खंडवा लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने राजनारायणसिंह पुरनी को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। कांग्रेस ने 15 साल बाद किसी सामान्य सीट पर सामान्य उम्मीदवार को ही टिकट दिया है। मांधाता से तीन बार के MLA रहे राजनारायणसिंह की उम्र 70 साल की है, करीब 22 साल बाद चुनाव लड़ने जा रहे है। बेदाग छवि और बेबाकी से बोलने वाले राजनारायण के सामने वर्तमान कांग्रेस संगठन चुनौती तो खंडवा जिले से उम्मीदवारी फायदेमंद साबित हो सकती है।
कांग्रेस में अर्जुनसिंह और दिग्विजयसिंह की सरकार में विधायक रहे राजनारायणसिंह की पहली बार संसदीय राजनीति में एंट्री हुई है। हालांकि, 2020 के मांधाता उपचुनाव में कांग्रेस ने उनके बेटे उत्तमपालसिंह को ही टिकट दिया था। लेकिन भाजपा के नारायण पटेल के सामने 22 हजार वोटों से हार मिली। कांग्रेस से सिर्फ अरुण यादव ने 2009 में चुनाव जीता था। उनसे पहले 1991 के लोकसभा चुनाव में महेंद्रसिंह कांग्रेस से जीते थे। यानी 1991 के बाद 2009 के लोकसभा चुनाव को छोड़ दिया जाए तो बीजेपी से नंदकुमारसिंह ही चुनाव जीतते आ रहे है।
खासियत : सच और मुंह पर बोलने वाले नेता, नाम से जुड़ा गांव
राजनारायणसिंह के बारे में कहा जाता है कि, झूठ बोलना उनकी शिद्दत में नहीं है। सच बोलने के साथ वे मुंह पर बोल देते है। हालांकि, कोई बुरा मान जाता है तो इसका खामियाजा भी उन्हें भुगतना पड़ता है। मांधाता क्षेत्र में ऐसे पहले नेता है जिन्हें पार्टी के हर छोटे और बड़े कार्यकर्ता का नाम पता है। दिग्विजय सरकार में उन्होंने मांधाता के अलावा खंडवा, बड़वाह विधानसभा क्षेत्र में सामाजिक कार्य किए है। उस समय राजपूत और गुर्जर समाज के सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में अपनी सक्रियता दिखाते थे। यहीं वजह है कि उनके नाम (राजनारायणसिंह) के साथ गांव (पुरनी) का नाम भी जुड़ा है।
राजनारायणसिंह के सामने वर्तमान संगठन बन सकता है चुनौती
खंडवा संसदीय क्षेत्र का वर्तमान कांग्रेस संगठन उपचुनाव के उम्मीदवार राजनारायणसिंह के लिए चुनौती बन सकता है। इसकी वजह 1991 के लोकसभा चुनाव में महेंद्रसिंह (विधायक शेरा के बड़े भाई) कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने थे। इसके बाद 1996 से 2009 तक बीजेपी से लगातार नंदकुमारसिंह सांसद चुने गए।
2009 के लोकसभा चुनाव में अरुण यादव ने नंदकुमारसिंह को हराया और केंद्रीय मंत्री बनते ही स्थानीय नेताओं को प्रदेश संगठन में स्थान दिलाकर नए संगठन पर जोर दिया। यानी वर्तमान संगठन कांग्रेस से ज्यादा अरुण यादव का है। कांग्रेस कैंडिडेट राजनारायणसिंह की राजनीति दिग्विजयसिंह के समय की है। ऐसे में वर्तमान संगठन उनके लिए चुनौती बन सकता है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस में अब तक यहीं चला आ रहा था कि अरुण यादव ही चुनाव लड़ेगे लेकिन राजनारायणसिंह की उम्मीदवारी ने समर्थकों को चौंका दिया।





