*पेसा कानून और ग्राम सभा को निष्क्रिय किया जा रहा है।*
*कृषि व सहायक क्षेत्रों को मुक्त व्यापार समझौते- WTO से बाहर रखा जाए*
*नई विकास की नीतियों में खामियां, प्राकृतिक आपदा का एक बड़ा कारण*
*संकिमो के आह्वान पर 26 नवम्बर को सभी राज्यों की राजधानी और जिलों में होंगे विरोध प्रदर्शन*
*334वीं किसान पंचायत संपन्न*
किसान संघर्ष समिति द्वारा हर माह आयोजित की जाने वाली 334वीं किसान पंचायत संपन्न हुई। किसान पंचायत को अ.भा.किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंद्रजीतसिंह, बिहार से किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव पुरुषोत्तम शर्मा, उत्तर प्रदेश से क्रांतिकारी किसान यूनियन के राष्ट्रीय महामंत्री शशिकांत, छत्तीसगढ़ से भाकियू के महासचिव तेजराम विद्रोही, सीहोर से अखिल भारतीय किसान सभा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष प्रहलाददास बैरागी, रायसेन से किसान जागृति संगठन प्रमुख इरफ़ान जाफरी, सागर से भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति यूनियन प्रदेश अध्यक्ष संदीप ठाकुर, रीवा से किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता एड शिव सिंह, इंदौर से मालवा निमाड़ क्षेत्र संयोजक रामस्वरूप मंत्री, सिंगरौली से जिला अध्यक्ष एड अशोक सिंह पैगाम, ग्वालियर से प्रदेश सचिव शत्रुघन यादव, मुलताई से भागवत परिहार आदि शामिल हुए। किसान पंचायत का संचालन प्रदेश अध्यक्ष एड आराधना भार्गव द्वारा किया गया। किसान पंचायत का सीधा प्रसारण बहुजन संवाद पर किया गया।
किसान पंचायत को संबोधित करते हुए कॉ. इंद्रजीत सिंह ने कहा कि पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में प्राकृतिक आपदा से भारी नुक़सान हुआ है। इसलिए सभी प्राकृतिक आपदा प्रभावित राज्यों को विशेष वित्तीय पैकेज दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार अगर अमरीका के दबाव में झुकी तो देशभर में भारी विरोध संघर्ष होंगे।
कॉ पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि अमरीका के दबाव में केंद्र सरकार ने कपास पर 11% आयात शुल्क हटाने का जो निर्णय लिया है उसे देश के किसानों के हित में वापस लिया जाना चाहिए, साथ ही कृषि व सहायक क्षेत्रों को मुक्त व्यापार समझौतों और WTO से बाहर रखा जाना चाहिए।
अलीगढ़ से शशिकांत ने कहा कि सरकार की नई विकास की नीतियों में खामियां भी प्राकृतिक आपदा का एक बड़ा कारण है। अंधाधुंध पेड़ों की कटाई, बड़े बांधों के निर्माण और चौड़ी सड़कों के निर्माण इसके प्रमुख कारण है।
उन्होंने कहा कि पेसा कानून और ग्राम सभा को निष्क्रिय कर दिया गया है।
तेजराम विद्रोही ने कहा कि केंद्र सरकार ने जल, जंगल जमीन और प्राकृतिक संसाधनों को कारपोरेट का चारागाह बना दिया है। प्रधानमंत्री जहां एक ओर एक पेड़ मां के नाम का सन्देश दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर पूरा का पूरा जंगल कारपोरेट को सौंप रहे है।
प्रहलाद दास बैरागी ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने 26 नवम्बर को सभी राज्यों की राजधानी और जिलों में बड़े विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। मध्यप्रदेश में भी सभी किसान संगठनों द्वारा विरोध कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
इरफ़ान जाफरी ने कहा कि मध्यप्रदेश में दो चरण में “भाव दो, खाद दो” आंदोलन किया जाएगा । जिसके तहत 15 – 20 अक्टूबर तक प्रथम चरण में तहसील एवं जिला स्तर पर प्रदर्शन एवं ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे तथा 27 अक्टूबर को भोपाल के नीलम पार्क में एकत्रित होकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया जाएगा।
संदीप ठाकुर ने कहा कि अतिवृष्टि से फसलें चौपट हो गई है। जिसका न तो राजस्व मुआवजा दिया गया न ही फसल बीमा। काम के समय किसानों को यूरिया लेने लाइन में लगा दिया गया फिर भी पर्याप्त यूरिया खाद नहीं दिया गया।
एड शिवसिंह ने कहा कि अतिवृष्टि से धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। प्रदेश सरकार फेल हो चुकी भावांतर योजना फिर से किसानों पर थोपना चाहती है । उन्होंने इस योजना को लूट योजना बताया है।
रामस्वरूप मंत्री ने कहा कि कपास उत्पादक किसानों में नाराजगी है क्योंकि कपास उत्पादन में लागत इतनी लग चुकी है कि वर्तमान भाव पर लागत निकाल पाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि कपास की एम एस पी 10075 रूपये प्रति क्विंटल की जानी चाहिए।
एड अशोक सिंह पैगाम ने कहा कि सरकार द्वारा सिंगरौली में कार्पोरेट को आदिवासियों की जमीन की लूट की छूट दी जा रही है। भूमि बचाने हेतु संघर्ष करने वाले आदिवासियों को डराया धमकाया जा रहा है।
शत्रुघन यादव ने कहा कि लखीमपुर खीरी घटना के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की ज़मानत रद्द की जानी चाहिए। क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से दर्ज हुए मामलों में गवाहों को धमकाने के प्रमाण सामने आए हैं। जिससे साबित होता है कि भाजपा शासन में न्याय की माँग करने वाले सुरक्षित नहीं हैं।
किसान पंचायत में गुजरात से भरतसिंह झाला, सिवनी में डॉ राजकुमार सनोडिया, बैतूल से भागवत परिहार शामिल हुए।
किसान पंचायत में सर्वसम्मति से निम्न प्रस्ताव पारित किए गए—
• प्राकृतिक संसाधनों की लूट पर रोक लगाई जाए।
• सभी आपदा प्रभावित राज्यों को विशेष वित्तीय पैकेज दिया जाए।
• अतिवृष्टि से नष्ट फसलों का तत्काल सर्वे, मुआवजा व बीमा भुगतान किया जाए।
• कपास पर हटाया गया 11% आयात शुल्क वापस लिया जाए।
• कपास की MSP ₹10,075 और सोयाबीन की ₹8,000 प्रति क्विंटल तय की जाए।
• कृषि व सहायक क्षेत्रों को WTO और FTA से बाहर रखा जाए।
• 26 नवम्बर 2025 को किसान आंदोलन की पाँचवीं वर्षगांठ पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाए।
भागवत परिहार
कार्यालय सचिव, किसान संघर्ष समिति, मुलताई
9752922320





