नर्मदा नवनिर्माण अभियान,नर्मदा घाटी के आदिवासी, किसान, मजदूर, मछुआरे आदि समुदायों के साथ दशकों से कार्यरत संस्था के खिलाफ झूटे आरोप लगानेकी साजिश फिरसे शुरू हुई है। मेधा पाटकर औऱ नर्मदा नवनिर्माण के 11 विश्वस्तों के नाम दाखील की हुई शिकायत के आधार पर दर्ज किया FIR अभी तक कोई जाँच न होते हुए ही दर्ज किया गया है।
उसमें किये गये आरोप, जैसे जीवनशालाओं के बच्चों की शिक्षा तथा अन्य शिक्षाविषयक कार्य के लिए पायी राशि राष्ट्रविरोधी कार्य पर खर्च की गयी, तद्दन झूठे है। पूर्व में की गई इस प्रकार की शिकायतों पर हमारे साथी और विश्वस्त जवाब दे चुके हैं। सर्वोच्च अदालत ने जुलै 2007 में जो फैसला दिया, उसमे नर्मदा आंदोलन पर लगाये आर्थिक स्त्रोतो के संबंध मे किये गये आरोप झूठा साबित हो चुके है!
शिकायतकर्ता ने, प्रितमराज बडौले, जो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद एवं राजनीति से जुड़ा व्यक्ति है, उसके वक़्तव्य में कहा है कि नर्मदा नवनिर्माण अभियानकी जीवनशालाऍ अस्तित्व में ही नही है। यह सरासर झूठ एवं मेधा पाटकर और अभियान के निर्माण कार्यको बदनाम करनेकी साजिश है। हम इसे धिक्कारते हुए यह दावा करते हैं कि करीबन 30 वर्षोंसे शुरू होकर जारी रही जीवनशालाओं से हजारों आदिवासी बच्चे शिक्षित होकर आगे बढ़े है। जीवनशालाओं के ही लिए दिया गया कोई भी चंदा किसी भी राष्ट्रविरोधी कार्य के लिए उपयोग में नहीं लाया गया है।
नर्मदा नवनिर्माण अभियान संविधानिक मूल्यों की चौखट में शिक्षा के साथ पुनर्वास और अन्य कार्यक्षेत्रों में भी सक्रिय है। हमारे हर कार्य के लिए जमा की गयी तथा खर्च की गयी राशि का हिसाब, ऑडिट एवम सभी कागजात वैध रूपसे रखे जाते हैं। इसपर बेबुनियाद आरोप की शिकायत पर निष्पक्ष जाँच ही सच्चाई साबित कर सकती थी । बिना जाँच के अपराधी प्रकरण दर्ज करनेकी प्रक्रिया यही दर्शाती है कि हमारे सामाजिक कार्यको बदनाम और बरबाद करनेकी साजिश है! हमारे राष्ट्रहित में, गरीब, श्रमिकों के साथ चल रहा कार्य इस साजीश से रुकेगा नहीं। हमारे सहयोगी, साथी हम पर विश्वास के साथ जरूर जुड़े रहेंगे, यही विश्वास है ।
*नुरजी वसावे देवराम कनेरा कमला यादव*





