-निर्मल कुमार शर्मा,
दिल्ली में 19 मई 1083 को जन्मा 38 वर्षीय भारत का सपूत बेटा,जामिया मिल्लिया इस्लामिया से ग्रेजुएशन किया था,वह एक टेलीविजन जर्नलिस्ट के रूप में अपने कैरियर की शुरूआत किया था,लेकिन जल्दी ही वह शुद्ध रूप से दिलेराना अंदाज में एक युद्ध फोटोग्राफर के कैरियर का चुनाव किया,क्योंकि एक बार उसने अपने एक सहयोगी से कहा था कि फोटोग्राफी करना मेरा जुनून है,फोटोग्राफी करने के इसी जुनून की वजह से वह दुनिया के हर उस हिस्से में निर्भीकता पूर्वक चला जाता था,जहाँ मानव त्रस्त होता था,असहाय होता था,जहाँ सेवा,मानवता, दया,करूणा और मदद की सख्त जरूरत होती थी,इसी सिलसिले में वह नेपाल में आए भूकंप के तुरंत बाद वहाँ चला गया,युद्ध से पीड़ित इराक के मोसुल में तुरंत चला गया था,आंदोलन से ग्रस्त हांगकांग,दिल्ली में हुए भीषण दंगे के हालात में,हाल में कोरोना वायरस संकट में,लॉकडाउन में, ऑक्सीजन की भीषण कमी आदि की आमजन की परेशानी में ऐसी फोटोग्राफी किया,जो इन समस्याओं से त्रस्त आमजन की व्यथा की दुःखद कहानी को उसके फोटोग्राफ्स सारी स्थिति को बयां कर देते हैं,जिससे उसके सारे फोटोग्राफ्स बहुत मशहूर हुए। वह 2008 से 2011 के मध्य इंडिया टूडे ग्रुप के साथ भी काम किया था, रोहिंग्या मुसलमानों की पीड़ा और दर्द को समझने के लिए उनके शरणार्थी शिविरों में चला गया था । रोहिंग्या मुसलमानों के दर्द और उनकी पीड़ा को छलकाते हुए अपने फोटोग्राफी में उसने दुनिया को रोहिंग्या मुसलमानों के मानवीय संवेदनाओं और पक्ष को बहुत ही संजीदगी और मार्मिकता के साथ उभारने का काम किया था,उसी मार्मिक फोटोग्राफी के लिए उसे 2018 में उसे प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार से भी नवाजा गया था,दानिश सिद्दीकी की गिनती दुनिया के सबसे अच्छे फोटो जर्नलिस्ट में होती थी। अन्त में वह अफगानिस्तान के कंधार इलाके के स्पिन बोल्डक जिले के उस अग्रिम लड़ाई के मोर्चे वाले स्थान पर चला गया जहाँ तालिबानी दरिंदे मानवता और इंसानियत का सरेआम खून कर रहे थे,वे पिछले दिनों उस जगह पर चला गया,जहाँ अफगान विशेष बल एक पुलिस वाले को बचाने का प्रयास कर रहे थे,वे उसी मिशन को कवर कर रहा था,उसकी रिपोर्ट में तालिबान आतंकियों द्वारा रॉकेट से अफगान बलों के वाहनों को नष्ट करते हुए फोटो थे,उसके बाद वह तालिबानी आतंकियों के निशाने पर आ गया था,पिछले दिनों वह रॉयटर्स समाचार एजेंसी के लिए कवरिंग करते हुए अपनी बाँह में गोली लगने से घायल भी हुआ था,उसका इलाज भी चल रहा था,उसका जख्म ठीक भी हो रहा था,लेकिन अबकी बार जब वह वहाँ के स्थानीय दुकानदारों से उनकी कुशलक्षेम पूछ रहा था,तभी तालिबानी दरिंदों ने उस पर सटीक हमला करके उसे मानवतावादी फोटोग्राफी करने से सदा के लिए रोक दिया,उसकी नृशंस,निर्मम,क्रूरतम् हत्या ही कर दी ! उसकी मौत के बाद अफगानी राष्ट्रपति ने अपने संवेदना संदेश में शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि ‘मैं अपनी सरकार की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, स्वतंत्र मिडिया तथा पत्रकारों की सुरक्षा के लिए अटूट प्रतिबद्धता को दोहराता हूँ। ‘
