भोपाल
कांग्रेस में निकाय चुनावों के संचालन की कमान विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर चुकी टीम के पास है। इस टीम की औसत आयु 60 वर्ष से ऊपर है। यह टीम कांग्रेस की कोर टीम भी है। चुनाव संचालन का पुराना अनुभव इस टीम की खासियत है। यही वजह है कि बागियों को मनाने से लेकर उन्हें पार्टी के पक्ष में प्रचार करने के लिए तैयार कर लिया गया।
सिर्फ 34 बागियों को ही बाहर का रास्ता दिखाया गया। कमान मुख्य रूप से कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के पास है। नाथ जहां उनकी पंद्रह महीने की सरकार के जनकल्याणकारी निर्णयों को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं। वहीं, दिग्विजय कांग्रेस नेताओं से वन-टू-वन चर्चा कर रहे हैं। अशोक सिंह, सुरेश पचौरी, डाॅ. गोविंद सिंह, वरिष्ठ विधायक सज्जन सिंह वर्मा, एनपी प्रजापति कोर ग्रुप के सदस्य हैं, जिनकी प्रत्याशी चयन से लेकर टिकट वितरण में अहम भूमिका रही।
संगठन की कमान शेखर, मीडिया की मिश्रा के पास
पीसीसी में संगठन की कमान अनुभवी नेता चंद्रप्रभाष शेखर के पास है, उनके आदेश से ही फैसलों का क्रियान्वयन होता है। राजीव सिंह प्रशासन, प्रकाश जैन सदस्यता का काम देख रहे हैं। मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा हैं। जेपी धनोपिया समन्वय का काम देख रहे हैं।
भाजपा… विक्रम वर्मा, रघुनंदन, माया सिंह सक्रिय नहीं
भाजपा में उम्रदराज नेताओं ने कुछ जगह चुनाव मैदान संभाल लिया है, तो कहीं पर बड़े नेता प्रचार से पूरी तरह से दूरी बनाए हुए हैं। इंदौर में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने मेयर प्रत्याशी पुष्यमित्र भार्गव को आशीर्वाद तो दिया है, लेकिन उम्र के चलते चुनाव प्रचार में वे पूरी तरह सक्रिय नहीं हैं। वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन भी चुनावी रैली और प्रचार से लगभग दूरी बनाए हुए हैं। बाबू सिंह रघुवंशी भी कम ही सक्रिय हैं। ऐसी ही स्थिति वरिष्ठ नेता विक्रम वर्मा के साथ है। वे धार में नगर पालिका चुनाव की बैठकों में पहुंचे, लेकिन प्रत्याशियों के प्रचार में नहीं गए। भोपाल में पूर्व राज्यसभा सांसद रहे वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा भी चुनाव से दूर हैं। वे किसी भी चुनावी रैली में नजर नहीं आ रहे हैं। ग्वालियर में माया सिंह कुछ जगह पर देखी गई हैं। हालांकि वे रोजाना के चुनाव प्रचार में सक्रिय नहीं हैं। इधर, जबलपुर की बात करें ताे विधायक अजय विश्नोई अपने क्षेत्र तक सीमित हैं।




