सुसंस्कृति परिहार
कांग्रेस मुक्त भारत से शुरू हुआ अभियान अब तक सफल हो चुका होता यदि कांग्रेस में चंद नेताओं के हौसले ने कार्यकर्ताओं में उम्मीद की किरण ना दिखाई होती।जी 23 के नेताओं की मांग पर विचार नहीं हुआ ऐसी बात नहीं उनमें से बड़ी संख्या में नेता आज भी कांग्रेस के साथ हैं। जहां तक कांग्रेस अध्यक्ष पद की बात है सोनिया गांधी को इन्हीं सभी नेताओं की मान मनौव्वल ने बनाया था।उनके पास कोई बड़ा अनुभव नहीं था लेकिन उसके बावजूद उनका प्रर्दशन ठीक रहा है। जहां तक राहुल गांधी का सवाल है उन्हें जब उपाध्यक्ष बनाया गया तब तो कोई गिला शिकवा नहीं सामने आई। उन्हें अध्यक्ष भी बनाया गया किंतु उनके अच्छे प्रदर्शन नहीं होने की वजह से हटा भी दिया गया।तभी से सोनिया गांधी ही अंतरिम अध्यक्ष हैं राहुल अध्यक्ष बनने तैयार नहीं हैं।ऐसा लंबे समय से चल रहा है।जी-23के कांग्रेस जन निर्भय होकर किसी का नाम प्रस्तावित नहीं कर पाते हैं इसे क्या
कहा जाए।चोरी चोरी चुपके चुपके कांग्रेस की बी टीम बनाने की कपिल सिब्बल की तैयारी टांय टांय फिस्स हो गई। जिन्होंने समाजवादी पार्टी से राज्यसभा में प्रवेश ले लिया।
अब तक जो शूरवीर कांग्रेस के रणछोड़ बने हैं उनमें चाहे सिंधिया हों ,आनंद शर्मा हों या गुलाम नबी आजाद सबकी चाहत मुख्यमंत्री बनने की रही है। इसलिए कांग्रेस से तमाम पद और सम्मान लेने के बाद यह मानते हुए कि कांग्रेस डूबता जहाज है उससे किनारा करते जा रहे हैं। सिंधिया आज तक मुख्यमंत्री बनने की चाहत लिए हुए हैं , हिमाचल में कांग्रेस बढ़त की ओर है पर आनंद भाजपा की ओर देख रहे हैं यही हाल गुलाम साहिब का है कश्मीर मुख्यमंत्री की तमन्ना ने उनका ये हाल किया है। राहुल गांधी एक बात सही कहते हैं जो निडर हैं उनकी जगह कांग्रेस में है। भाजपा ने जिस तरह ई डी ,सी बी आई, आई टी को विरोधियों के पीछे लगाया हुआ है इनसे ये सब डरे हुए हैं इनका दामन निश्चित साफ़ नहीं होगा ।
2017 में जब राहुल गांधी को पार्टी की कमान सौंपी गई थी तो वे नेहरू गांधी परिवार के पांचवें ऐसे शख्स बन गए थे जो कांग्रेस अध्यक्ष बने। राहुल ने 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद पद छोड़ा तो फिर सोनिया गांधी को ही कमान सौंपी गई। लोगों का यह भ्रम है कि कांग्रेस यानि नेहरू गांधी परिवार। आईए एक नजर आज़ादी के बाद अब तक कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर रहे नेताओं पर। पहले
भोगराजू पट्टाभि सीतारामय्या, पुरुषोत्तम दास टंडन, जवाहरलाल नेहरू,यू एन ढेबरी, इंदिरा गांधी,नीलम संजीव रेड्डी, के कामराज,निजलिंगप्पा,,जगजीवन राम, शंकरदयाल शर्मा,, देवकांत बरुआ इन्दिरा गांधी,,राजीव गांधी,पी वी नरसिम्हा राव, सीताराम केसरी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष। सोनिया गांधी को जी 23के तमाम लोगों ने 1998 में अध्यक्ष बनाया तब कांग्रेस के विखंडन और मज़बूती के लिए गांधी परिवार का सहारा लिया।जबकि वे राजनीति में आने बिल्कुल तैयार नहीं थी। उसके बाद राजनैतिक झंझावातों का दौर शुरू हुआ।भाजपा सत्ता रुढ़ हुई।क्यों और कैसे सभी जानते हैं।इस बीच सिर्फ राहुल गांधी ही अपने चंद मित्रों के साथ आज तक पूर्ण निष्ठा से आंदोलनरत पीड़ितों के दुखदर्द में शामिल हैं।आज राहुल सदन में अध्यादेश फाड़ने वाले से बहुत आगे निकल कर एक बहुत गंभीर और सुलझे व्यक्तित्व से आम जन को लुभा रहे हैं।जनता का संबल भी उन्हें मिल रहा है।जो भाग रहे हैं निश्चित ही वे भाजपा के साए से डर कर भाग रहे हैं।
राहुल गांधी पर इल्ज़ाम लगाने वालो सोचो कंटकाकीर्ण पथ पर बचपन से चलने वाला राहुल अब बहुत मज़बूत है।लौह इरादों के साथ संविधान और लोकतंत्र को बचाने प्रतिबद्ध है।यह इतिहास का महत्वपूर्ण समय है कि देश को मनुवादियों और कारपोरेट से कैसे बचाया जाए।जो रण छोड़ रहे हैं उनकी कायरता इतिहास में दर्ज होगी। जहां तक अध्यक्ष पद का सवाल उसे हल सब मिलके कर लेंगे। राहुल अध्यक्ष नहीं बनेंगे यह तय है। लोग कह रहे हैं पार्टी जोड़ों किंतु राहुल भारत जोड़ो अभियान शुरू कर रहे हैं देश में जो साम्प्रदायिक और फासीवादी ताकतें सिर उठा रही है उसके खिलाफ यह यात्रा ज़रूरी और अति महत्वपूर्ण है।एक बात और कांग्रेस में लोकतंत्र की बात करने वालोें को दम खम के साथ सामने आना चाहिए ।




