अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

*आईएएस संतोष वर्मा पर गिरी गाज, CM मोहन यादव ने सभी पदों से हटाया, केंद्र को भेजा प्रस्ताव*

Share

भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार ने विवादित बयानों में घिरे आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा को बर्खास्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है, क्योंकि यह पाया गया है कि उनकी पदोन्नति कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के माध्यम से हासिल की गई थी और विभागीय जांच में यह निष्कर्ष निकला है कि उनका आचरण सेवा नियमों का उल्लंघन करता है. सरकार ने गुरुवार को एक बयान में यह जानकारी दी.

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा लिए गए एक महत्वपूर्ण निर्णय में, राज्य सरकार ने वर्मा को भारतीय प्रशासनिक सेवा से बर्खास्त करने की सिफारिश केंद्र सरकार से की है. आधिकारिक बयान में कहा गया है कि उन्हें राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस कैडर में पदोन्नत करने के लिए “फर्जी और जाली पदोन्नति आदेश” तैयार किए गए थे. इन कथित मनगढ़ंत कहानियों से जुड़े आपराधिक मामले पहले से ही विभिन्न अदालतों में लंबित हैं.

वर्मा के खिलाफ हुई जांच में पता चला है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके सत्यनिष्ठा प्रमाण पत्र प्राप्त किया था. कारण बताओ नोटिस पर उनकी प्रतिक्रिया असंतोषजनक पाई गई और अधिकारियों ने गौर किया कि उन्होंने कार्रवाई के दौरान भी अभद्र और भड़काऊ बयान देना जारी रखा. परिणामस्वरूप, सरकार ने अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1969 के तहत उनके खिलाफ औपचारिक आरोप पत्र जारी करने का निर्णय लिया है.

एक जज के खिलाफ रची साजिश
वर्मा हाल के महीनों में कई विवादों के केंद्र में रहे हैं. इंदौर की अदालतों से मिली रिपोर्टों से पता चलता है कि उसने कथित तौर पर एक घरेलू मामले में बरी होने के लिए मनगढ़ंत फैसले तैयार करने के लिए एक न्यायाधीश के साथ साजिश रची, जिससे आईएएस पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त हो सके. सूत्रों के अनुसार, वर्मा ने विभागीय पदोन्नति समिति के माध्यम से पदोन्नति के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए न्यायिक रिकॉर्ड में हेरफेर किया.

जालसाजी के आरोपों के अलावा, वर्मा को सार्वजनिक मंचों पर अपने भड़काऊ बयानों के लिए भी आलोचना का सामना करना पड़ा है. एक वायरल वीडियो में उन्हें भड़काऊ बयान देते हुए सुना गया, जिसकी सामुदायिक संगठनों और न्यायपालिका ने कड़ी आलोचना की. सरकार ने इन टिप्पणियों को ‘गंभीर दुर्व्यवहार; और सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन करार दिया, जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई का मामला और मजबूत हो गया.

IAS संतोष वर्मा ने दिया था विवादित बयान
23 नवंबर, 2025 को भोपाल में M.P. अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (AJJAKS) के एक कन्वेंशन के दौरान संतोष वर्मा ने कहा था, “रिजर्वेशन तब तक जारी रहना चाहिए जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को न दे दे, या (उसका) उसके साथ रिश्ता न हो जाए”. इस बात की कई ब्राह्मण संगठनों और कम्युनिटी के नेताओं ने बहुत बुराई की, और इसे “अभद्र, जातिवादी और ब्राह्मण बेटियों का बहुत अपमान करने वाला” कहा.

मुख्यमंत्री के निर्देश का अनुपालन करते हुए, कृषि विभाग ने वर्मा को कृषि विभाग में उप सचिव के पद से हटा दिया है. उन्हें बिना किसी विभागीय कार्यभार या कार्य के जीएडी पूल से जोड़ दिया गया है, जिससे वे प्रभावी रूप से प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अलग हो गए हैं. केंद्र को बर्खास्तगी की सिफारिश करके और विभागीय आरोप लगाकर, राज्य ने संकेत दिया है कि धोखाधड़ीपूर्ण पदोन्नति और कदाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अब अंतिम निर्णय केंद्र सरकार पर निर्भर करता है, जो वर्मा को आईएएस से हटाने के प्रस्ताव पर कार्रवाई करेगी.

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें