई है। कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं की एक लंबी फेहरिस्त है। 10 सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2014 से 12 पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत 50 से ज्यादा बड़े नेता कांग्रेस को अलविदा कह चुके हैं। इन सभी नेताओं के कांग्रेस छोड़ने की वजह नेतृत्व और पार्टी की कार्यप्रणाली में कमियां बताई जा रही हैं। सबसे पुरानी पार्टी के पक्ष में चुनाव लड़ने वाले अधिकांश नेता अब भाजपा का गुणगान कर रहे हैं। नेताओं का छिटकने का असर चुनाव परिणाम पर भी साफ दिखाई दे रहा है।10 सालों में पार्टी लोकसभा और विधानसभा समेत कुल 51 चुनाव हार चुकी है।10 सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2014 से 12 पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत 50 से ज्यादा बड़े नेता कांग्रेस को अलविदा कह चुके हैं। इन सभी नेताओं के कांग्रेस छोड़ने की वजह नेतृत्व और पार्टी की कार्यप्रणाली में कमियां बताई जा रही हैं। 

12 पूर्व मुख्यमंत्री भी पार्टी को कह चुके अलविदा
हिमंत बिस्व सरमा, चौधरी बीरेंदर सिंह, रंजीत देशमुख, जीके वासन, जयंती नटराजन, रीता बहुगुणा जोशी, एन बीरेन सिंह, शंकर सिंह वाघेला, टी. वडक्कन, ज्योतिरादित्य सिंधिया, केपी यादव, प्रियंका चतुर्वेदी, पीसी चाको, जितिन प्रसाद, सुष्मिता देव, ललितेश त्रिपाठी, पंकज मलिक, हरेन्द्र मलिक, इमरान मसूद, अदिति सिंह, सुप्रिया एरन, आरपीएन सिंह, अश्विनी कुमार, रिपुन बोरा, हार्दिक पटेल, सुनील जाखड़, कपिल सिब्बल, कुलदीप  बिश्नोई, जयवीर    शेरगिल, अनिल एंटनी, सीआर केसवन।

2014 से कांग्रेस छोड़ने वाले 12 पूर्व मुख्यमंत्री

पूर्व मुख्यमंत्री          कब छोड़ी कांग्रेस                                किस दल में
अशोक चव्हाण        12 फरवरी, 2024                                  भाजपा
किरण कुमार रेड्डी     12 मार्च, 2023                                     भाजपा
दिगंबर कामत          14  सितंबर, 2022                                भाजपा
गुलाम नबी आजाद 26 अगस्त,2022 बनाई पार्टी
रवि नाइक 07  दिसंबर, 2021 भाजपा
कैटन अमरिंदर सिंह 02 नवंबर, 2021 भाजपा
लुइजिन्हो फलेरियो 29 सितंबर,2021 भाजपा
एसएम कृष्णा 28 जनवरी, 2017 भाजपा
एनडी  तिवारी 18 जनवरी, 2017 भाजपा
पेमा खांडू 16 सितंबर, 2016 भाजपा
अजीत जोगी 02 जून,2016 बनाई पार्टी
विजय बहुगुणा 31 जनवरी, 2014 भाजपा

चुनाव पूर्व छोड़ा साथ
मिलिंद देवड़ा, गीता कोड़ा, बाबा सिद्दीकी, राजेश मिश्रा, अंबरीश डेर, जगत बहादुर अन्नू, चांदमल जैन, बसवराज पाटील, नारण राठवा, विजेंदर सिंह, संजय निरूपम और गौरव वल्लभ।

