नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय AICC में सोमवार को सिंगरौली खनन परियोजना को लेकर कांग्रेस ने केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने आरोप लगाया कि सिंगरौली में आदिवासियों, पर्यावरण और स्थानीय आबादी के अधिकारों को नजरअंदाज कर अडानी समूह को बड़े पैमाने पर खनन की छूट दी गई है। कांग्रेस नेताओं ने इसे संस्थागत लूट करार देते हुए कहा कि पहले छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य को उजाड़ा गया और अब मध्यप्रदेश के जंगलों की बारी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया, तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन, कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य कमलेश्वर पटेल, पूर्व मंत्री बाला बच्चन सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
पेड़ लगाने की बात, जंगल कटवाने की अनुमति
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि एक तरफ सरकार ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियान चलाती है, वहीं दूसरी तरफ हजारों-लाखों पेड़ कटवाने की अनुमति दी जा रही है। पार्टी का दावा है कि सिंगरौली के सुलियारी और धिरौली कोल ब्लॉकों में खनन के लिए करीब 2,672 हेक्टेयर जमीन अडानी को दी गई है, जहां लगभग 6 लाख पेड़ काटे जा रहे हैं।
204 करोड़ में सौंप दिया हजारों करोड़ का जंगल
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने महज 204 करोड़ रुपए में अडानी को पूरा जंगल सौंप दिया, जबकि इस क्षेत्र में मौजूद कोयले की कीमत लाखों करोड़ रुपए आंकी जा रही है। पार्टी ने कहा कि खदान, संचालन और कोयला उत्पादन सब कुछ एक ही कंपनी के हाथ में देकर नियमों की भावना के साथ खिलवाड़ किया गया है।
कानूनों और आदिवासी अधिकारों की अनदेखी का आरोप
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सिंगरौली में भूमि अधिग्रहण के दौरान 2013 के कानून को दरकिनार कर कोल बेयरिंग एरिया एक्ट का इस्तेमाल किया गया, जिससे सरकार को जबरन जमीन लेने का अधिकार मिल जाता है। आरोप है कि न तो पेसा कानून का पालन किया गया और न ही ग्राम पंचायतों से अनुमति ली गई। आदिवासियों के लिए अलग सामाजिक सर्वे कराने की अनिवार्यता को भी नजरअंदाज किया गया।
नियम बदले गए, संस्थाओं को दरकिनार किया
कांग्रेस का कहना है कि सिंगरौली पहले 5वीं अनुसूची क्षेत्र माना जाता था, लेकिन खनन परियोजना के लिए नियमों की व्याख्या बदल दी गई। ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी की बैठक तक नहीं बुलाई गई और वाइल्ड लाइफ से जुड़े नियमों में भी ढील दी गई। पार्टी ने आरोप लगाया कि कई मामलों में मुआवजा जमीन मालिक आदिवासियों की बजाय अन्य लोगों को मिल गया, जिस पर हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लिया है। कांग्रेस ने साफ किया कि सिंगरौली का मुद्दा केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों और संसाधनों की रक्षा का है। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि परियोजना पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।





