अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

वैश्विक कल्याण की है कम्युनिस्ट विचारधारा

Share

,,मुनेश त्यागी

कम्युनिस्ट पार्टी का विभाजन होने के अलावा 11 अप्रैल के नाम और क्या दर्ज है?
 पिछले दिनों एक पोस्ट आई थी कि मोदी  बहुत ज्यादा डरे हुए हैं और खौफ ज्यादा हैं। उनका कहना है कि कम्युनिस्ट विचारधारा खतरनाक है। बात तो सही कह रहे हैं, मगर यह विचारधारा किसके लिए खतरनाक है? कम्युनिस्ट विचारधारा जनता के लिए खतरनाक है क्या?  नहीं। कम्युनिस्ट विचारधारा जनता के लिए नहीं बल्कि जनता के दुश्मनों, पूंजीपतियों, सामंतवादियों, जातिवादियों संप्रदायिकतावादियों, भ्रष्टाचारियों, अपराधियों और मेहनतकशों के हक अधिकार छीनने वालों और शोषण करके उनका खून पीने वालों के लिए   खतरनाक है।
 मोदी ही नहीं मोदी जैसे लाखों-करोड़ों शोषक लोग 1848 से ही खफा और डरे हुए हैं, जब 1848 में मार्क्स और एंगेल्स की लिखी किताब "कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो" छपकर आई थी। कम्युनिस्टों की बाइबिल कहीं जाने वाली और दुनिया में सबसे ज्यादा खरीदी और पढ़ी जाने वाली इस छोटी सी पुस्तिका ने दुनिया में तहलका मचा दिया था दुनिया के इतिहास में सबसे पहले मानव समाज के विकास का वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया और बताया गया कि आदिम साम्यवाद के बाद का मानव इतिहास वर्ग संघर्षों, अन्याय, शोषण, गैर बराबरी और हिंसा का इतिहास रहा है और यह संघर्ष दास समाज, सामंती समाज और पूंजीवादी समाज में लुटेरे वर्ग और मेहनतकश वर्ग के बीच में आज भी जारी है।
  दुनिया का मेहनतकश वर्ग  यानी किसान और मजदूर, इस शोषण और अन्याय और भेदभाव और गैर बराबरी का खात्मा और विनाश करके, प्रत्येक देश में समता, समानता, भाईचारा और समाजवाद पर आधारित व्यवस्था कायम करना चाहता है। कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो में मानव इतिहास में सबसे पहले मांग की गई थी कि सबको शिक्षा, सबको काम , सबको रोजगार दिया जाए, सबको स्वास्थ्य का इंतजाम किया जाए, जमींदारा खत्म करके जोतने वालों को जमीन दी जाए और जमीन का राष्ट्रीयकरण करके जमीन, पूरे समाज की, यानी किसानों, मजदूरों और खेतिहर मजदूरों के स्वामित्व में दी जाए।
कम्युनिस्ट, समाज का क्रांतिकारी रूपांतरण करके समाज में किसानों मजदूरों की सरकार और राजसत्ता कायम करना चाहते हैं और लुटेरे शोषक और अन्यायी पूंजीपति वर्ग का खात्मा करके, इसके स्थान पर समाजवादी व्यवस्था कायम करना चाहते हैं। इसी वजह से मोदी कम्युनिस्टों से डरते हैं खौफ खाते हैं और कम्युनिस्ट विचारधारा को खतरनाक समझते हैं।
 कम्युनिस्ट, समाज में आकंठ फैले शोषण, अन्याय, जुल्म ओ सितम, अत्याचार, भ्रष्टाचार, महंगाई और अपराधों की दुनिया का खात्मा करना चाहते हैं और इसके स्थान पर अमन, शांति, समता, समानता, न्याय, धर्मनिरपेक्षता, जनता का जनवाद, समाजवाद और उसके बाद साम्यवादी व्यवस्था कायम करना चाहते हैं इसीलिए मोदी डरते हैं खौफ खाते हैं और कम्युनिस्ट विचारधारा को खतरनाक बताते हैं।
 कम्युनिस्ट लोग इस मानव विरोधी समाज में फैली सांप्रदायिकता, जातिवाद, गैरबराबरी और अन्याय का खात्मा करके समाज में अमन शांति, सामाजिक सुरक्षा, बुढ़ापे की पेंशन, सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की स्थापना करना चाहते हैं समाज का बटवारा खत्म खत्म करना चाहते हैं। क्योंकि मोदी और उनके जैसों का ऐसे समाज में कोई विश्वास नहीं है। अतः वे कम्युनिस्टों से डरते हैं और कम्युनिस्ट विचारधारा को खतरनाक मानते-समझते हैं।
 दुनिया के कई देशों में कम्युनिस्ट समाजवादी व्यवस्था कायम है। 1917 के बाद कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो में कही गई विचारधारा को, महान लेनिन और वहां की कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में  रुस कीजमीन पर उतारा गया और किसानों मजदूरों को अपना भाग्य विधाता बनाया गया, वहां पर उनकी सरकार और सत्ता को कायम किया गया और उसके बाद  चीन, पूर्वी यूरोप, उत्तर कोरिया, वियतनाम, क्यूबा इन तमाम देशों में कम्युनिस्टों के नेतृत्व में वहां की तमाम जनता को आधुनिक स्वास्थ्य और आधुनिक शिक्षा और तमाम तरह की सामाजिक सुरक्षा प्रदान की गईं। इसके बाद से यह लगातार जारी है। सब को रोजगार मुहैया कराया गया, जमीन का राष्ट्रीयकरण कर के सामूहिक खेती की जाती है, अपराध जैसे खत्म कर दिए गए हैं। वहां समाज सब के लिए है और सब समाज के भले के लिए काम करते हैं। 
