नई दिल्ली
तारीख: 2 मई, 2023। जगह: दिल्ली की हाई सिक्योरिटी वाली तिहाड़ जेल
टिल्लू गैंग के चीफ टिल्लू ताजपुरिया की योगेश टुंडा और दीपक तीतर नाम के बदमाशों ने रॉड मारकर हत्या कर दी। दोनों टिल्लू के दुश्मन जितेंद्र गोगी के आदमी थे। टिल्लू की हत्या जितेंद्र गोगी के ही मर्डर का बदला थी।
तारीख: 14 अप्रैल 2023। जगह: वही तिहाड़ जेल
जेल नंबर-3 में दो गैंग के बदमाशों में झगड़ा हुआ। इसमें एक गुट ने प्रिंस तेवतिया को चाकुओं से गोद डाला, अस्पताल में मौत। प्रिंस साउथ दिल्ली का गैंगस्टर था, उस पर 16 केस दर्ज थे। प्रिंस की गैंगस्टर रोहित चौधरी से दुश्मनी चल रही थी।

बीते 20 दिनों में देश की सबसे हाई-प्रोफाइल जेल तिहाड़ में दो बार गैंगवार हुई और 2 बड़े गैंगस्टर मारे गए। इस जेल में 7500 कैमरे लगे हैं, 5500 की कैपेसिटी है, लेकिन 13 हजार कैदी बंद हैं। बीते 9 साल में जेल के अंदर गैंगवार में 9 कैदियों की मौत हो चुकी है।
पुलिस के सूत्र बताते हैं कि दिल्ली में 10 बड़े गैंग एक्टिव हैं, जो सिंडिकेट बनाकर काम कर रहे हैं। दो सिंडिकेट हैं और दोनों में 5-5 गैंग। दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड में भी ये गैंग इसी तरह दर्ज हैं। इनके लीडर जेल में हैं या विदेश में। वे गुर्गों से ऐप के जरिए बात करते हैं और टास्क देते हैं। यहीं से कारोबारियों और बिल्डर्स को धमकाकर करोड़ों की उगाही की जा रही है।
गैंग्स का सिंडिकेट-1
- लॉरेंस बिश्नोई गैंग
- संदीप काला जठेड़ी गैंग
- जितेंदर उर्फ गोगी गैंग
- सूबे गुर्जर गैंग
- आनंदपाल सिंह गैंग (अभी अनुराधा चौधरी लीडर)
सिंडिकेट-2
- देविंदर बंबीहा गैंग
- नीरज बवाना गैंग
- टिल्लू ताजपुरिया
- संदीप ढिल्लू
- कौशल जाट गैंग
सड़क, घर, दुकान, थाना, जेल, कोर्ट-कचहरी… हर जगह क्राइम करने वाले गैंगस्टर और उनके गैंग कैसे काम करते हैं, ये ऑपरेट कैसे होते हैं और इनकी कमाई का सिस्टम क्या है, जेल में बैठे-बैठे ही गैंगस्टर कैसे किसी का भी मर्डर करवा देते हैं या वसूली करते हैं, कैसे क्राइम में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं, भास्कर ने ये सवाल दिल्ली पुलिस की क्राइम विंग में काम करने वाले एक अधिकारी से पूछे।
उन्होंने बताया कि ये गैंग दिल्ली के आउटर एरिया जैसे रोहिणी, द्वारका, नजफगढ़ में ज्यादा एक्टिव हैं। कुछ गैंग ऐसे हैं, जो दिल्ली में एक्टिव हैं, लेकिन हरियाणा, पंजाब, राजस्थान से ऑपरेट हो रहे हैं।
सिंडिकेट-1 के 5 गैंग…
1. लॉरेंस बिश्नोई गैंग: 700 से ज्यादा शूटर, गैंग लीडर तिहाड़ में
29 मई, 2022 को पंजाब के सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या कर दी गई। इसमें लॉरेंस गैंग का नाम आया। तभी से ये गैंग और इसका लीडर लॉरेंस चर्चा में है। 14 मार्च, 2023 को एक टीवी चैनल पर लॉरेंस का इंटरव्यू ब्रॉडकास्ट हुआ। लॉरेंस ने ये इंटरव्यू जेल से दिया था। इसके बाद सवाल उठा कि कैसे गैंगस्टर्स को जेल में सारी सुविधाएं आसानी से मिल रही हैं।
