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चाहकर भी कुछ नहीं कर सकेगा चीन, भारत ने ढूंढ़ लिया बुद्ध ‘सॉफ्ट वेपन’

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भारत ने पिछले कुछ सालों में इंटरनेशल फोरम पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है. नई दिल्‍ली की ताकत का लोहा दुनिया मानने लगी है. इस बीच, इंटरनेशनल डिप्‍लोमेसी के लिए सॉफ्ट पावर के इस्‍तेमाल पर गंभीरता से काम किया जा रहा है.भारत साउथ-ईस्‍ट एशिया के देशों को साधने के लिए सॉफ्ट डिप्‍लामेसी अपना रहा है,भगवान बुद्ध का गढ़ रहा भारत अब उनके रास्‍ते पर चलकर दुनिया को खींच रहा है,चीन की रणनीति को उसके तरीके से ही जवाब देने को लेकर नई स्‍ट्रैटजी पर फोकस

फाइनेंस मिनिस्‍टर निर्मला सीतारमण ने इस बार के बजट में भगवान बुद्ध की विरासत का उल्‍लेख किया था. उन्‍होंने भगवान बुद्ध और उनकी विरासत पर फोकस करने की बात कही थी. वित्‍त मंत्री ने यह यूं ही नहीं कही थी. इसके पीछे मुकम्‍मल प्‍लानिंग है. निर्मला सीतारमण की बातों को मोटे तौर पर टूरिज्‍म पुश के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन यह उससे कहीं आगे की प्‍लानिंग है. इसे इंटरनेशनल टूरिस्‍ट को अट्रैक्‍ट करने के नजरिये से भी देखा जा सकता है. हालांकि, अहम बात यह है कि भारत भगवान बुद्ध की विरासत और गौरवशाली इतिहास पर फिर से अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है. सॉफ्ट डिप्‍लोमेसी के जरिये चीन से मुकाबला करने की भी योजना है. बता दें कि भगवान बुद्ध का जन्‍म भले ही आज के नेपाल में हुआ था, लेकिन उनका कर्मक्षेत्र भारत ही रहा. इंडिया से ही पूरी दुनिया में भगवान बुद्ध की बातें पहुंचीं जो आगे चलकर बौद्ध धर्म के विकास में सहायक रहा. आज के दिन साउथ-ईस्‍ट एशिया के कई देशों में बौद्ध धर्म आबाद है.

जून 2022 में भगवान बुद्ध की चार पवित्र निशानियां एयर फोर्स के स्‍पेशल एयरक्राफ्ट से मंगोलिया ले जाया गया था. वहां उनका दर्शन करने के लिए हजारों की तादाद में लोगों को लाइनों में लगा देखा गया था. इसके साथ भारत का हाई-लेवल डेलिगेशन भी मंगोलिया गया था. इससे दोनों देशों के संबंधों में काफी मजबूती आई थी. फरवरी 2024 में महात्‍मा बुद्ध से जुड़ीं कुछ पवित्र निशानियों को थाईलैंड ले जाया गया था. थाईलैंड के चार शहरों में इस ले जाया गया था. इनका दर्शन करने के लिए बड़ी तादाद में लोग जुटे थे. इंटरनेशनल लेवल पर भारत ने लंबे समय के बाद अपने सॉफ्ट पावर से रूबरू कराया था. बता दें कि भगवान बुद्ध की धरती होने के बावजूद बौद्ध टूरिज्‍म का केंद्र भारत नहीं, बल्कि थाईलैंड जैसे देश हैं.

चीन ने ऐसे मारी बाजी
पड़ोसी देश चीन ने बौद्ध कूटनीति में खुद को काफी आगे बढ़ाया. साल 2006 में चीन के हांगझाउ शहर में वर्ल्‍ड बुद्धिस्‍ट फोरम का आयोजन किया गया था. माओ जेदांग के साल 1949 में सत्‍ता संभालने के बाद से चीन में यह सबसे बड़ा अंतरराष्‍ट्रीय धार्मिक आयोजन था. इसमें कई देशों के प्रतिनिधि जुटे थे. इस तरह बीजिंग ने बौद्ध डिप्‍लोमेसी को अपनाते हुए खुद को दुनिया के सामने सॉफ्ट पावर के तौर पर पेश किया था. साल 2011 में भारत ने इंटरनेशनल बुद्धिस्‍ट कॉन्‍फेडरेशन का गठन किया. बता दें कि भारत और चीन भगवान बुद्ध की विरासत को सॉफ्ट पावर के टूल के तौर पर इस्‍तेमाल करने में जुटे हैं. अब भारत ने इसको लेकर और गंभीरता दिखाई है और इसका विस्‍तार करने में जुटा है.

थाईलैंड से लेकर जापान तक
बता दें कि भारत से ही बौद्ध धर्म का पूरी दुनिया में विस्‍तार हुआ. थाईलैंड से लेकर चीन, जापान, श्रीलंका, वियतनाम जैसे देशों तक यह पहुंचा. साउथ-ईस्‍ट एशिया के कई देशों से मौजूदा समय में चीन के रिश्‍ते काफी तल्‍ख हैं, ऐसे में नई दिल्‍ली के लिए यह सुनहरा मौका है कि सॉफ्ट डिप्‍लोमेसी की मदद से वह इन देशों में अपनी गहरी पैठ बनाए. दूसरी तरफ, इंटरनेशनल टूरिस्‍ट को अट्रैक्‍ट करने के लिए इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को भी डेवलप किया जा रहा है. इसके लिए बकायदा बड़े पैमाने पर योजना भी बनाई गई है. वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट में इसके स्‍पष्‍ट संकेत भी दे दिए हैं.

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