10 साल में इन चुनावों में कांग्रेस को मिली हार

लोकसभा चुनाव : 2014, 2019
हिमाचल विधानसभा चुनाव : 2017
मध्यप्रदेश विस चुनाव : 2013,2023
उत्तराखंड विस चुनाव : 2017, 2022
उत्तर प्रदेश विस चुनाव : 2017, 2022
राजस्थान विस चुनाव : 2013, 2023
गुजरात विस चुनाव : 2017, 2022
छत्तीसगढ़ विस चुनाव : 2013, 2023
बिहार विस चुनाव : 2015, 2020
झारखंड विस चुनाव : 2014
सिक्किम विस चुनाव : 2014, 2019
असम विस चुनाव : 2016, 2021
अरुणाचल प्रदेश विस चुनाव : 2019
नगालैंड विस चुनाव : 2013, 2018, 2023

मणिपुर विधानसभा चुनाव : 2022
मिजोरम विस चुनाव : 2018
त्रिपुरा विस चुनाव : 2013, 2018, 2023
मेघालय विस चुनाव : 2023
बंगाल विस चुनाव : 2016, 2021
महाराष्ट्र विस चुनाव : 2014, 2019
उड़ीसा विस चुनाव : 2014, 2019
गोवा विस चुनाव : 2017, 2022
कर्नाटक विस चुनाव : 2018
तेलंगाना विस चुनाव : 2018
आंध्र प्रदेश विस चुनाव : 2014, 2019
तमिलनाडु विस चुनाव : 2016, 2021
केरल विस चुनाव : 2016, 2021
पंजाब विस चुनाव : 2022
हरियाणा विस चुनाव : 2014, 2019

कई युवाओं के लिए लॉन्चिंग पैड तैयार, पुराने वटवृक्ष भी कायम; जानिए प्रमुख चेहरे

Elections 2024 Bihar Politics New Faces in Contest Rohini Acharya Arun Bharti like candidates know more

बिहार के सबसे रसूखदार सियासी परिवार से ताल्लुक रखने वाली रोहिणी आचार्य इस बार लोकसभा चुनाव लड़कर अपना राजनीतिक करिअर शुरू करेंगी। लालू-राबड़ी परिवार से राजनीति में कदम रखने वाली वह आठवीं सदस्य हैं। इसी तरह, जदयू के दिग्गज नेता अशोक चौधरी की पुत्री शांभवी चौधरी लोजपा (आर) के टिकट पर समस्तीपुर सीट से सियासी पारी का आगाज करेंगी। वहीं, लोजपा (आर) के मुखिया चिराग पासवान ने जमुई की सीट से बहनोई अरुण भारती को टिकट दिया है।राजनीतिक वंशवाद की नई पौध में सबसे चर्चित नाम हैं रोहिणी आचार्य। वह अपने बीमार पिता पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को किडनी दान कर सुर्खियों में आई थीं। रोहिणी सारण सीट से चुनाव लड़ेंगी।

राज्य में वंशवाद और परिवारवाद की नई पौध को सियासत में रोपने का सिलसिला यहीं नहीं खत्म हो रहा। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के पुत्र अंशुल अभिजीत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रताप सिंह के पुत्र विकास सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री केदार पांडे के प्रपौत्र शाश्वत पांडे का भी चुनाव लड़ना तय है। भाजपा ने भी अपने दिग्गज नेता सीपी ठाकुर के पुत्र विवेक ठाकुर को टिकट दिया है।

पिता को किडनी देकर चर्चित हुईं रोहिणी
राजनीतिक वंशवाद की नई पौध में सबसे चर्चित नाम हैं रोहिणी आचार्य। वह अपने बीमार पिता पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को किडनी दान कर सुर्खियों में आई थीं। रोहिणी सारण सीट से चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। लालू परिवार में उनकी पत्नी राबड़ी देवी विधान पार्षद, पुत्र तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव विधायक, पुत्री मीसा भारती राज्यसभा सांसद हैं। राबड़ी के दो भाई साधु यादव और सुभाष यादव पहले से ही सियासत में हैं। हालांकि, यह अलग बात है कि अब मतभेद के कारण लालू परिवार से दोनों ने दूरी बना ली है।

