सुसंस्कृति परिहार
बाराबंकी से कांग्रेस की उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका की प्रतिज्ञा यात्रा की शुरूआत से ना केवल उत्तर प्रदेश बल्कि अन्य राज्यों के समीकरण बदलते नज़र आने लगे हैं। उत्तरप्रदेश में जहां कांग्रेस लगभग ख़त्म होने के मुकाम पर नज़र आ रही थी और अखिलेश यादव का सितारा रोशन होने की बात की जा रही थी वह भी अब धुंधला रहा है यह हाल में हुए एक निजी सर्वे की रपट बता रही है।भाजपा तीसरे स्थान पर बताई जा रही है। कांग्रेस का ग्राफ एकाएक इतना ऊंचा जाएगा यह कल्पना से परे है लेकिन सच यही है। कांग्रेस को कुछ सीटें देने की बात करने वाले अखिलेश यादव अब कांग्रेस से बुरी तरह पिछड़ रहे बताए जा रहे हैं। उधर कन्हैया और जिग्नेश की जोड़ी के कांग्रेस में आने के बाद से बिहार में कांग्रेस का कद बढ़ना शुरू है जिससे तेजस्वी यादव यूं कहें राजद को बड़ा झटका लगा है।उनके स्वर भी बदल रहे हैं । संभव है जे डी यू और राजग में फिर करार हो जाए।इधर बंगाल में ममता बनर्जी प्रधानमंत्री के ख़्वाब संजोए एक राष्ट्रीय संगठन की पहल में अव्वल थीं अब प्रशांत किशोर को कांग्रेस से अलग कर एक बार फिर कांग्रेस से टकराने का मन बना चुकी हैं। अभिषेक बनर्जी के वक्तव्य से यह जाहिर हो रहा है।उन्होंने चौबीस परगना की एक सभा में कहा कि कांग्रेस और वामपंथियों को वोट देना नोटा के समान है ।यानि मोदी या भाजपा हटाओ अभियान से बड़ा संकट दीदी अब कांग्रेस में देख रही हैं। जिससेअब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के साथ ही साथ 2024की तैयारी हेतु नये समीकरण बनेंगे यह लगभग तय है। यह हलचल इस बात को पुष्ट करती है कि प्रियंका की पहल से कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनता जा रहा है खासतौर पर आधी आबादी में बदलाव ही खतरे की घंटी है।जिसकी हमेशा उपेक्षा की गई है।वह आज सबसे बड़ी सजग वोटर है।ममता को जीत का श्रेय महिलाओं मतदाताओं की बदौलत ही मिला है।

इसी राह पर अब प्रियंका कांग्रेस को लीड कर रही है। प्रियंका ने महिलाओं की दुखती रग को अच्छे से पकड़ा है। इसलिए वे सबसे पहले महिलाओं को उत्तर प्रदेश में 40%टिकिट देने की बात कर देश की महिलाओं का दिल जीत लेती हैं। उनका कद लखीमपुर खीरी में घटी मर्मान्तक घटना में मृत किसानों के परिवार से मिलने में आई दिक्कतों और उनकी जिद से कद बढ़ना प्रारंभ होता है। उनके साहस और ज़िद के आगे योगी सरकार को झुकना पड़ा जो उत्तर प्रदेश की युवतियों में देखने बराबर मिल रहा है पुलिस महिला अधिकारी और पुलिसकर्मी महिलाओं ने भी जिस निर्भीकता के साथ फोटो खिंचवाने में उत्साह दिखाया तथा इंटर कालेज की छात्राओं ने आत्मीयता पूर्ण तरीके से बातचीत करते हुए समस्याएं बताई।वह अभिभूत करता है। यद्यपि इससे पूर्व भी वे कई बार यौन हिंसा से पीड़ित परिवारों से बड़ी कठिनाई से मिल पाई थीं। उत्तर प्रदेश में जिस तरह बड़ी संख्या में दलित लड़कियां यौन हिंसा की शिकार हुई हैं तथा जिसके अपराधी योगी सरकार द्वारा सिर्फ बचाए ही नहीं गए सम्मानित भी हुए फलस्वरूप हाथरस ,उन्नाव देश में चर्चित हुए।उस पीड़ा से निजात दिलाने में आज प्रियंका का चेहरा, उनकी दिलेरी और ज़िद में महिलाओं का विश्वास बढ़ा हुआ दिख रहा है। याद कीजिए, लखीमपुर-खीरी में मोदी मंत्रीमंडल के साथी आलोक मिश्रा के पुत्र ने जब अपनी थार से छै किसानों को कुुुचलकर मारा तो आगबबूला हो प्रियंका में जो मजबूती आई पूरी रात जिस तरह व्यतीत की । हिरासत में सीतापुर में रहीं । वहां झाड़ू लगाई और अंततःमृतकों के परिवार तक पहुंची वही सब आज कांग्रेस की जीत की राह आसान बना रही है।
बहरहाल प्रियंका प्रतिज्ञा यात्रा में वे ही तमाम समस्याएं हैं जिनकी पूर्ति करना आज सबसे बड़ी जिम्मेदारी है जिनकी उपेक्षा का शिकार यह प्रदेश रहा है उनकी 1. प्रतिज्ञा चुनाव में 40%महिलाओं को टिकट देना ताकि वे सक्षम और समर्थ होकर महिलाओं की आवाज़ बन सकें। 2. छात्राओं को स्मार्टफोन और स्कूटी इसलिए ताकि वे अपने आपको मज़बूत करें 3. किसानों का पूरा कर्जा माफ, 4. 2500 में गेहूं और धान, 400 पाएगा गन्ना किसान, 5. बिजली बिल सबका हाफ, कोरोना काल का बकाया साफ, 6. दूर करेंगे कोरोना की आर्थिकमार, परिवार को देंगे 25 हजार, 7. 20 लाख रोजगार।ये सात प्रतिज्ञाएं या वचन पूरे करने की मंशा लिए उनकी यात्रा जारी है वे बराबर रास्ते में धान काटती महिलाओं से विमर्श करती हैं ।समस्याओं को सुनती ही नहीं नोट भी कराती हैं और जमीन पर बैठकर जिस अंदाज़ में महिलाओं से मिल रही हैं उससे महिलाओं की अपार ख़ुशी स्पष्ट नज़र आती है वे उन्हें गुड़ और अपने साथ लाया खाना भी खिला देती हैं। सचमुच ऐसा लगता है कि कोई ज़मीनी नेता उनके दिल के करीब पहुंचा है।कई महिलाएं तो इंदिरा गांधी की दुलारी नातिन को देखकर आश्चर्यचकित भी हैं। बार बार आने को कहती हैं।आज तक शायद ही कोई नेता हो जिसने किसी घायल को अपने हाथ से मरहम पट्टी बांधी हो ये संवेदना और करुणा प्रियंका में ही दिखाई देती है।उनका गले लगना भी सबको भा रहा है।
बेशक ,यकायक उत्तर प्रदेश में आई प्रियंका गांधी की आंधी में विपक्षियों के तंबू उखड़ने लगे हैं।अब देखना यह ज़रूरी होगा कि समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो को जिसे प्रदेश की जनता अपने सर आंखों पर बिठाकर देख चुकी है।किस रणनीति पर काम करते हैं । अखिलेश यादव शायद अपनी पत्नी को प्रियंका की टक्कर में आगे लाएं।भाजपा की स्मृति ईरानी फ्लाप हो चुकी हैं बनारस में आके देख चुकी हैं। हां कंगना रणावत पर ज़ोर आजमाईश हो सकती है।योगी तो पूरी तरह फेल हैं।
आज जिस तरह पूरे देश में प्रियंका-गांधी का ग्राफ बढ़ा है एवं विपक्षी पार्टियों में हलचलें तेज हुई हैं उससे तो यही लगता है कि पूर्व में बने तमाम समीकरणों पर पानी फिर गया है। कांग्रेस विरोधी ममता,माया, केजरीवाल किसकी झोली में जा सकते हैं यह जगजाहिर है। परिणाम क्या होंगे अभी कहा नहीं जा सकता किन्तु प्रियंका ने कांग्रेस का डंका तो बजा ही दिया है। महिलाओं को मज़बूती देने का उनका इरादा वह भी महिला प्रताड़ित क्षेत्र में महत्वपूर्ण और ज़रुरी है।उनकी कार्यशैली से बदलाव की उम्मीद बंधती है।





