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क्या विचार भी आतंकवादी हो सकता है ?

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हिमांशु

अपनी ख़ुमारी में तुम आज
हमें दाता से याचक
और खुद को
याचक से दाता ही नहीं,
भाग्यविधाता बनाने की सोच रहे हो!

तुम्हारे नाजुक पैरों में
एक दिन जूते पहनाकर,
अपने पैरों में बिवाइयां…
हमने अपनी मर्जी से चुनी थी।

आज एहसानफरामोशी की
सारी हदें पार करके
अपनी खुदगर्जी में तुम
हमारे ही लिए खाइयां खोद रहे हो!

मर्जी और खुदगर्जी में
होता है फर्क जमीन आसमान का
तो चलो तुम भी करके देख लो
सारे जतन सारी कोशिशें
हमपर अपनी सोच थोपने के लिए..!
पर सच तो यही है न
आसमान कभी मजबूर नहीं हो सकता
धरती को सलाम ठोकने के लिए…!

सरिता सिंह
……………………………………………..

बाबा रामदेव ने टीवी चैनल पर इंटरव्यू में वैचारिक आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल किया है

आज हम इस अवधारणा पर विचार करेंगे

क्या विचार भी आतंकवादी हो सकता है ?

किस तरह के विचारों को वैचारिक आतंकवाद कहा जा रहा है ?

संक्षेप में कहें तो नरेन्द्र मोदी के किसी भी फैसले पर सवाल उठाना वैचारिक आतंकवाद माना जा रहा है

आज मजदूरों की पूरी मजदूरी या आठ घंटे से ज्यादा काम लेने की बात करना भी वामपंथी आतंकवाद माना जाता है

आदिवासियों की जमीनों को छीन कर बड़े पूंजीपतियों को देने के लिए आदिवासियों की हत्याएं उन्हें फर्जी मामलों में जेल में डालने, आदिवासी महिलाओं से सुरक्षा बलों द्वारा बलात्कार का विरोध करना भी वैचारिक आतंकवाद माना जाता है

और आदिवासियों के मानवाधिकारों की चिंता करने वालों को अर्बन नक्सली कह कर जेलों में डाला जा रहा है| जीएन साईबाबा, तथा कई सामाजिक कार्यकर्ता जेलों में डाल दिए गये हैं तथा वे कई सालों से जेल में हैं|

इसके अलावा दलितों द्वारा अपने साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ बोलना भी वैचारिक आतंकवाद माना जाता है |

भीमा कोरेगांव में दलितों की रैली से डर कर भाजपा सरकार ने सुधा भारद्वाज समेत अनेकों सामाजिक कार्यकर्ताओं को पिछ्ले एक साल से जेल में डाला हुआ है|

छात्रों की सस्ती शिक्षा की मांग करने को भी वैचारिक आतंकवाद माना जाता है

साम्प्रदायिकता का विरोध करना, अल्पसंख्यकों के लिए भी सामान हैसियत की बात कहना संविधान की बात मानने की मांग करना मानवाधिकारों के संरक्षण की मांग करना भी वैचारिक आतंकवाद कहलाता है

सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, मानवाधिकार आयोग, संसद, पुलिस की पक्षपात कार्यवाहियों पर सवाल उठाना भी वैचारिक आतंकवाद कहलाता है

वर्तमान सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना करना, सरकार की विफलता का विश्लेषण करना, सरकार द्वारा रोजगार को तबाह करने, अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देने नोटबंदी की आलोचना करना भी वैचारिक आतंकवाद माना जाता है

जस्टिस लोया की हत्या, गुजरात के बाबु बजरंगी और माया कोडनानी जैसे ह्त्यारों को जेल से बाहर करने पर सवाल उठाना भी वैचारिक आतंकवाद माना जाता है|

मोदी, अमित शाह, भाजपा, राष्ट्रीय स्वयम सेवक संघ और बजरंग दल की आलोचना वैचारिक आतंकवाद माना जाता है

इसके अलावा मुसलमानों को गलियाँ बकना, साम्प्रदायिकता का जहर फैलाना, आरक्षण और बाबा साहब के खिलाफ गन्दी गंदी गालियाँ पोस्ट करना,

बुद्धिजीवियों, प्रगतिशील विचारकों,कवियों, लेखकों मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, सस्ती शिक्षा की मांग करने वालों धर्म निरपेक्षता की बात करने वालों को टुकड़े टुकड़े गैंग कहना, उन्हें विदेशी एजेंट गद्दार, मुल्लों की औलाद कहना देशभक्ति मानी जाती है|

इस माहौल को बदलने की कोशिश में लगे रहना ही इस वख्त की सबसे बडी देशभक्ति है

हिमांशु कुमार

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