चिराग हाजीपुर तो बहनोई जमुई से उतरे
सियासी कूटनीति में चाचा पशुपति पारस को मात देने वाले लोजपा (आर) के मुखिया और दिवंगत रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान ने तीन सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए हैं। पिता की परंपरागत सीट हाजीपुर से खुद मैदान में हैं। अपनी सीट जमुई से उम्मीदवारी के लिए बहनोई अरुण भारती पर भरोसा जताया है। चिराग ने समस्तीपुर सीट से शांभवी चौधरी को टिकट दिया है। शांभवी जदयू के दिग्गज नेता और नीतीश सरकार में मंत्री अशोक चौधरी की पुत्री हैं। अरुण और शांभवी लोकसभा चुनाव से ही सियासी पारी शुरू करेंगे।

लॉन्चिंग पैड पर मीरा कुमार का बेटा और पूर्व सीएम का प्रपौत्र
वंशवाद की तीन नई पौध सियासी पारी का आगाज करने की कतार में हैं। इनमें कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीरा कुमार के पुत्र अंशुल अभिजीत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह के पुत्र विकास सिंह और पूर्व सीएम केदार पांडे के प्रपौत्र शाश्वत पांडे का चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। कांग्रेस और राजद की ओर से इनके लिए सुरक्षित सीटों की तलाश जारी है। सहमति बनते ही उम्मीदवारी की घोषणा तय है।

पुराने वटवृक्ष भी कायम
वंशवाद के पुराने वटवृक्ष पहले की तरह राज्य की सियासत में कायम हैं। मसलन, बाहुबली आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद शिवहर से जदयू की उम्मीदवार हैं। उनका बेटा  विधायक है। भाजपा ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे सीपी ठाकुर के बेटे विवेक ठाकुर को नवादा से उम्मीदवार बनाया है।

बाहुबली और राजद से विधायक, सांसद रहे शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब सीवान सीट से उम्मीदवार होंगी। इसके अलावा कांग्रेस से निराश हुए बाहुबली पप्पू यादव पूर्णिया से उम्मीदवार होंगे। उनकी पत्नी रंजीता रंजन कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य हैं।

ये भी हैं कतार में
पश्चिम चंपारण से भाजपा उम्मीदवार संजय जायसवाल पूर्व सांसद मदन जायसवाल के पुत्र हैं। मधुबनी से भाजपा उम्मीदवार अशोक यादव पूर्व मंत्री हुकुमदेव नारायण यादव और औरंगाबाद से भाजपा प्रत्याशी सुशील कुमार सिंह पूर्व सांसद रामनरेश सिंह के पुत्र हैं। वाल्मीकिनगर से जदयू उम्मीदवार सुनील कुमार पूर्व मंत्री वैद्यनाथ महतो के पुत्र हैं। वैशाली से लोजपा (रा) प्रत्याशी वीणा देवी पार्टी के एमएलसी दिनेश सिंह की पत्नी हैं। सीवान में जदयू प्रत्याशी विजयलक्ष्मी कुशवाहा पार्टी के पूर्व विधायक रमेश कुशवाहा की पत्नी हैं।

नहीं मिला पूर्ण राज्य का दर्जा; आज भी दिल्ली अधूरी

सात दशक बाद भी दिल्ली अधूरी है। पूर्ण राज्य का दर्जा संभव नहीं हो पाया है, जबकि मसला आजादी के बाद ही उठ गया था। इसके लिए आंदोलन तक चले। 17 मार्च 1952 से 12 फरवरी 1955 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश कहा करते थे कि दिल्ली में मैं अच्छे तरीके से सरकार चला रहा था, लेकिन प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने मुझे मुख्यमंत्री के पद से इसलिए हटा दिया था क्योंकि मैं दिल्ली सरकार के लिए अधिक शक्तियों की मांग करने लगा था। 

