इंदौर ।
सहकारिता विभाग में डूबी हुई संस्थाओं की जमीनों और परिसंपत्तियों के निराकरण में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इंदौर शहर की दो बड़ी सहकारी संस्थाएँ गुजरात मर्केंटाइल और मित्रमंडल सहकारी बैंक के सदस्य आज भी अपने पैसों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दूसरी ओर इन संस्थाओं की परिसंपत्तियों को लेकर विभाग के जादूगर अधिकारी बड़ा खेल कर गये हैं।
इसी के साथ ही विधानसभा में विधायकों द्वारा पूछे प्रश्रों को भी घोलकर पी गये और गोलमोल जवाब देकर पूरे मामले को और अंधेरे में डाल दिया। मित्रमंडल सहकारी बैंक द्वारा सहकारिता क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल को खोलने के लिए १ करोड़ १४ लाख का लोन मित्रमंडल चिकित्सालय को दिया गया था। बाद में यह राशि पैसे न भरने के कारण३१-३-२०२१ तक २५ करोड़ ७० लाख रुपए तक पहुंच गई। दो अधिकारियों ने इस पूरी संपत्ति को मात्र साढ़े चार करोड़ में बिना किसी सूचना के और बिना किसी विज्ञापन के निजी हाथों में सौंप दी। जबकि यह संपत्ति आज १५ करोड़ से ज्यादा की हो रही है।
अन्नपूर्णा मंदिर के सामने भवानीपुर कॉलोनी और नंदलालपुरा में मित्रमंडल सहकारी बैंक का कामकाज किया जाता था। इस संस्था के सबसे ज्यादा सदस्य थे। इसी प्रकार गुजरात मर्केंटाइल के भी इतने ही सदस्य थे। दोनों ही संस्थाओं में बड़ी राशि डिपाजिट के रुप में सदस्यों की जमा थी। यहां पर बैठे पदाधिकारियों ने सदस्यों के पैसों का जमकर दुरुपयोग किया और उसके चलते जनक गांधी द्वारा संचालित गुजरात मर्केंटाइल डूब गई। इसमे संस्था में जमा करोड़ों रुपए ऐसे लोगों और संस्थाओं को दे दिये गये थे जिनकी कोई जमानत ही संस्था में नहीं थी।