लॉरेंस का गैंग फिलहाल सबसे मजबूत और एक्टिव है। इसका नेटवर्क दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में फैला है। सोशल मीडिया से लेकर टेक्नोलॉजी तक इस गैंग के पास सब कुछ है। लॉरेंस अभी तिहाड़ जेल में है। पुलिस के मुताबिक, इसकी गैंग में करीब 700 शूटर हैं।
लॉरेंस जेल से और उसका कॉलेज के दिनों का दोस्त गोल्डी बराड़ कनाडा से इस गैंग को ऑपरेट कर रहे हैं। 30 साल के लॉरेंस पर 50 से ज्यादा केस हैं। गैंग जब भी किसी के मर्डर को अंजाम देता है, तो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उसकी जिम्मेदारी लेता है। गैंग की कमाई का बड़ा हिस्सा उगाही, ड्रग्स और फिरौती से आता है।
2. काला जठेड़ी गैंग: लॉरेंस के साथ गठजोड़, लीडर पर पहला केस मोबाइल छीनने का लगा
काला जठेड़ी गैंग का लीडर संदीप काला है। सोनीपत के रहने वाले संदीप के खिलाफ पहला केस सितंबर, 2009 में दर्ज हुआ था। वो दिल्ली में एक शख्स का मोबाइल छीनकर भागा था, पुलिस ने पकड़ लिया। इस मामले में संदीप को जेल हो गई। जेल से निकलने के बाद वो अपराधी बन गया।
जठेड़ी गैंग दिल्ली से बाहर हरियाणा, पंजाब और मुंबई तक एक्टिव है। दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में पहलवान सागर धनखड़ के मर्डर के बाद संदीप का नाम सुर्खियों में आया था। सागर की हत्या में ओलिंपिक मेडल जीत चुके रेसलर सुशील कुमार भी आरोपी हैं। जठेड़ी गैंग और लॉरेंस बिश्नोई गैंग साथ मिलकर काम करते रहे हैं।
3. जितेंदर मान उर्फ गोगी गैंग: दिल्ली-एनसीआर में एक्टिव, गैंग लीडर 2021 में मारा गया
ये गैंग दिल्ली के अलीपुर गांव के जितेंदर मान उर्फ गोगी की है। गोगी अब जिंदा नहीं है। 24 सितंबर 2021 को रोहिणी की कोर्ट नंबर-207 में उसे गोली मार दी गई थी। शूटर वकील की ड्रेस में कोर्ट रूम में घुसे थे। तब गोगी की पेशी होनी थी। जितेंदर गोगी गाजियाबाद के लोनी, आउटर दिल्ली और हरियाणा वाले इलाके में अपनी गैंग ऑपरेट करता था। उस पर 20 से ज्यादा केस दर्ज थे।
पिता की मौत के बाद गोगी ने साल 2010 में गैंग बनानी शुरू की। 2016 में उसे अरेस्ट किया गया, लेकिन वो कस्टडी से भाग निकला। भागने में उसके साथी दीपक बॉक्सर ने मदद की। गोगी तीन बार पुलिस की कैद से भागा था। उसकी टिल्लू ताजपुरिया से रंजिश भी थी। इसी रंजिश में गोगी की हत्या की गई।
गोगी के मरने के बाद गैंग का लीडर दीपक बॉक्सर बन गया। दीपक अभी जेल में है। उसे मेक्सिको से अरेस्ट किया गया था। दिल्ली पुलिस दीपक को 5 अप्रैल, 2023 को भारत लाई है।
4. सूबे गुर्जर गैंग: गैंग लीडर पर 40 से ज्यादा केस, हरियाणा और दिल्ली में एक्टिव
सूबे सिंह गुर्जर 2005 से क्राइम की दुनिया में एक्टिव है। उस पर दिल्ली और हरियाणा में हत्या, हत्या की कोशिश, धमकाने और फिरौती के 40 से ज्यादा केस दर्ज हैं। हरियाणा में ही उस पर मर्डर के 11 केस हैं। सूबे सिंह पर हरियाणा की स्पेशल टास्क फोर्स ने साढ़े 7 लाख रुपए का इनाम रखा था।
दिल्ली में सूबे की गैंग लॉरेंस और गोगी गैंग के साथ काम कर रही है। 2021 में हरियाणा पुलिस ने उसे दिल्ली एयरपोर्ट से अरेस्ट किया था। सूबे सिंह अभी गुरुग्राम की भोंडसी जेल में बंद है।
5. आनंदपाल सिंह गैंग: कमान लेडी डॉन अनुराधा चौधरी के पास
