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उपचुनाव में कांग्रेस को फिर ‘जीरो’….दो विधानसभा सीटें और गंवा दी

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सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव में कांग्रेस को असफलता मिली। इनमें से दो सीटों पर कांग्रेस काबिज थी, मगर वे भी हाथ से चली गईं। बिहार, उत्‍तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्‍ट्र, तेलंगाना और ओडिशा में हुए उपचुनावों में सात में चार सीटों पर बीजेपी जीती है। चुनावी लड़ाइयों के कई पहलू हैं जो बताते हैं कि बीजेपी और मजबूत हो रही है। इसके उलट, 2024 में बीजेपी को केंद्र की सत्‍ता से हटाने का सपना देखी रही कांग्रेस का स्‍कोर ‘जीरो’ है। पार्टी नए नेतृत्‍व के साथ उपचुनाव के नतीजों को उम्‍मीद की नजर से देख रही थी। लगता है कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा को मिल रहे ‘जनसमर्थन’ का इन सीटों पर असर नहीं दिखा। सैकड़ों किलोमीटर पैदल चल चुके राहुल गांधी भी शायद इन नतीजों से निराश हों। राहुल गांधी को मिल रहे लोगों के समर्थन के वीडियो सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। इस उपचुनाव के नतीजों ने यात्रा के चुनावी प्रभावों पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

क्‍या रहे उपचुनाव के नतीजे?
जिन सात सीटों पर उपचुनाव हुए, उनमें से तीन बीजेपी के पास थीं। दो पर कांग्रेस का कब्‍जा था जबकि एक सीट शिवसेना और एक राजद के पास थी। राज्‍यवार देखें तो दो सीट बिहार में, इसके अलावा यूपी, हरियाणा, तेलंगाना, महाराष्‍ट्र और ओडिशा की एक-एक सीट थी। बीजेपी ने यूपी की गोला गोकर्णनाथ, हरियाणा की आदमपुर, बिहार की गोपालगंज और ओडिशा की धामनगर सीट जीती। राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) ने बिहार की मोकामा सीट बरकरार रखी। तेलंगाना राष्‍ट्र समिति ने मुनुगोडे सीट उद्धव ठाकरे वाले शिवसेना गुट ने मुंबई की अंधेरी ईस्‍ट सीट जीती।

सालों बाद दिखा कांग्रेस का आक्रामक अंदाज
मल्लिकार्जुन खरगे के रूप में कांग्रेस को 22 साल नया अध्‍यक्ष मिला है। पार्टी ने लंबे समय बाद गांधी परिवार से इतर किसी और को कमान सौंपी तो उसके पीछे मंशा चुनावी किस्‍मत बदलने की रही। एक के बाद एक चुनावों में कांग्रेस धूल फांकती रही। पिछले कुछ महीनों में पार्टी ने जमीन से लेकर सोशल मीडिया तक तेवर बदले। सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने नैशनल हेरल्‍ड केस में पूछताछ के वक्‍त बड़ी संख्‍या में कांग्रेसी सड़कों पर उतरे। पार्टी इतने सालों में पहली बार फ्रंटफुट पर नजर आ रही थी। इसी बीच राहुल गांधी भारत भ्रमण पर निकल पड़े। दक्षिण से शुरू हुई उनकी ‘भारत जोड़ो’ यात्रा को 60 दिन से ज्‍यादा हो चुके हैं और अभी वह उसी तरफ हैं।

गुजरात, हिमाचल तय कर देंगे भविष्‍य?
उपचुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए झटका जरूर हैं, मगर पार्टी के नए कलेवर की असल परीक्षा अगले महीने होगी। गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। पर्वतीय राज्‍य में हर 5 साल में सत्‍ता बदल जाने का ट्रेंड कांगेस को उम्‍मीदें दे रहा है। पार्टी लंबे समय से गुजरात में सत्ता पाने का ख्वाब संजोए हुए है। पिछली बार कांग्रेस ने वहां कड़ी टक्कर देते हुए बीजेपी के वोटों में काफी सेंध लगाई। 2017 में कांग्रेस बीजेपी की सीधी टक्कर थी, जबकि इस बार आम आदमी पार्टी भी वहां जोर मार रही है। कई जगह आप की मौजूदगी मुकाबले को तिकोना बना रही है। हालांकि, कांग्रेस आप को बीजेपी की बी टीम करार दे रही है।

कांग्रेस के प्रचार में क्‍या बदल रहा है?
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी हिमाचल प्रदेश में कैंप कर रही हैं। अभी तक वहां कांग्रेस का चुनाव प्रचार स्‍थानीय मुद्दों तक सीमित रहा है। पार्टी ने न तो हिमाचल और न ही गुजरात में मुख्‍यमंत्री पद के लिए कोई चेहरा आगे किया है। पहले भी ऐसा दुर्लभ ही होता था। हिमाचल में एक लाख नौकरियां, पुरानी पेंशन स्‍कीम की बहाली और हर महिला को 1,500 रुपये की मदद का वादा कर कांग्रेस ने अंदाज बदला है। पहले राहुल गांधी अपने रैलियों में पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर सीधे हमले किया करते थे। अब राहुल गांधी तो यात्रा पर हैं, तो उनका उस स्‍तर पर चुनाव प्रचार करना मुश्किल ही है। वैसे भी यात्रा का रूट ऐसा है कि वह दोनों चुनावी राज्‍यों से होकर गुजरेगी ही नहीं। कहीं यहां पर भी भारत जोड़ो यात्रा का चुनावी असर हालिया उपचुनाव जैसा न हो।

Ramswaroop Mantri

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