इंदौर
लम्बे समय से जनता कर्फ्यू के चलते पूरा शहर लगभग बंद सा रहा। इसमें सभी निजी संस्थान, धार्मिक स्थल, होटल, रेस्टारेंट, प्रतिष्ठान, कई उद्योग आदि बंद रहे। 1 जून से धीरे-धीरे एक-एक गतिविधियों को छूट दी गई। हाल ही में अधिकांश गतिविधियों को कई शर्तों के साथ रात 8 बजे तक की छूट दी गई है और शहर पूरी ऊर्जा के साथ फिर से अपनी दिनचर्या में जुट गया। बिजली संबंधित काम-धंधे की रफ्तार ऐसी रही कि 24 घंटे में शहरवासियों ने 1.3 करोड़ यूनिट बिजली खपा दी। दो साल में यह पहला मौका है जब एक दिन में 1 करोड़ से ज्यादा यूनिट की बिजली की खपत हुई जबकि पहले पिछले साल यह इसी दिन में अधिकतम 85 लाख यूनिट थी। खपत बढ़ने का कारण नए कनेक्शन बढ़ने, औद्योगिक इकाइयों में पहले से ज्यादा उत्पादन, भीषण गर्मी के कारण एसी, कूलर पंखों का ज्यादा संचालन सामने आया है। इसके पूर्व इंदौर में 2019 में ग्रीष्मकाल के दौरान 1 दिन में 1 करोड़ यूनिट से ज्यादा खपत हुई थी। इसके बाद मार्च 2020 से कोरोना काल चल रहा है जिसमें अलग-अलग दौर में शहर लम्बे समय तक लॉकडॉउन, कर्फ्यू व जनता कर्फ्यू में रहा। अब 1 जून से लगातार छूट दी गई तो 16 जून से बाजारों में एकदम रौनक बढ़ गई और आवाजाही, कामकाज, व्यापार और बिजली की खपत में ज्यादा इजाफा हुआ व इंदौर शहर की बिजली मांग एक दिन में बढ़कर 475 मेगावाट के पार कर गई।
पिछले 24 घंटों (16 जून से 17 जून) के दौरान इंदौर में 1.3 करोड़ यूनिट बिजली का रिकॉर्ड वितरण हुआ है जबकि एक पखवाड़े पहले यह 88 लाख यूनिट था। इस तरह खपत में लगभग 15 लाख यूनिट की बढ़ोत्तरी जून अवधि के दौरान ही देखी गई। मप्रपक्षेविविकं के प्रबंध निदेशक अमित तोमर ने बताया कि कंपनी क्षेत्र में बिजली की मांग 200 मेगावाट बढ़ी है। पिछले दो दिनों में मालवा-निमाड़ की अधिकतम मांग 3562 मेगावाट दर्ज हुई। औद्योगिक क्षेत्र में पिछले 24 घंटों में 6.80 करोड़ यूनिट बिजली खर्च की गई है जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.70 करोड़ यूनिट ज्यादा है। जून में शुरू से ही आबादी क्षेत्र में धीरे धीरे बिजली मांग में बढ़त रही है, लेकिन पिछले दो दिनों में सबसे ज्यादा अंतर की स्थिति है।
इसलिए तेजी से बढ़ी खपत
– जनता कर्फ्यू में पहले छूट का दायरा सुबह 6 से शाम 5 बजे तक था, फिर रात 8 बजे तक किया गया लेकिन बाजार 8.30 बजे तक खुले रहे। इसके साथ ही औद्योगिक इकाइयों को जनता कर्फ्यू में शुरू से ही अनुमति दी। ये इकाइयां जहां पहले एक-दो शिफ्ट में चलती थी, अधिकांश तीन शिफ्टों में चल रही है।
– बाहरी लोगों की बसाहट, संयुक्त परिवारों का विच्छेदन होने से नए कनेक्शन तेजी से बढ़े।
– 2018-2019 में कुछ औद्योगिक इकाइयां बढ़ गई लेकिन 2020 में कोरोना के कारण इनका संचालन कम हुआ और अब ज्यादा रहा।
– इन 24 घंटों में कई क्षेत्रों में गर्मी व उमस रही जिसके चलते पंखों, कूलर, एसी का उपयोग ज्यादा हुआ।
– निजी कंपनियों और अधिकांश उद्योगों को भी छूट दी गई जिससे तेजी से औद्योगिक इकाइयों व कॉर्पोरेट सेक्टर्स में संचालन हुआ।
– जनता कर्फ्यू में राहत मिलने से होटलों, रेस्टारेंटों में भी मांग बढ़ी और बिजली की खपत तेजी से बढ़ी।
– अस्पतालों में भी पिछले की अपेक्षा खपत काफी बढ़ी है।
इधर अभी करोड़ों की राशि बकाया
इधर, पिछले साल से चल रहे कोरोना काल के चलते पूरे जिले में नौकरी-धंधों पर तेजी से असर पड़ा है और आर्थिक स्थिति चरमरा गई है। इसके चलते करोड़ों के बिजली बिल की राशि बकाया है। हालांकि पिछले साल से ही कंपनी ने लोगों को किश्तों में भुगतान की सुविधा दी है लेकिन जिनकी बहुत ज्यादा ही राशि बकाया थी, उनके कनेक्शन भी काटे गए। जनवरी-फरवरी में तेजी से रिकवरी की गई लेकिन फिर मार्च में कोरोना संक्रमण चरम होने के कारण लेनदारी काफी बढ़ गई है। इधर, जिस प्रकार से रिकॉर्ड तोड़ एक दिन में 1.3 करोड़ यूनिट बिजली की खपत हुई है, उससे संभव है कि आने वाले दिनों में यह रिकॉर्ड भी टूटे क्योंकि छूट की अवधि बढ़ाने पर और बिजली खपत होगी और गर्मी भी है। संभव है कि जुलाई में आने वाले बिजली के बिल चौंकाने वाले हो।
इंदौर में पिछले साल की तुलना में बिजली खपत
शहर 1 जून 2021 16 जून 2021
इंदौर 88 लाख यूनिट 1.3 करोड़ यूनिट
इंदौर 1 जून 2020 16 जून 2020 83 लाख यूनिट 85 लाख यूनिट
(ऐसे ही कभी 89 लाख यूनिट, 77 लाख यूनिट, 70 लाख यूनिट प्रतिदिन रही। मौसम के अनुसार भी खपत कम ज्यादा होती रही लेकिन 2019 के बाद 1 करोड़ यूनिट बिजली की एक दिन में कभी नहीं हुई)
इन तीन जिलों की स्थिति शहर 1 जून 2021 16 जून 2021 उज्जैन 17 लाख यूनिट 20.50 लाख यूनिट रतलाम 6 लाख यूनिट 7.13 लाख यूनिट देवास 5.30 लाख यूनिट 5.80 लाख यूनिट