परन्तु अफगानिस्तान में इस भारतीय पत्रकार की क्रूरतम् हत्या से यह आकलन कर लेना बहुत ही नासमझी और नादानी होगी कि पत्रकारों पर हमले केवल अफगानिस्तान जैसे देशों में हो रहे हैं ! एक लब्धप्रतिष्ठित संस्थान रिपोर्ट विद आउट बॉर्डर्स की रिपोर्ट्स के अनुसार पत्रकारों पर हमले के मामले में हमारा देश भारत भी इस दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में प्रथम 5 देशों में अमेरिका के साथ पाँचवें खतरनाक पायदान पर अपना स्थान रखता है ! पत्रकारों पर जानलेवा हमला करनेवाले इन खतरनाक देशों में मैक्सिको,यमन,सीरिया,अफगानिस्तान के बाद पाँचवें स्थान पर भारत और अमेरिका दोनों देश हैं ! भारत में पत्रकारों को मौत के घाट उतारने के लिए बहुत ही खूँख्वार तरीका अपनाया जाता है, उदाहरणार्थ बिहार राज्य में एक ग्राम प्रधान अपने खिलाफ एक रिपोर्टिंग से इतना नाराज,क्रुद्ध व हिंसक हो गया कि रिपोर्टिंग करनेवाले एक हिन्दी समाचार पत्र के दो पत्रकारों क्रमशः विजय सिंह और नवीन निश्चल पर अपनी बड़ी एसयूवी गाड़ी से बुरी तरह कुचलकर उनकी निर्मम हत्या कर दिया,इसी प्रकार मध्य प्रदेश में खनन मॉफियाओं ने अपने खिलाफ रिपोर्टिंग करनेवाले पत्रकार पर अपनी ट्रक चढ़ाकर उसे मौत के घाट उतार दिये थे ! पिछले तीन सालों में विभिन्न मॉफियाओं ने अलग-अलग जगहों पर 6 पत्रकारों को मौत की नींद सुला दिया।
यूनेस्को के अनुसार 2006 से 2018 तक दुनियाभर में 1109 पत्रकारों की हत्या हुई,जिसमें 90 प्रतिशत हत्यारों को दोषमुक्त कर दिया गया ! 55 प्रतिशत पत्रकारों की हत्या पूर्णतः शांतिकाल में किया गया ! भारत में ज्यादेतर पत्रकारों की हत्या मुख्यतः रेतमॉफिया,भूमॉफिया,जल मॉफिया,शराबमॉफिया आदि ही करते हैं। अब फील्ड में काम करनेवाली महिला पत्रकारों पर भी गुँडे और मवाली हमले कर रहे हैं,उदाहरणार्थ सुप्रीमकोर्ट के निर्णय के बाद केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के समय रिपोर्टिंग करती महिला पत्रकारों पर गुँडे 19 बार हमले किए थे ! ‘गेटिंग अवे विद मर्डर ‘नामक अध्ययन के अनुसार सन् 2014 से 2019 के बीच सत्ताधारियों के इशारे पर गुँडों ने भारत में 40 पत्रकारों को मौत की नींद सुला दिए,जिनमें 21 पत्रकारों की हत्या अपने काम करने की जगह पर ही कर दी गई,200 से ज्यादे पत्रकार गंभीर रूप से घायल हो गए थे ! इन पत्रकारों की हत्याओं में प्रायः कथित धार्मिक गुरू,नेता,सुरक्षाबल,सरकारी एजेंसियाँ,छात्र संगठन के प्रमुख और अपराधिक गैंग शामिल होते हैं ! आश्चर्य और बिस्मय की बात है कि 2014 के बाद आजतक पत्रकारों की हत्या में संलिप्त एक भी हत्यारे को दोषी नहीं सिद्ध किया जा सका है। अध्ययन के अनुसार अक्सर पुलिस वाले पत्रकारों की हत्या के लिए पत्रकारों, उनके सहयोगियों और उनके परिजनों के आरोप को झुठला देते हैं और हत्यारोपियों को साफ-साफ बचा लेते हैं ! इस देश के करोड़ों-अरबों लोगों की यही माँग है कि भविष्य में इस तरह की मनोवृत्ति से अलग हटकर पुलिस,न्यायिक व्यवस्था पत्रकारों के हत्यारों को कठोरतम् दंड देना सुनिश्चित करें,ताकि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकार और पत्रकारिता की हत्या करने वाले मॉफियाओं,गुँडों और अपराधी तत्वों को कठोरतम् दंड मिले। अंत में स्वर्गीय दानिश सिद्दीकी सहित दिवंगत हुए सभी पत्रकारों को अश्रुपूरित विनम्र श्रद्धांजलि।
-निर्मल कुमार शर्मा,
‘गौरैया एवम पर्यावरण संरक्षण ‘,प्रताप विहार,गाजियाबाद,उप्र,संपर्क -9910629632,ईमेल-nirmalkumarsharma3@gmail.com




