कर्मचारियों के विरोध के बाद बचा नीम का पेड- भवन के पीछे कई पेड जड से काट दिए
इंदौर। कोरोना काल में एक एक सांस के लिए तरसते मरीजों को आक्सीजन की कमी का एहसास है। आक्सीजन के प्लांटों पर लम्बी लाइनों को लोग बढते संक्रमण के साथ ही फिर से याद करने लगे है। इसके साथ ही प्रकृति से बिना मुल्य के मिलने वाली आक्सीजन देने वाले पेडों की कीमत भी अब लोगो को समझ में आने लगी है। लेकिन इसके विपरित मप्र लोक सेवा आयोग के परिसर में 30-40 साल पुराने नीम-पीपल सहित युकोलिप्टीस के पेडों की कटाई की जा रही है।
अभी तक भवन के नव निर्माण कार्य में बाधा के नाम पर पीछे के बिना अनुमति पेडों को काटने का तो कोई ध्यान नही दिया गया। लेकिन जब परिसर के सामने के मोटे तने वाले नीम के पेड पर आरियां चली तो वहां वर्षों से कार्यरत कर्मचारी भडक गए। उन्होनें इसका कडा विरोध किया तब तक पेड का मात्र तना ही शेष रह गया और विरोध के चलते नीम के पेड का तना कटने से बच गया। वही जब कमर्चारियों ने इस संबध में अपने एक वरिष्ठ सचिव स्तर के अधिकारी से चर्चा की तो उन्होनें भी पेट काटने की अनुमति देने से इंकार कर दिया। अब इस मामलें में पेड काटने से बचाने वाले वन विभाग और इंदौर नगर पालिका निगम के अधिकारियों को शिकायत की जा रही है। हालंकि इस शिकायत पर कार्यवाही होने की संभावना नही है। क्योकि नगर निगम के आला अधिकारी और वन विभाग के अधि्कारी कमर्चारियों की नियुक्ति करने वाले इस आयोग पर कार्यवाही करने का हौसला इन अधिकारियों में नही है। फिर भी इस मामलें में जल्दी ही लिखित शिकायत होगी।