आनंदपाल गैंग राजस्थान में सबसे ज्यादा एक्टिव है। दिल्ली में भी गैंग की मौजूदगी है। गैंग का लीडर आनंदपाल 27 जून, 2006 को पहली बार चर्चा में आया था। तब उसने नागौर के डीडवाना में अपने दुश्मन जीवनराम गोदारा को मार दिया था। बाजार में कार्बाइन (मशीन गन) से फायरिंग की, इस घटना के बाद ये गैंग चर्चा में आ गया।
24 जून 2017 को चुरू के मालावास में आनंदपाल सिंह का एनकाउंटर हो गया। इसके बाद गैंग की कमान आनंदपाल की गर्लफ्रेंड कही जाने वाली अनुराधा चौधरी ने संभाली। सीकर जिले के फतेहपुर की रहने वाली अनुराधा फिलहाल जमानत पर है। पुलिस ने उसे काला जठेड़ी के साथ उत्तराखंड से गिरफ्तार किया था। अनुराधा पर 10 से ज्यादा केस दर्ज हैं, इनमें ज्यादातर किडनैपिंग के हैं।
सिंडिकेट-2 के 5 गैंग…
1. देविंदर बंबीहा गैंग: गैंग बनाने वाले का 26 साल की उम्र में एनकाउंटर
बंबीहा गैंग का ताल्लुक पंजाब के मोगा जिले से है। ये गैंग बंबीहा गांव के रहने वाले देविंदर सिंह ने बनाई थी। गांव के नाम पर ही उसने गैंग का नाम रखा। 2010 में गांव में हुए झगड़े में उससे मर्डर हो गया था। जेल जाने के बाद देविंदर क्राइम की दुनिया में आ गया।
2016 में बठिंडा में देविंदर का एनकाउंटर हो गया। तब उसकी उम्र सिर्फ 26 साल थी। अभी गैंग की कमान गौरव पटियाल उर्फ लकी के पास है। चंडीगढ़ के धनास गांव का रहने वाला लकी आर्मेनिया में रहकर गैंग चला रहा है।
गैंग में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और यूपी के 300 से ज्यादा शार्प शूटर हैं। बंबीहा गैंग और लॉरेंस गैंग की दुश्मनी है। बंबीहा गैंग ने लॉरेंस के विरोधी टिल्लू गैंग और नीरज बवाना गैंग से हाथ मिलाकर दिल्ली में खुद को मजबूत किया।
2. नीरज बवाना गैंग: आउटर दिल्ली में एक्टिव, गैंग में 100 से ज्यादा बदमाश
ये गैंग दिल्ली में नजफगढ़ के बवाना एरिया में एक्टिव है। तिहाड़ जेल में बंद इसका लीडर नीरज बवाना 16 साल से क्राइम की दुनिया में है। कहा जाता है कि वो जेल से ही गैंग चला रहा है। नीरज बवाना गैंग की पकड़ आउटर दिल्ली में बताई जाती है। उसका नाम नीरज सहरावत है, लेकिन उसने नाम में सरनेम की जगह गांव का नाम जोड़ लिया।
33 साल के नीरज पर मर्डर, कब्जा और उगाही के 50 से ज्यादा केस हैं। इस गैंग में 100 से ज्यादा लोग शामिल हैं।
3. टिल्लू ताजपुरिया गैंग: आतंकियों से कनेक्शन के आरोप, गोगी गैंग से पुरानी दुश्मनी
टिल्लू गैंग आउटर दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्सों में एक्टिव है। दिल्ली में टिल्लू ताजपुरिया गैंग और जितेंदर गोगी गैंग में वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। दोनों कॉलेज में अच्छे दोस्त थे। छात्रसंघ चुनाव में अलग उम्मीदवारों को सपोर्ट करने से दोनों में दुश्मनी हो गई थी।
गोगी की हत्या के बाद गैंग के लीडर सुनील उर्फ टिल्लू ताजपुरिया का दबदबा बढ़ गया था। इसी गैंगवार में टिल्लू की भी हत्या कर दी गई। टिल्लू तिहाड़ जेल में रहकर नवीन बाली, कौशल और नीरज बवाना के साथ गैंग चला रहा था।
