भारतीय ट्रेड यूनियन केन्द्र (सीटू)इन्दौर जिला कमेटी ने सीएम व श्रम आयुक्त मप्र के नाम सौंपा ज्ञापन.
न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण कर एरियर सहित भुगतान कराने की मांग को लेकर भारतीय ट्रेड यूनियन केन्द्र (सीटू) ने सीएम व श्रम आयुक्त मप्र के नाम सहायक श्रम आयुक्त कार्यालय एंव श्रम आयुक्त इन्दौर में ज्ञापन सौंपा है। जिला कमेटी एंव स्टेट कमेटी सदस्य कामरेड भागीरथ कछवाय सी एल सर्रावत,निर्मला व्यास, कैलाश लिम्बोदिया ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में बताया कि न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 की धारा 3 के अनुसार राज्य सरकारों को 5 वर्ष के अंतराल में न्यूनतम वेतन की दरों का पुनरीक्षण करना चाहिए। मप्र सरकार ने अधिसूचित नियोजनों के औद्योगिक मजदूरों व बीड़ी क्षेत्र का पिछले न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण वर्ष 2014 में किया था। पिछले वेतन पुनरीक्षण के बाद लगभग 9 वर्ष हो गये हैं, लेकिन अभी तक प्रदेश सरकार ने वैधानिक रूप से किया जाने वाला न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण अब तक नहीं किया है। ऊपर से इससे पहले कोरोना महामारी के दौरान लाखों श्रमिकों की आजीविका पर हमला हुआ ही था। इसके बाद डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस की कीमतों में सरकार द्वारा की गई भारी वृद्धि और सभी आवश्यक सामग्रियों के आसमान छूते दामों ने मेहनतकशों का जीवन तबाह कर दिया है।
ऐसे हालात में भी प्रदेश सरकार ने न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण न कर मजदूरों से लूट के जरिए नियोजकों की तिजोरियां भरने का इंतजाम कर दिया है। न्यूनतम वेतन का निर्धारण 8 घंटे के कार्य के आधार पर होता है, मगर कई जगह पर 12-12 घंटे कार्य लिया जा रहा है। संगठन का ये भी आरोप है कि तमाम असंगठित क्षेत्र ऐसे हैं जहां श्रमिकों को न्यूनतम वेतन मिलता ही नहीं है। ज्ञापन जिला कमेटी और स्टेट कमेटी के प्रतिनिधि कैलाश लिम्बोदिया भागीरथ कछवाय,सी एल सर्रावत, निर्मला व्यास के नेतृत्व में सौंपा गया।
प्रमुख मांगे –
• न्यूनतम वेतन का तुरंत पुनरीक्षण कर बेलगाम महंगाई को दृष्टिगत रखते हुए अकुशल श्रेणी को 26000 रुपये व इसी को आधा बनाकर अर्ध कुशल व अतिकुशल श्रेणी की न्यूनतम वेतन दरों में वृद्धि कर एरियर सहित भुगतान सुनिश्चित किया जाए। महंगाई के निष्प्रभावीकरण हेतु उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के प्रति बिंदु 10 रुपये की दर से महंगाई का प्रावधान किया जाए।
अधिसूचित नियोजनों की बाध्यता समाप्त कर आशा, आशा सहयोगी, हम्माल, पल्लेदार, तुलावटी, ड्राइवर, कंडक्टर, हेल्पर, निर्माण श्रमिक सहित सभी असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के न्यूनतम वेतन की परिधि में लाकर न्यूनतम वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
• प्रदेश में बीएचईएल, एनटीपीसी, पावर ग्रिड सहित कई प्रतिष्ठित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हैं, जहां बड़ी संख्या में ठेका मजदूर कार्यरत हैं। इन सभी प्रतिष्ठानों में कोल इंडिया में गठित हाई पावर कमेटी की अनुशंसा पर दिए जा रहे न्यूनतम वेतन के समतुल्य भुगतान किया जाए।
प्रदेश में निजी क्षेत्र में कई ऐसे उद्योग हैं जहां न सिर्फ उच्च गुणवत्ता का उत्पादन होता है बल्कि यह उद्योग भारी मुनाफा कमाते हैं। इन सभी उद्योगों के लिए सरकार पृथक से न्यूनतम वेतन का निर्धारण कर लागू करे।
• दवा एवं अन्य विक्रय संवर्धन में लगे कर्मियों के लिए 8 घंटे के कार्य दिवस का वैधानिक निर्धारण कर उन्हें उनके लिए ₹26000 न्यूनतम वेतन का लाभ सुनिश्चित किया जाए।
• जिन नियोजनों में न्यूनतम वेतन लागू है वहां 8 घंटे के कार्य दिवस पर आधारित न्यूनतम वेतन भुगतान सुनिश्चित कर अतिरिक्त काम हेतु नियमानुसार दोगुनी दर से भुगतान सुनिश्चित किया जाए।





