–सुसंस्कृति परिहार
देश में इस समय सरकार के विरुद्ध ख़िलाफ़त की की धाराएं प्रवाहित हैं।सच बात तो यह है,कि वर्तमान दौर में ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं है जहां से आंदोलन की छुटपुट चिंगारियां प्रज्वलित ना हो रही हों।उसकी वजह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार के बारह वर्षीय शासन में देश ने अपने देश के सम्मान के साथ देश के संविधान के साथ जो अपमान जनक व्यवहार हो रहा है उससे देशवासियों में बदहवासी का आलम तो है ही साथ ही साथ प्रतिपक्ष नेता और विपक्ष के लोगों की आवाज़ भी सुनी नहीं जा रही। ये कैसे लोकतांत्रिक गणराज्य में हम रह रहे हैं।इतना ही नहीं स्पीकर का विरोध करने वालों को जान से मारने की धमकी खुलेआम दी गई।वोट चोरी की कलई खुलने के बाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर कौन यकीन करेगा। मंत्रियों को पावर नहीं पर कोई आवाज नहीं। लोकतांत्रिक व्यवस्था के चारों खंभे धराशाई हो गए हैं।अंदर खलबली है किंतु बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे। कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ रही हैं। धर्म निरपेक्षता का कचूमर निकला जा रहा है।
जहां तक देश के सम्मान की बात है तो वह दुष्ट, निर्लज्ज अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास गिरवी रख दिया गया है। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश आज दुनिया के बदनुमा शख्स के इशारों पर नाच रहा है। वर्तमान सरकार के मुखिया ने वास्तव में अमेरिका के इस दुष्ट को खुश करने के लिए दुनिया के सबसे घृणास्पद अय्याश के इशारे पर इज़राइल में नाचा गया।यह देश की अवाम का मुसलसल अपमान है। वहीं इसी दुर्दांत राष्ट्रपति के कहने पर सिंदूर आपरेशन के दौरान कामयाब होती सेना को रोका गया।इसी के इशारे पर भारत के विश्वस्त साथी राष्ट्र रुस के यहां से सस्ता खनिज तेल आयात रोका गया और वेनेजुएला जहां के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी के अपहरणकर्ता डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर यहां से खनिज तेल खरीदने का आदेश दिया गया।जो हमारे सरेन्डर साहिब ने कुबूल कर लिया।
इधर गुपचुप टेड नीति से देश के ,70%किसानों को नष्ट करने पर हस्ताक्षर करने के बाद ज़श्न मनाया गया।एक सरकार के लंगोटिया गलगोटिया विश्वविद्यालय ने चीन का माडल चुराकर दुनिया में देश की नाक कटा दी।बेशक देश अनेकों समस्याओं से घिर चुका है।
सबसे दुखद सत्य तो यह है कि देश के भला चाहने वाले लोग जेल में ठूंसे जा रहे हैं।सोनम वांगचुक को सजा जिसको दुनिया श्रेष्ठ पर्यावरण मित्र मानती है। लद्दाख के विकास के लिए जो अभिनव प्रयोग करते हैं जेल में रखती है। वहीं एक ईमानदार पुलिस अफसर को सच बोलने के गुनाह में जेल देती है। जेएनयू के समझदार और देश हितैषी बात रखने वालों को सिर्फ जागरूक मुस्लिम छात्र होने पर अकारण वर्षों से जेल में डालें हुए हैं।ऐसे ही सैंकड़ों ईमानदार सरकार विरोधी होने पर ईडी सीबीआई के चंगुल में है।इसके बरअक्स बलात्कारी, हत्यारे,बैंक लुटेरे स्वच्छंद मुक्त घूम रहे हैं। मंहगाई चरम पर है। बुलडोजर चल ही रहे हैं। बेरोजगारी बरकरार है। महिलाएं असुरक्षित है। बच्चों के अपहरण साल दर साल बढ़ रहे हैं।
ऐसे चुनौतीपूर्ण वक्त में हम सबको निडर बनकर इनके विरुद्ध सत्याग्रह के रास्ते पर चलना होगा।जिसे पिछले कई सालों पहले राहुल गांधी ने समझ लिया था तथा उन्होंने डरो मत का महत्वपूर्ण नारा दिया था तथा स्वत:वे बिना डरे संपूर्ण देश में भारत जोड़ो न्याय यात्रा में चले।सबसे पहले राहुल गांधी ने उस नब्ज़ को पहचाना जहां से देश में नफ़रत का ज़हर पहुंचाया गया।वह था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। जिसके खिलाफ निडर होकर पहली बार राहुल गांधी ने आवाज़ उठाई।जो गांधी के हत्यारे के प्रशिक्षक थे।
याद आता 19 फरवरी 1916 को पुणे में गोपाल कृष्ण गोखले की बरसी पर महात्मा गांधी ने कहा था- श्री गोखले की इच्छा के अनुसार मैं सारे देश में घूमता रहा मैंने यह देखा कि लोगों के मन में देशभक्ति की भावना तो उमड़ रही है लेकिन हम का भूत छाया हुआ है।
मैंने यह भी देखा कि धार्मिक सत्ता की जबरदस्त ताकत समाजसेवा के मार्ग में बाधक बन रही है और राजनैतिक सत्ता राजनैतिक सेवा के क्षेत्र में हमें आगे नहीं बढ़ने नहीं देती है।हम लोग परिस्थितियों के गुलाम हैं सही। लेकिन इसमें दोष हमारा है।हम जो विचार आपस में व्यक्त किया करते हैं उसे सबके सामने कहने का हमें साहस ही नहीं होता।हमारी धर्म सम्बन्धी स्वतंत्रता पंडितों पुरोहितों ने हथिया ली है।और राजनैतिक मामलों में भी अपने ख्यालात ज़ाहिर करने से डरते हैं।यह एक शोचनीय परिस्थिति है और इस बात का द्योतक है कि हममें चरित्र बल की कमी है।जब तक हमारे मन से ये डर चला नहीं जाता तब तक हम अपना दायित्व निर्वहन नहीं कर सकते।
आज गांधी जी के ये विचार वाकई हमें प्रेरणादायक हैं।आईए हम एक जुट होकर आ भर के भूत को निकाल फेंके।डरे नहीं।देश के अपने दायित्व का निर्वहन करते रहें।






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