टिल्लू ताजपुरिया पर दिल्ली-NCR में हत्या, किडनैपिंग और उगाही के 19 केस दर्ज थे। 2016 में सोनीपत पुलिस ने उसे पहली बार गिरफ्तार किया था। 2022 में टिल्लू पर आतंकियों से कनेक्शन के आरोप लगे। 26 अगस्त 2022 को उसके खिलाफ NIA ने केस दर्ज किया था।
4. संदीप ढिल्लू गैंग: संदीप पहलवान बनना चाहता था, गैंगस्टर बन गया
हरियाणा के हिसार का रहने वाला संदीप ढिल्लू पहलवानी करना चाहता था। पहलवानी के दौरान ही बदमाशों की संगत में आ गया। इसके बाद उसने उगाही शुरू कर दी। 2004 में ढिल्लू प्रधान गैंग में शामिल हो गया। उस पर मर्डर, रंगदारी और लूट के 20 से ज्यादा केस हैं।
पुलिस से बचने के लिए संदीप सिर्फ वॉट्सऐप कॉलिंग करता था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे जुलाई, 2020 में सिलीगुड़ी से अरेस्ट किया। वह पत्नी के साथ घूमने गया था, तभी पुलिस को उसकी लोकेशन मिल गई।
5. कौशल चौधरी गैंग: गुड़गांव के शराब मार्केट पर कब्जा, गैंग लीडर तिहाड़ जेल में
कौशल गैंग का असर हरियाणा के गुरुग्राम में है। गुरुग्राम हरियाणा का सबसे बड़ा लिकर मार्केट है। इस कारोबार पर कौशल चौधरी गैंग का कब्जा है। 41 साल के कौशल पर मर्डर, हत्या की कोशिश, लूट, रंगदारी के 40 से ज्यादा केस दर्ज हैं। वह बंबीहा गैंग के साथ काम करता है।
2017 में कौशल थाइलैंड के रास्ते दुबई भाग गया था। 2019 में उसे दुबई से भारत लाया गया। अभी वो तिहाड़ जेल में है। गुरुग्राम जिले के नाहरसिंह रूपा गांव के रहने वाले कौशल के पिता प्रॉपर्टी डीलर थे। कौशल सबमर्सिबल पंप रिपेयर करता था। 2005 में कौशल के भाई की गैंगस्टर सुदेश ने हत्या कर दी। इसके बाद कौशल क्राइम की दुनिया में आ गया।
गैंगस्टर जेल से ही गैंग कैसे चलाते हैं?
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के एक अधिकारी कहते हैं, ‘पुलिस की पकड़ में आने के बाद गैंगस्टर ज्यूडिशियल रिमांड पर जेल जाते हैं। वहां से वे अपनी गैंग ऑपरेट करने लगते हैं। जेल में उन्हें मोबाइल भी मिल जाता है। वहीं बैठकर ये व्यापारियों और बिल्डर्स को उगाही के लिए धमकी देते हैं, जो पैसे नहीं देता गुर्गों के जरिए उसका मर्डर करवा देते हैं।’
‘ज्यादातर गैंगस्टर्स टेक्नोफ्रेंडली हैं। गैंग के लीडर से लेकर नीचे गुर्गों तक ऐप के जरिए बात होती है। सबका काम बंटा हुआ है, लोग एक-दूसरे को जानते नहीं हैं, इससे पुलिस जांच में पकड़े जाने का खतरा नहीं रहता।’
पुलिस सूत्रों के मुताबिक ‘जेलों में होने वाली गैंगवार तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक जेल का लोअर स्टाफ परमानेंट रहेगा। गैंगस्टर का सोशल मीडिया कंट्रोल करना बहुत मुश्किल है। अगर इनके पास मोबाइल की पहुंच है, तो वे गैंग का सारा काम कर सकते हैं।’
इनका रेवेन्यू मॉडल कैसे काम करता है?
दिल्ली पुलिस के अधिकारी बताते हैं, ‘हमने दीपक बॉक्सर और अंकित पिस्तौली की बातचीत सुनी। इनके गुर्गे अच्छे खाने, शराब, कपड़े के बदले काम कर रहे थे। गैंग चलाने का खर्च डेढ़-दो लाख महीने से ज्यादा नहीं होता। इतना खर्च कर वे करोड़ों की उगाही करते थे। अगर किसी मर्डर में गैंग का नाम आता है, तो लोग उससे ज्यादा डरने लगते हैं। इसके जरिए इनका उगाही का कारोबार बढ़ता जाता है।’





