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केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की राजनीति को लेकर राजस्थान और हरियाणा में उत्सुकता

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एस पी मित्तल अजमेर

द राइज ऑफ द बीजेपी पुस्तक का विमोचन 17 जनवरी को

10 जनवरी को केंद्रीय पर्यावरण तथा श्रम व रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात की। दोनों के बीच हरियाणा की राजनीति और अन्य मुद्दों को लेकर गंभीर विचार विमर्श हुआ। इससे पहले भी यादव हरियाणा में राजनीतिक सक्रियता दिखा चुके हैं। 10 जनवरी की मुलाकात के बाद भूपेंद्र यादव की राजनीति को लेकर राजस्थान और हरियाणा के लोगों में उत्सुकता बढ़ गई है। आम लोगों के साथ साथ भाजपा के कार्यकर्ताओं के जहन में यह सवाल है कि यादव की राजनीति का प्रदेश कौन सा होगा? यह सही है कि यादव की शिक्षा राजस्थान के अजमेर में हुई, जबकि जन्म हरियाणा में हुआ। मौजूदा समय में यादव राजस्थान से ही राज्यसभा के सांसद और प्रदेश भाजपा की कोर कमेटी के सदस्य भी हैं। 2013 की विधानसभा चुनाव में यादव भाजपा के चुनाव प्रभारी भी रहे चुके हैं, तब भाजपा को 200 में से 162 सीटें मिली थी, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव के पद पर रहते हुए भी यादव राजस्थान की राजनीति से जुड़े रहे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यादव की राजस्थान की राजनीति में सक्रियता कम देखी गई है। केंद्रीय मंत्री बनने के बाद जो जन आशीर्वाद यात्रा निकली उसमें भी राजस्थान के साथ हरियाणा को जोड़ा गया। इसे यादव की लोकप्रियता ही कहा जाएगा कि आशीर्वाद यात्रा का स्वागत दोनों राज्यों में जोरदार तरीके से हुआ। हरियाणा में यात्रा की कमान खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने संभाली तो राजस्थान में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया प्रभारी रहे। इस यात्रा में दोनों राज्यों में भाजपा के कार्यकर्ताओं में यादव को लेकर उत्साह देखा गया। मंत्री बनने पर यादव ने दिल्ली में जो डिनर दिया उसमें राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी शामिल हुई। यानी दोनों ही प्रदेशों के भाजपा नेताओं से यादव के अच्छे संबंध है। आमतौर पर किसी नेता की राजनीति का राज्य एक ही होता है। लेकिन मौजूदा समय में भूपेंद्र यादव एक ऐसे राजनेता है, जिनकी राजनीति तो दो राज्यों से जोड़ कर देखा जा रहा है। हरियाणा के भाजपा नेता भी चाहते हैं कि यादव हरियाणा में सक्रिय रहे। जहां तक यादव की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका का सवाल है तो उनकी सफलता इसी में है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के सबसे भरोसेमंद नेता है। मोदी और शाह जहां जरूरत पड़ती है वहां यादव को जिम्मेदारी देते हैं। हैदराबाद नगर निगम का चुनाव हो तो भी माहौल बनाने के लिए यादव को ही भेजा जाता है। उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद यादव को बिहार की जिम्मेदारी दी गई। यादव ने बिहार में भी भाजपा और जेडीयू के गठबंधन वाली सरकार बनाई। मोदी और शाह के भरोसे के अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि यादव लंबे अर्से से गुजरात के प्रभारी बने हुए हैं। पांच राज्यों के साथ मणिपुर में भी विधानसभा के चुनाव होने हैं, यादव को मणिपुर की भी जिम्मेदारी दी गई है। सब जानते हैं कि कांग्रेस से सत्ता छीन कर मणिपुर में भाजपा ने सरकार बनाई थी। इसलिए अब मणिपुर में भाजपा के सामने दोबारा सरकार बनाने की चुनौती है। इस चुनौती का सामना करने के लिए ही यादव को मणिपुर भेजा गया है। मणिपुर में 27 फरवरी और 3 मार्च को दो चरणों में चुनाव होने हैं। गुजरात में इसी वर्ष विधानसभा के चुनाव होने हैं। भाजपा गत बार से लगातार सरकार में है और अब छठी बार सरकार बनाने की चुनौती भाजपा के सामने है। यादव केंद्रीय मंत्री का तो दायित्व निभाते ही हैं, साथ ही भाजपा के चुनौतीपूर्ण कार्यों को भी सफलता पूर्वक करते हैं। हालांकि अभी तक भूपेंद्र यादव ने इस बात के कोई संकेत नहीं दिए हैं कि वे किसी राज्य में राजनीति करें। देखा जाए तो उनके सामने हरियाणा और राजस्थान दोनों के ही विकल्प हैं।
पुस्तक का विमोचन 17 को:
भाजपा की विकास यात्रा पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने द राइज ऑफ द बीजेपी पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक का विमोचन 17 जनवरी को होना है। यादव ने इस पुस्तक में भाजपा की स्थापना से लेकर अब तक के विकास के बारे में विस्तृत जानकारी दी है। यहां यह उल्लेखनीय है कि यादव सुप्रीम कोर्ट के सफल वकील भी रह चुके हैं।

Ramswaroop Mantri

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