अगले साल एक अक्तूबर 1956 को केंद्र सरकार ने दिल्ली विधानसभा समाप्त कर दी। इसके बाद से 1993 तक दिल्ली पर केंद्र सरकार का सीधा नियंत्रण रहा। इस बीच निगम और महानगर परिषद काम करती रहीं। चार दशकों में पूर्ण राज्य का दर्जा सियासत के केंद्र में रहा। इसमें भाजपा का स्वर मुखर रहा। केंद्र सरकार ने 1987 में जस्टिस आरएस सरकारिया की अगुवाई में एक कमेटी बनाई। बाद में सरकारिया के इस्तीफे से इसका नाम जस्टिस बाल कृष्ण कमेटी कर दिया गया। कमेटी ने दिल्ली के विकास के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा देने की सिफारिश की। 

इस पर केंद्र सरकार ने मई 1990 में संसद में बिल पेश किया। इसके बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) एक्ट, 1991 पास हुआ। इसमें चुनी हुई सरकार के अधिकारों की चर्चा थी। इसके तहत 1993 के विधानसभा चुनाव हुए और भाजपा के मदनलाल खुराना दिल्ली के मुख्यमंत्री बने, लेकिन विधानसभा को सांकेतिक शक्तियां ही मिलीं। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना तो दूर की कौड़ी ही बनी रही। 

दोबारा हुई कोशिश, लेकिन मिली नाकामी

  • 1998 में तत्कालीन दिल्ली सरकार ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का मसौदा तैयार किया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
  • केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री और दिल्ली में शीला दीक्षित मुख्यमंत्री रहीं। बिना पूर्ण राज्य के दिल्ली सरकार का काम बिना बाधा के चलता रहा।
  • 2014 में आप के सत्ता पर काबिज होने के बाद केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच पहले जैसा तालमेल खत्म हो गया। 
  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत जमीन, सेवा, पुलिस और पब्लिक ऑर्डर पर फैसला लेने का अधिकार सिर्फ एलजी के पास है।

पूर्ण राज्य का दर्जा न देने  के पीछे की बड़ी दलील
दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी है। यहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री रहते हैं। देश की संसद है। पूरी दुनिया के राजनयिक और दूतावास दिल्ली में मौजूद हैं। ऐसी स्थिति में अगर पूर्ण राज्य का दर्जा देने से दिल्ली को कानून व व्यवस्था समेत पुलिस का नियंत्रण भी देना होगा। जमीन व नौकरशाही पर नियंत्रण भी प्रदेश सरकार का रहेगा। इससे केंद्र की राज्य सरकार पर निर्भरता बढ़ेगी। विधायी व कानूनी के साथ मसला सियासी भी है। माना जाता है कि पूर्ण राज्य की सूरत में अगर केंद्र व दिल्ली की सरकार में टकराव होगा तो कानून व्यवस्था का बड़ा संकट पैदा होगा। इससे निपटना दोनों सरकारों के लिए आसान नहीं रहेगा।

ताइवान: भीषण भूकंप के बाद आए 681 झटके; आसपास सक्रिय चीनी नौसैनिक जहाजों पर पैनी नजर

Taiwan Earthquake richter scale magnitude 681 posts quake tremor Chinese Navy Vessels on border

ताइवान में तीन अप्रैल को 7.4 तीव्रता वाला शक्तिशाली भूकंप आया था। भूकंप के झटकों के बाद 10 लोगों की मौत होने की खबर भी सामने आई। एक नई जानकारी के मुताबिक भीषण भूकंप के बाद 681 झटके और महसूस किए गए। संवेदनशील हालात के बीच ताइवान अपने आसपास सक्रिय छह चीनी नौसैनिक जहाजों पर भी नजर रख रहा है।

ताइवान के हुवालियन शहर में तीन अप्रैल को आए 7.4 तीव्रता वाले शक्तिशाली भूकंप के बाद भी रोज अलग-अलग तीव्रता के झटके (ऑफ्टरशॉक) महसूस किए जा रहे हैं। पिछले चार दिनों में इस स्वायत्तशासी क्षेत्र ने कुल 681 झटकों का सामना किया। तीन अप्रैल को आए भूकंप में 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।

