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*शहरवासियों को 28 साल पहले की रूह कंपा देने वाली घटना की याद दिला रही है भागीरथपुरा की घटना,इंदौर में सप्लाई हुआ था लाश का पानी*

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इंदौर में दूषित पानी पीने से 14 लोगों की मौत ने पूरे शहरवासियों को हिला दिया है, लेकिन इसी शहर के बाशिंदों ने 28 साल पहले सड़ी मानव लाश का पानी भी पिया है। सुभाष नगर चौक पानी की टंकी से दस दिन पुरानी लाश पुलिस ने बरामद की थी। टंकी से नलों में चमड़ी, बाल आने लगे, लोग बीमार हुए तो टंकी में लाश होने का पता चला था। उस टंकी से पंद्रह से ज्यादा इलाकों में पानी सप्लाई होता है। 

अब इंदौर में नलों से होकर आई मौत ने 14 लोगों की जान ले ली। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में भी पेयजल दूषित पाया गया। यह जांच मेडिकल कॉलेज ने की थी। नर्मदा लाइन पर बगैर अनुमति के शौचालय बन गया और उसका रिसाव होता रहा, लेकिन अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। हैरानी की बात है कि पार्षद, जोनल अधिकारी को गंदे पानी की सप्लाई की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने मामले को हल्के में लिया।

बदबू आती थी पानी में

भागीरथपुरा बस्ती में तीन बोरिंग भी हैं। उनसे भी पानी सप्लाई होता है। कई लोग नर्मदा के पानी के बजाय बोरिंग का पानी पीते हैं। इस कारण रोगियों की संख्या नहीं बढ़ी। जो लोग नर्मदा जल पीते थे, वे ही बीमार हुए हैं, लेकिन अब बस्तीवासी नर्मदा लाइन का पानी नहीं पी रहे हैं। रहवासी भावना यादव ने कहा कि नर्मदा का पानी मटमैला तो नहीं आता था, लेकिन उसमें बदबू आती थी। उस पानी के सेवन से लोगों को इन्फेक्शन ज्यादा हुआ है। हमारे यहाँ निजी बोरिंग है, उसका ही पानी हम पीने के उपयोग में लेते हैं। इस कारण हम बीमार नहीं हुए।

पेयजल लाइन के पास रिसाव

भागीरथपुरा में नर्मदा और बोरिंग की डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों के आसपास ही गंदा पानी बहता है। इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद अभी भी कई गलियों में इस तरह के हालात हैं। पान वाली गली के बोरिंग के पास ही सड़क से बहता गंदा पानी मिल रहा था। उस लाइन से पांच फीट दूर ही ड्रेनेज का चैंबर भी है। इस वार्ड की बैकलेन में अतिक्रमण है। लोग नाराज न हों, इसके चलते जनप्रतिनिधि सख्ती भी ज्यादा नहीं दिखाते।

लोग नहीं भर रहे पानी

दूषित पानी का डर बस्तीवासियों में इस कदर समा गया है कि लोग अब नलों से पानी नहीं भर रहे हैं। सुबह सीईसी संजय दुबे जब जलापूर्ति के समय बस्ती में पहुंचे तो ज्यादातर लोग पानी भरते हुए नहीं मिले। उन्होंने रहवासियों से भी चर्चा की। ज्यादातर लोगों ने कहा कि पानी कई दिनों से दूषित आ रहा था।

दूषित था पानी

मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी माधव हसानी ने कहा कि मेडिकल कॉलेज से रिपोर्ट प्राप्त हुई है। पेयजल दूषित था, इस वजह से संक्रमण हुआ। दूषित होने का स्तर कितना था, यह अधिकारी ही पता कर पाएंगे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ज्यादातर जानें बचाने में सफल रहा। अब स्थिति बेहतर है। गुरुवार को पांच नए मरीज ही भर्ती हुए हैं।

एक स्थानीय महिला ने कहा, “ड्रेनेज लाइन पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है. पीने के पानी की लाइन से इसे जोड़ा जा रहा है, लेकिन इसे देखने वाला कोई नहीं है. पिछले डेढ़ साल से हम परेशान हैं. शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है.”

महिला ने बताया कि उनके यहां 10-12 लोग बीमार हुए हैं.

पीड़ितों ने क्या बताया

पॉडकास्ट: कहानी ज़िंदगी की

दूषित पानी की वजह से मारे गए पांच महीने के अव्यान साहू के पिता सुनील साहू ने बीबीसी को बताया कि उनके परिवार में माता पिता के साथ पत्नी और दस साल की पुत्री है.

सुनील साहू कुरियर का काम करते हैं.

पांच महीने पहले ही उनके यहां अव्यान ने जन्म लिया था.

उन्होंने कहा, ”माँ के दूध के अलावा बच्चे को बाहर के दूध में पानी मिलाकर दिया जाता था. यह पता नहीं था कि नर्मदा का पानी दूषित है. जब बाहर के लोगों ने बताया की कई बच्चे बीमार हैं, तब पता चला कि नर्मदा का पानी दूषित है.”

उन्होंने बताया, ”अचानक 26 दिसंबर को बच्चे को दस्त की शिकायत हुई, जिसके बाद उस मोहल्ले के ही एक डॉक्टर को दिखाया लेकिन दवाई के बाद भी उसे फ़र्क नहीं हुआ. लगातार दस्त होने के चले 29 दिसंबर की शाम जब उसकी हालत ख़राब हुई तो उसे डॉक्टर के यहां लेकर पहुंचे तो डॉक्टर ने चेक कर बताया कि देर हो चुकी है. अव्यान की मृत्यु हो गई है.”

उन्होंने कहा कि अब तक कोई भी सुध लेने नहीं आया है. प्रशासन को ध्यान देना चाहिए कि किसी और के साथ ऐसा ना हो. जो भी दोषी हैं, उन पर सख़्त कारवाई होनी चाहिए.

टेलरिंग का काम करने वाले संजय यादव ने बताया, ”दूषित पानी पीने से मेरी 69 वर्षीय मां को 26 दिसंबर की शाम से उल्टी-दस्त शुरू हो गए. उन्हें दवा दी गई लेकिन जब कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा तो क्लॉथ मार्केट अस्पताल में इलाज कराया गया. लेकिन 22 घंटे के इलाज के बाद उनकी मौत हो गई.”

संजय यादव ने बताया कि उनका 11 महीने का बच्चा अब भी भर्ती है. उसकी हालत कुछ सुधरी है लेकिन दस्त अब भी हो रहे हैं. उनका पड़ोसी भी बीमारी है.

उन्होंने बताया कि अभी तक प्रशासन का कोई शख़्स हालात की पड़ताल करने नहीं आया है. पानी अभी तक ख़राब आ रहा है.

भागीरथपुरा में ही रहने वाले रेलवे से रिटायर्ड 76 साल के नंदलाल पाल की बेटी सुधा पाल ने बताया कि उनके पिता को दो तीन दिन से उल्टी-दस्त लग रहे थे. उन्हें वर्मा अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नहीं आया.

सुधा पाल ने बताया कि संक्रमण से 30 दिसंबर को उनके पिता की मौत हो गई.

50 साल की सीमा प्रजापत की भी दूषित जल पीने से 29 दिसंबर की मौत हो गई थी
,50 खा साल की सीमा प्रजापत की भी दूषित जल पीने से 29 दिसंबर की मौत हो गई थी

सुधा पाल ने बताया कि अब भी घर में दूषित पानी आ रहा है. दिखने में पानी ख़राब नहीं है लेकिन इसमें से बदबू आ रही है.

50 साल की सीमा प्रजापत की भी दूषित जल पीने से 29 दिसंबर की मौत हो गई थी

उनके पुत्र अरुण प्रजापत ने बताया, ”28 दिसंबर की रात को उनके पिता ने परिवार के साथ खाना खाया था. लेकिन 29 दिसंबर की सुबह पिता की तबीयत ख़राब हो गई. उन्हें उल्टी-दस्त होने लगे. अरुण प्रजापत उन्हें अस्पताल ले जाने लगे लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई.”

उन्होंने कहा, ”पानी कड़वा तो था लेकिन पता नहीं था जानलेवा है. अब उबाल कर पी रहे हैं. मेरी भी तबीयत ख़राब हो रही है. पड़ोस में भी बच्ची बीमार हुई. लोग बीमार हैं लेकिन यहां पानी की कोई सुविधा नहीं है. वही पानी पीना पड़ रहा है. अब तक हमारी गली में तो कोई नहीं आया. सिर्फ पार्षद आए थे. उन्हें बताया कि पानी की समस्या है. गंदा पानी आ रहा है लेकिन वो दोबारा लौट कर नहीं आए.”

इंदौर के जिस इलाक़े में दूषित पानी से हाहाकार मचा हुआ है, वह भागीरथपुर क्षेत्र इंदौर विधानसभा क्षेत्र में आता है. यहां से भारतीय जनता पार्टी के विधायक कैलाश विजयवर्गीय हैं.

मध्य प्रदेश के नगर प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के तहत ही इंदौर नगर निगम आता है. पानी की सप्लाई की ज़िम्मेदारी निगम की है.

विजयवर्गीय ने बीबीसी से कहा, ”ये घटना दुर्भाग्यपूर्ण है. ये नगर निगम के ज़ोन के अधिकारी और कर्मचारियों की ग़लती से हुआ है. जब दूषित पानी सप्लाई के बारे में पता चला तो कर्मचारियों को अनाउसमेंट करना चाहिए था, लोग ये पानी नहीं लें. उन्हें पानी के टैंकर लगाना था. ग़लती उनकी थी इसलिए उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है. मुख्यमंत्री ने एक जाँच कमिटी बनाई है. जिसने भी लापरवाही की है उसे बख़्शा नहीं जाएगा.”’

दूषित पानी से हुई मौतों के बाद कैलाश विजयवर्गीय से नाराजगी जताते लोग
,दूषित पानी से हुई मौतों के बाद कैलाश विजयवर्गीय से नाराज़गी जताते लोग

सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये देने की घोषणा गई है.

इसी इलाक़े में रहने वाली सपना पाल ने बताया कि अभी कोई समस्या का समाधान नहीं निकला है.

सिर्फ़ ओरआरएस बांटा जा रहा है. उन्होंने बताया कि उनकी गली में भी एक शख़्स की डायरिया से मौत हुई है. अब भी लोग अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं.

Ramswaroop Mantri

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