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दिल्ली पुलिस का ‘ऑपरेशन फोर स्टार्स’:जनरल नरवणे की क‍िताब लीक ने कई हस्तियों को डाला सांसत में

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जनरल एमएम नरवणे की क‍िताब लीक कैसे हुई? इस पर द‍िल्‍ली पुल‍िस ने जांच शुरू कर दी है. खंगाला जा रहा क‍ि ज‍िस क‍िताब को छापने की इजाजत नहीं थी, वह राहुल गांधी संसद लेकर कैसे पहुंच गए. सोशल मीडिया में इसे क‍िसने फैलाया. इसे छापने से लेकर लोगों के हाथ में पहुंचने तक पर इन्‍व‍ेस्‍ट‍िगेशन शुरू हो चुकी है.

पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की क‍िताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ कैसे लीक हुई, अब यह सवाल संसद के गल‍ियारों से न‍िकलकर द‍िल्‍ली पुल‍िस की स्‍पेशल सेल तक पहुंच गया है. पुल‍िस ने ‘ऑपरेशन फोर स्टार्स’ शुरू कर द‍िया है. अब इस बात की जांच होगी क‍ि जि‍स किताब को पब्‍ल‍िश करने की इजाजत भारत सरकार ने नहीं दी, वह भारत में लोगों के हाथों तक पहुंची कैसे? कहां छपी? क‍िसने छापनी? कैसे इसे सोशल मीडिया में वायरल क‍िया गया? जांच राहुल गांधी के घर तक भी पहुंचेगी, क्‍योंक‍ि उन्‍होंने इसी क‍िताब के पन्‍ने संसद में लहराकर सवाल पूछे थे. यह ऑफ‍िश‍ियल सीक्रेट एक्‍ट और नेशनल स‍िक्‍योर‍िटी से जुड़ा मामला है, इसल‍िए इस पर एक्‍शन भी तगड़ा होगा.

द‍िल्‍ली पुल‍िस की तफ्तीश का दायरा इतना बड़ा है कि इसकी आंच अब उन हस्‍त‍ियों, उन सोशल मीडिया हैंडल्स तक पहुंचेगी, जिन्होंने इस ‘लीक’ कंटेंट को हवा दी. द‍िल्‍ली पुल‍िस ने साफ कर द‍िया है क‍ि इस बात की पूरी तफ्तीश की जाएगी क‍ि डिफेंस से जुड़े जिस किताब को छापने की अनुमति अभी तक रक्षा मंत्रालय से मिली नहीं, वो किताब कैसे छप गई और किसके इशारे पर छपी. इस किताब की कॉपी किसने लीक की और कैसे लीक की गई?

सवाल जवाब से समझें पूरा मामला

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की एंट्री कैसे हुई?

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और न्यूज फोरम पर चल रही उन खबरों का संज्ञान लिया है, जिनमें दावा किया गया था कि जनरल नरवणे की किताब की ‘प्री-प्रिंट कॉपी’ इंटरनेट पर वायरल हो रही है.

FIR करने का आधार क्‍या है?

सबसे गंभीर आरोप यह है कि रक्षा मंत्रालय से अभी तक इस किताब को छापने की अंतिम अनुमति नहीं मिली थी. रक्षा नियमों के अनुसार, कोई भी पूर्व सैन्य अधिकारी अपनी सेवा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा करने से पहले मंत्रालय की मंजूरी लेने के लिए बाध्य है.

आख‍िर कहां-कहां मिल रही ये क‍िताब?

शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस किताब की एक टाइप-सेट PDF कॉपी कुछ वेबसाइट्स पर मौजूद है. यह कॉपी देखने में मशहूर पब्लिशिंग हाउस Penguin Random House India Pvt. Ltd. द्वारा तैयार की गई लगती है. कुछ ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स पर इस किताब का फाइनल कवर भी दिखाया जा रहा है, जिससे ऐसा भ्रम पैदा हो रहा है कि यह बिक्री के लिए उपलब्ध है.

कहां छपी और किसने छापी,पब्लिशिंग हाउस पर क्‍यों लटकी तलवार?

पुलिस की जांच का मुख्य बिंदु यह है कि जब किताब को क्लीयरेंस नहीं मिली थी, तो इसकी प्री-प्रिंटिंग प्रक्रिया कैसे शुरू हुई? जांच के घेरे में Penguin Random House India है. पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या पब्लिशिंग हाउस के भीतर से किसी ने जानबूझकर यह PDF लीक की या किसी ने इसे चुराया.