सेंट्रल वेदर एडिमिनिस्ट्रेशन (सीडब्ल्यूए) के मुताबिक, रविवार सुबह 8.12 तक ताइवान में 681 ऑफ्टरशॉक महसूस किए गए। इनमें रिक्टर पैमाने पर 6 से अधिक की तीव्रता के दो व 6.5 की तीव्रता का एक झटका शामिल है। हालांकि, एक स्थानीय समाचार एजेंसी ने रविवार को सीडब्ल्यूए के हवाले से कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है। ऑफ्टरशॉक की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। पिछले चार दिनों में यहां भूकंप के दैनिक झटकों की संख्या क्रमशः 314, 167, 111 व 89 रही। एजेंसी के मुताबिक, हाल के दिनों में ताइवान में 4-5 की तीव्रता वाले भूकंप के कुल 208 झटके दर्ज किए गए।

ताइवान अपने आसपास सक्रिय छह चीनी नौसैनिक जहाजों पर रख रहा नजर
भूकंप के झटकों के बाद संवेदनशील हालात के बीच ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय (एमएनडी) ने कहा कि वह देश में सक्रिय छह चीनी नौसेना पोतों पर नजर बनाए हुए है। ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सशस्त्र बलों ने निगरानी के साथ ही  जवाब में नौसेना के जहाजों को तैनात किया है। इस दौरान किसी भी चीनी सैन्य विमान को ताइवान जलडमरूमध्य की मध्य रेखा को पार करते या ताइवान के दक्षिण-पश्चिमी वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (एडीआईजेड) में प्रवेश करते हुए नहीं देखा गया। ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने कहा, हमने आसपास काम करने वाले 6 पीएलए जहाजों का सुबह 6 बजे पता चला था। 

 साल का पहला सूर्य ग्रहण आज, भारत में नहीं आएगा नजर

Solar Eclipse of the year not be visible in India today Duration will 4 hours 25 minutes

साल 2024 का पहला सूर्य ग्रहण सोमवार को लगने वाला है। नासा के मुताबिक, करीब 54 साल के बाद सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। इसकी अवधि चार घंटे 25 मिनट तक हो सकती है। इससे पहले इतना लंबा सूर्य ग्रहण 1970 में देखा गया था। अगली बार यह 2078 में दिखेगा। पूरे उत्तरी अमेरिका में सूर्य के सामने चंद्रमा के आने से जमीन पर जो परछाई बनेगी, वह 185 किलोमीटर चौड़ी होगी। यह छाया मेक्सिको, अमेरिका और कनाडा में पड़ेगी।भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा और इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। हालांकि, भारत में लोग नासा के यूट्यूब लाइव स्ट्रीम के जरिये इस दुर्लभ ग्रहण को देख सकते हैं।

नासा के मुताबिक, यह पूर्ण सूर्य ग्रहण मेक्सिको, अमेरिका और कनाडा के अलावा कई कैरेबियाई देश जैसे कोलंबिया, वेनेजुएला में दिखेगा। इसके अलावा स्पेन, ब्रिटेन, आयरलैंड, पुर्तगाल और आइसलैंड ग्रीनलैंड, जमैका, नॉर्वे, पनामा, निकारागुआ, रूस, प्यूर्टो रिको, सेंट मार्टिन वेनेज़ुएला, बहामास, जैसे देशों में भी नजर आएगा। हालांकि, भारत में यह दिखाई नहीं देगा और इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। हालांकि, भारत में लोग नासा के यूट्यूब लाइव स्ट्रीम के जरिये इस दुर्लभ ग्रहण को देख सकते हैं।

श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर: PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा, “…हम यहां 3 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर रहे हैं, जम्मू और बाकी जगहों पर हम कांग्रेस का समर्थन कर रहे हैं। जिस तरह संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं उसमें हम INDIA गठबंधन का समर्थन कर रहे हैं…”

