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स्टडी वीजा के दुरुपयोग में सांठगांठ का हो खुलासा

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खटास बनी हुई है। ऐसे में राजनीतिक व कूटनीतिक तौर से भी इस रिपोर्ट से हर पहलू पाध्यान देने की जरूरत है। जिन बीस हजार विद्यार्थियों का रिपोर्ट में जिऋकिया गया है, उनका क्या होगा? इनमें से कितने कनाडामें ही है अथवा कितने चोरी-छिपे अमरीका में दाखिल हो गए होंगे? साथ ही अमरीका में इस तरह से दाखिल होने बालों का वहां भविष्य क्या होगा? वे सवाल इसलिए भी क्योंकि वैधानिक दस्तावेज नहीं होने के नहीं करते बल्कि कम्पनी का बोर्ड कारण ये भारतीय विद्यार्थी न तो वहां कोई नौकरी हासिल कर पाएंगे और न ही कारोबार से खुद को जोड़ सकेंगे।

हालांकि विचौलियों की ओर से इन विद्यार्थियों और युवाओं को वहां की नागरिकता दिलाने का जो रास्ता बताया जाता है, यह खासा तकलीफ देने वाला होता है। इस दौरान इन्हें छोटे-मोटे काम करके गुजर बसर करना होगा। घुसपैठिए होने का ठाया अपने सीने पर लगाए रखेंगे सो अलग। विद्यार्थियों को इस बारे में सोचना चाहिए। सीधे तौर पर यह मसला कनाडा की शिक्षण संस्थाओं और भारत में सक्रिय उन संस्थाओं और व्यक्तियों के बीच सांठगांठ से जुड़ा है जो विद्यार्थियों की कनाडा की स्टडी वीजा के जरिए अमरीका भेजने की अवैध प्रक्रिया में साझीदार हैं। अभिभावकों को भी विचार करना होगा कि कहीं वे बड़ी कीमत देने के बावजूद अपने आश्रितों के भावी जीवन से खिलवाड़ ती नहीं कर रहे। इस दुष्यवृत्ति में लिप्त विचौलियों की पहचान कर उन पर शिकंजा कसना होगा। इसे रोकना इसलिए भी जरूरी है कि ऐसा जारी रहा तो हमारे योग्य बच्चों की भी शक की नजर से देखा जाएगा। किसी भी देश को हमारे सिस्टम पर सवाल खड़े करने का मौका नहीं मिले, ऐसे बंदोबस्त करने ही होंगे।

Ramswaroop Mantri

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