अगर लीक हुई या क‍िसी ने चुराया तो यह वेबसाइट्स पर कैसे पहुंची?

पुलिस उन कड़ियों को जोड़ रही है जहां से यह फाइल लीक होकर उन वेबसाइट्स तक पहुंची जहां इसे अपलोड किया गया था. स्पेशल सेल ने पब्लिशिंग हाउस से संबंधित डेटा और ईमेल रिकॉर्ड्स भी मांगे हैं.

सबसे बड़ा सवाल क‍ि राहुल गांधी तक कैसे पहुंची?

संसद के मौजूदा सत्र में राहुल गांधी ने इस किताब का मुद्दा उठाते हुए सरकार को जमकर घेरा था. उन्होंने दावा किया था कि उनके पास किताब की एक कॉपी है. राहुल गांधी ने सदन में कहा था कि रक्षा मंत्री भले ही कहें कि किताब नहीं छपी है, लेकिन उनके पास इसकी प्रति मौजूद है. उन्होंने इसके कंटेंट के आधार पर अग्निपथ योजना और लद्दाख सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा. अब स्पेशल सेल यह जांच करेगी कि जब किताब आधिकारिक तौर पर बाजार में आई ही नहीं, तो इसकी कॉपी राहुल गांधी या उनके कार्यालय तक किस माध्यम से पहुंची? क्या यह वही लीक हुई PDF थी जिसे पब्लिशर के पास गोपनीय रहना चाहिए था?

सोशल मीडिया पर किसने फैलाया?

स्पेशल सेल की एक टीम उन सोशल मीडिया हैंडल्स और वेबसाइट्स की ‘डिजिटल ट्रेल’ खंगाल रही है जिन्होंने सबसे पहले इस किताब के ‘विवादित अंश’ साझा किए. खुफिया जानकारी के मुताबिक, इस किताब की PDF कई व्हाट्सएप ग्रुप और टेलीग्राम चैनलों पर ‘सीक्रेट’ फाइल के तौर पर घूम रही थी. कई डिजिटल न्यूज पोर्टल्स ने भी बिना पुष्टि किए इस किताब के उन हिस्सों को छापा जो अभी तक रक्षा मंत्रालय द्वारा स्वीकृत नहीं थे. इन पोर्टल्स के संपादकों से भी पूछताछ हो सकती है.

क्यों हो रहा है इतना हंगामा, किताब का कौन सा कंटेंट ज‍िस पर बवाल?

इस किताब में जनरल नरवणे ने अपने कार्यकाल के दौरान हुई कुछ ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र किया है, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील मानी जा रही हैं. बताया जा रहा है कि किताब में अग्निपथ योजना की शुरुआत और उस पर सेना की शुरुआती राय को लेकर कुछ ऐसे तथ्य हैं जो मौजूदा सरकारी लाइन से अलग हो सकते हैं. लद्दाख में साल 2020 के दौरान हुई झड़पों और सरकार के निर्णय लेने की प्रक्रिया पर भी इसमें विस्तार से लिखा गया है.

क्‍या बड़ी हस्तियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें?

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने साफ कर दिया है कि यह मामला केवल एक किताब के लीक होने का नहीं है, बल्कि यह ऑफ‍िश‍ियल सीक्रेट और स‍िक्‍योर‍िटी प्रोटोकॉल के उल्लंघन का है. आने वाले दिनों में स्पेशल सेल पब्लिशिंग हाउस के अधिकारियों, उन वेबसाइट्स के मालिकों और उन राजनीतिक कार्यकर्ताओं से पूछताछ कर सकती है जिन्होंने इस किताब को प्रचारित किया. यदि यह साबित होता है कि यह लीक जानबूझकर किसी राजनीतिक लाभ के लिए किया गया था, तो मामला और भी गंभीर रूप ले सकता है.

पकड़े गए तो क्‍या हो सकती है कार्रवाई?

इस मामले में Official Secrets Act और सेवा नियमों के उल्लंघन के तहत सख्त कार्रवाई हो सकती है. दोषी पाए जाने पर पब्लिशर पर भारी जुर्माना और प्रतिबंध लग सकता है. लीक में शामिल व्यक्तियों को जेल हो सकती है, जबकि राजनीतिक हस्तियों से कॉपी के स्रोत को लेकर पूछताछ की जा सकती है.

Ramswaroop Mantri

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