देश के सबसे बड़े रंगोत्सवों में शामिल इंदौर में रंगपंचमी का पारंपरिक गेर उत्सव
इंदौर में रंगपंचमी का पारंपरिक गेर उत्सव इस बार भी भव्य रूप में नजर आएगा. राजवाड़ा क्षेत्र से निकलने वाली यह ऐतिहासिक परंपरा अब देश के सबसे बड़े रंगोत्सवों में शामिल हो चुकी है. कभी बैलगाड़ी पर रखे कड़ाव से लोगों को भिगोने वाली गेर आज आधुनिक मिसाइलों से 200 फीट तक रंग और पानी बरसाने तक पहुंच गई है. हर साल लाखों लोग इस रंगोत्सव का हिस्सा बनने इंदौर पहुंचते हैं. पिछले तीन वर्षों से यहां आने वालों की संख्या पांच लाख से अधिक रही है. इस बार भी हजारों किलो गुलाल और लाखों लीटर रंगीन पानी की बौछारों से पूरा राजवाड़ा और आसपास के मार्ग रंगों में सराबोर होगा. संगम कॉर्नर, रसिया कॉर्नर, टोरी कॉर्नर और मॉरल क्लब की गेर अपने-अपने मार्गों से निकलकर शहर में उत्सव का माहौल बनाएंगी. 8 हजार किलो टेसू के फूलों से बने प्राकृतिक गुलाल से राजवाड़ा पर तिरंगा बनाया जाएगा. डीजे, ढोल-ताशे, झांकियां, लट्ठमार होली और धार्मिक फागयात्रा इस आयोजन को आस्था, संस्कृति और उत्साह का अनोखा संगम बना देंगे.

गेर में डीजे, ढोल-ताशे, झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी शामिल रहेंगी. इस पर 8 हजार किलो टेसू के फूलों से बने गुलाल से राजवाड़ा पर तिरंगा बनाया जाएगा. गेर और फागयात्रा अपने-अपने तय स्थानों से निकलकर शहर की जनता को रंगों से सराबोर करेंगी. मिसाइलों से 200 फीट ऊपर तक रंग और पानी उड़ाया जाएगा.

इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा क्षेत्र में रंगपंचमी की गेर के दौरान करीब 5 लाख लोग गेर में शामिल होंगे. यहां रंग और गुलाल से सराबोर माहौल में रंग उड़ाने वाली मिसाइल चलेंगी. इन मिसाइल से करीब 200 फीट तक रंग फेंका जा सकेगा. पूरा इलाका कई टोलियों के कारण रंग बिरंगा हो जाता है. इसे देखने के लिए देश विदेश से लोग आते है.

आसमान तक उड़ता गुलाल और रंगीन पानी की बौछारें पूरे इलाके को रंगों के समुद्र में बदल देती हैं. गेर के दौरान विशेष मिसाइलों से उड़ता रंग दूर तक खड़े लोगों को भी रंगों से भिगो देता है और पूरे माहौल को उत्सवमय बना देता है. इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा क्षेत्र में रंगपंचमी की गेर के दौरान लाखों लोग रंग और गुलाल से सराबोर नजर आते हैं.

संगम कॉर्नर की गेर में इस बार 8 हजार किलो टेसू के फूलों से बने गुलाल से राजवाड़ा पर तिरंगा बनाया जाएगा. प्राकृतिक रंगों से तैयार यह दृश्य देशभक्ति और परंपरा का अनोखा संगम दिखाता है. गेर में शामिल ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, टैंकर और डंपर रंगीन पानी और गुलाल लेकर चलते हैं. रास्ते भर लोगों पर रंगों की बारिश की जाती है, जिससे पूरा मार्ग रंगों से सराबोर हो जाता है.

ढोल-ताशों और डीजे की धुन पर युवाओं की टोलियां नाचते-गाते गेर के साथ आगे बढ़ती हैं. रंग, संगीत और उत्साह का यह संगम इंदौर की रंगपंचमी को खास पहचान देता है. बरसाना से आई टीम द्वारा लट्ठमार होली का मंचन गेर का प्रमुख आकर्षण रहता है. राधा-कृष्ण की रासलीला और पारंपरिक प्रस्तुतियां इस आयोजन में सांस्कृतिक रंग भी घोल देती हैं.

नृसिंह बाजार के बद्रीनारायण मंदिर से निकलने वाली फागयात्रा में हजारों महिलाएं और श्रद्धालु शामिल होते हैं. भजन मंडलियां, धार्मिक झांकियां और महादेव की भव्य प्रतिमा यात्रा का मुख्य आकर्षण रहती है. गेर में शामिल विशाल टैंकरों से लगातार पानी की बौछारें की जाती हैं. इन टैंकरों पर लगी मिसाइलें और मशीनें दूर तक रंग और पानी उछालती हैं, जिससे पूरा माहौल उत्सव में डूब जाता है.

आदियोगी, महाकाल मंदिर और अन्य धार्मिक झांकियां गेर की शोभा बढ़ाती हैं. इन झांकियों के साथ चलती भजन मंडलियां और ढोल-ताशे श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करते हैं. इंदौर की रंगपंचमी गेर को देखने के लिए देशभर से लोग पहुंचते हैं. लाखों की भीड़, उड़ता गुलाल और रंगों की बारिश इस आयोजन को देश के सबसे बड़े रंगोत्सवों में शामिल करती है.

इंदौर में रंगपंचमी का यह उत्सव वर्षों पुरानी परंपरा को आज भी जीवंत बनाए हुए है. शहरवासी पूरे उत्साह के साथ इसमें भाग लेते हैं और रंगों के इस पर्व को खास बना देते हैं. इंदौर की रंगपंचमी गेर में शामिल लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर शुभकामनाएं देते हैं. यह उत्सव शहर की सामाजिक समरसता और मिलनसार संस्कृति को भी दर्शाता है.






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