तेजस्वी यादव का पीएम मोदी पर निशाना

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा, “… भ्रष्टाचार पर आज मैंने ट्वीट किया है उम्मीद है प्रधानमंत्री उस पर अपनी बात कहेंगे… परिवारवाद पर जब हमने आंकड़े दिए वह केवल बिहार के आंकड़े थे उस पर प्रधानमंत्री चुप क्यों है?… हम और आप हिंदू नहीं है? मेरे घर में मंदिर है हम पूजा करते है, क्या यह दिखाने वाली है ?क्या भाजपा के नेता खुद को भगवान समझ रहे हैं ? क्या उनका(भाजपा) विरोध भगवान विरोध भगवान का विरोध है? भाजपा अपनी तुलना भगवान के साथ न करें।”

कैसे बीजेपी गढ़ती है ऐसे नारे जो जुबां पे चढ़ जाते हैं!

2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी की नजर हैट्रिक लगाने पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता पर काबिज होने की कवायद में जुटी है। इसके लिए पार्टी ने ‘अब की बार 400 पार’ का नारा दिया है। इसके साथ ही पार्टी ‘मोदी की गारंटी’ का भी जोर-शोर से प्रचार कर रही है। ये कोई पहली बार नहीं है जब बीजेपी नेतृत्व ने आकर्षक टैगलाइन यानी नारों से जनमानस में अपनी दावेदारी और मजबूत करने की कोशिश की है। आकर्षक नारों का इस्तेमाल करना बीजेपी के लिए 2014 से ही एक प्रमुख रणनीति रही है, जब वे पहली बार ‘अब की बार मोदी सरकार’ के नारे के साथ सत्ता में आए थे। फिर 2019 चुनावों में ‘मोदी है तो मुमकिन है’ नारे ने सुर्खियां बटोरी। दोनों ही चुनाव बीजेपी ने शानदार तरीके से जीता।

2014 में आया ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ का नारा

बीजेपी ने 2014 में अपना चुनावी अभियान कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और महंगाई आदि मुद्दों पर केंद्रित किया था। उस समय पार्टी ने ‘अच्छे दिन’ का वादा किया। हालांकि, इसके बारे में विपक्ष का दावा है कि पिछले 10 वर्षों में कभी नहीं आया। 2013 के अंत में, जब देश में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे समाचार पत्रों में छाए हुए थे ऐसे वक्त में बीजेपी ने पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के साथ टैगलाइन दी- ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’। जिसका उस चुनाव में गहरा असर नजर आया। ‘अब की बार मोदी सरकार’ जैसी वन-लाइनर ने पार्टी के लिए जादू का काम किया। 2014 के आसपास सोशल मीडिया के उदय ने भी बीजेपी की इस चुनावी रणनीति को सही रफ्तार दी। इसका रिजल्ट ये हुआ कि पार्टी ने 543 लोकसभा सीटों में से 282 सीटें जीतकर अपना ऐतिहासिक जनादेश हासिल किया।

2019 में ‘मैं भी चौकीदार’ से पीएम मोदी ने विपक्ष को घेरा

2019 लोकसभा चुनाव की बात करें तो उस समय बीजेपी सत्ता में वापसी सुनिश्चित करने के लिए अपना रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रही थी। विपक्ष ने भारत और फ्रांस के बीच राफेल लड़ाकू जेट सौदे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। विपक्षी नेताओं, मुख्य रूप से तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस सौदे में ‘गलत तरीके से ट्रांजेक्शन’ हुआ था क्योंकि इस डील में पारंपरिक प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया गया था। राफेल विवाद की पृष्ठभूमि में, कांग्रेस ने नारा दिया ‘देश का चौकीदार चोर है’। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी ने अपने ‘पूंजीवादी दोस्तों’ को कथित अनुचित लाभ दिया था। पीएम मोदी पर कांग्रेस के इस हमले का बीजेपी की ओर से करारा जवाब दिया गया। इसमें बीजेपी नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल नाम के आगे ‘मैं भी चौकीदार’ जोड़ दिया।

2019 में ‘मोदी है तो मुमकिन है’ नारे का भी दिखा असर

दिलचस्प बात यह है कि पीएम मोदी ने जैसे सी इस कैंपेन को लॉन्च किया, कुछ ही घंटों बाद ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान दुनिया भर में ट्विटर के टॉप ट्रेंड में आ गया। राहुल गांधी को उनके ‘चौकीदार चोर है’ कमेंट पर बैकफुट में लाने लिए प्रधानमंत्री ने करारा वार किया। उन्होंने कांग्रेस नेता पर चौकीदारों के समुदाय को नीचा दिखाने का आरोप लगाया। पीएम मोदी ने कहा कि चूंकि उनके विरोधियों में उनका नाम सीधे लेने की हिम्मत नहीं है, इसलिए वे ऐसे नारों का सहारा ले रहे हैं जिन्होंने हर चौकीदार को संदेह के घेरे में डाल दिया है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले ‘मोदी है तो मुमकिन है’ नारा भी दिया। इसमें पाकिस्तान के खिलाफ की गई सर्जिकल स्ट्राइक की कार्रवाई और विकास के रिकॉर्ड पर जोर दिया गया। इसका काफी असर हुआ और बीजेपी ने 2019 चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 300 पार का आंकड़ा हासिल किया।

विपक्षी अटैक को ही पीएम मोदी ने बनाया हथियार

बीजेपी हमेशा से विपक्षी हमलों को ही अपने कैंपेन का हिस्सा बनाती रही है। कुछ ऐसा ही 2024 आम चुनाव से ठीक पहले देखने को मिला। बीजेपी की ओर से परिवारवाद के मुद्दे पर विपक्षी पार्टियों को घेरने पर आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ने करारा अटैक किया। उन्होंने पीएम मोदी के परिवार पर कमेंट किया। लालू यादव ने पटना में इंडिया ब्लॉक की रैली को संबोधित करते हुए वंशवादी राजनीति का मुद्दा उठाने के लिए पीएम मोदी पर निशाना साधा और पूछा कि पीएम का परिवार क्यों नहीं है। बस फिर क्या था पीएम मोदी ने आरजेडी मुखिया की इस बात पर करारा पलटवार करते हुए कहा कि 140 करोड़ भारतीय उनका परिवार है। इसी के बाद बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने ‘मोदी का परिवार’ अभियान शुरू किया।

2024 में ‘मोदी की गारंटी’ से वोटरों को रिझाने की कोशिश

इसके साथ ही बीजेपी 2024 के चुनावी अभियान में ‘मोदी की गारंटी’ पर खास फोकस कर रही। इसमें प्रधानमंत्री मोदी के उन वादों का जिक्र किया जा रहा जिन्हें उन्होंने पूरा किया। पीएम मोदी ने कहा कि ‘मोदी की गारंटी’ का मतलब गारंटी को पूरा करने की गारंटी है, जो इस कैंपेन का केंद्र बिंदु भी बन गया है। बीजेपी लगातार ‘गारंटी’ का इस्तेमाल केंद्र सरकार की ओर से पूरे किए गए वादों को बताने के लिए कर रही है। इसमें राम मंदिर उद्घाटन जैसे प्रमुख वादे भी शामिल हैं। इसके साथ ही पार्टी का एक और चुनावी नारा चर्चा में है ‘अबकी बार 400 पार’। अब इस टैगलाइन का लोगों पर कितना असर होगा ये तो 4 जून को नतीजों के बाद क्लीयर हो जाएगा। फिलहाल 2014 हो या 2019 या फिर 2024 का चुनावी रण, बीजेपी की ये टैगलाइन लोगों की जुबां पर जरूर चढ़ जाती हैं।

Ramswaroop Mantri

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