  तमाम तरह की हरामखोरी खत्म कर दी गई है। सब प्रकार के शोषण, गुलामी, गरीबी, अन्याय, गैर बराबरी, नक्सलवाद और भेदभाव खत्म कर दिए गए हैं। समाज में भाईचारा कायम कर दिया गया है स्त्री और पुरुषों की समानता और एकता काम कर दी गई है, और औरतों को पुरुषों के बराबर शिक्षा, पुरुषों के बराबर रोजगार, और पुरुषों के बराबर वेतन दिए जाने की व्यवस्था की गई है। वहां औरत को दोयम दर्जे का नागरिक नहीं समझा जाता, बल्कि औरतों को आदमी के बराबर समानता का अधिकार प्राप्त है। अतः वहां का प्रत्येक नागरिक खुशहाल है। मोदी जी ऐसी समाज व्यवस्था के खिलाफ हैं वे समाजवादी कम्युनिस्ट व्यवस्था से डरते हैं और खौफ खाते हैं।
कम्युनिस्ट विचारधारा विश्व बंधुत्व और वसुधैवकुटुंम्भकम  की विचारधारा में विश्वास करती है, परहित सरिस धर्म नहिं भाई, पर पीड़ा  सम नहिं अधमाई की सोच में विश्वास करती है। कम्युनिस्ट, सब सुखी हों, सब निरोगी हों, जियो और जीने दो, अहिंसा औरशांति में विश्वास करते हैं।वे तमाम तरह की हिंसा, अपराध और युद्धों का विरोध करते हैं और इनका खात्मा चाहते हैं। वह तमाम तरह की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक असमानता का विरोध करती है और इसका खात्मा चाहती है और समाज में सब को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक आजादी प्राप्त कराना चाहती है। कम्युनिस्ट विचारधारा में ही हर देश का, पूरे समाज का और पूरे विश्व का कल्याण निहित है। इसलिए मोदी जी कम्युनिस्ट विचारधारा को से डरते हैं, खौफ खाते हैं और कम्युनिस्ट विचारधारा को खतरनाक विचारधारा बताते हैं।
 पूंजीवादी व्यवस्था का पिछले 200 साल का इतिहास बताता है कि वह समाज से शोषण, अन्याय, गैरबराबरी, असमानता और भेदभाव का खात्मा नहीं कर सकती, सबको शिक्षा और रोजगार और स्वास्थ्य मुहैया नहीं करा सकती, समाज में समता समानता न्याय और भाईचारे  की व्यवस्था कायम नहीं कर सकती और यह आर्थिक असमानता को, राजनीतिक असमानता को और राजनीतिक असमानता को लगातार बढ़ा रही है, पाल पोस रही है। कम्युनिस्ट विचारधारा इस सबका खात्मा करके, प्रत्येक देश के नागरिक को शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार घर मकान रोटी कपड़ा मुहैया कराना चाहती है, सबको सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक आजादी प्रदान करना चाहती है और समाज में बढ़ती हुई असमानता का खात्मा करना चाहती है। इसलिए मोदी जी कम्युनिस्ट विचारधारा से डरे हुए हैं, खौफ ज्यादा है और कम्युनिस्ट विचारधारा को खतरनाक विचारधारा बताते हैं
 कार्ल मार्क्स, फ्रेडरिक एंगेल्स, चेर्नेसेवस्की, व्लादीमीर इल्यिच लेनिन, स्टालिन, गोर्की, हो ची मिन्ह, फिदेल कास्त्रो, चे गुएवारा, प्रेसिडेंट शावेज और भारत के राजगुरु, सुखदेव, भगत सिंह, बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान, चंद्रशेखर आजाद, हसरत मोहानी, सुभाष चंद्र बोस, विवेकानंद, महात्मा गांधी,  नेहरू, ईएमएस नंबूद्रीपद, ज्योति बसु, हरकिशन सिंह सुरजीत,ऐ के गोपालन, शिव वर्मा आदि इसी समाजवादी और कम्युनिस्ट विचारधारा के प्रचारक प्रसारक और दुनिया के सर्व शक्तिमान क्रांतिकारी नायक और नक्षत्र हैं, चमकते सितारे हैं, दुनिया के तमाम मजदूर और किसान  उनका अनुसरण करते हैं। वे सब कम्युनिस्ट विचारधारा के प्रचारक प्रसारक और हामी थे।
   जनता के दुश्मनों,अडाणी, अंबानी जैसे देश दुनिया के लुटेरे पूंजीपतियों, उनके मित्रों के लिए, फासीवादी, सामंती गुंडों और बाहुबलियों के लिए, संक्षेप में दुनिया भर के तमाम लुटेरे शासकों के लिए, कम्युनिस्ट/समाजवादी विचारधारा और व्यवस्था खतरनाक है, इसलिए मोदी जी और मोदी सरकार कम्युनिस्ट विचारधारा से डरती है।

Ramswaroop Mantri

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें