देवास में बांस से बनी पंखुड़ियों (ब्लेड) से अब डेनमार्क में पवन ऊर्जा बनाई जाएगी। यहां बनने वाली पंखुड़ियां हल्की होने के साथ 40 साल मजबूत भी रहेंगी, जबकि फाइबर से बनी पंखुड़ियां चार साल में ही खराब हो जाती हैं।
बांस से बनी ब्लेड की लागत भी कम है। इसीलिए डेनमार्क ने इनके इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। हाल ही में देवास की बांस उत्पादक आर्टिशन कंपनी की टीम को डेनमार्क में रिसर्च के दौरान सफलता मिली है। डेनमार्क की कंपनी ने देवास की कंपनी के साथ 100 पंखुड़ियों का करार किया है। इनकी सप्लाई भी जल्द होगी।
किफायती ब्लेड बनाने का काम महिलाएं करेंगी
टेक्नोलॉजी में बांस का इस्तेमाल करने वाली आर्टिशन दुनिया की पहली कंपनी है। यहां फर्नीचर से घर तक बनाने में बांस काम में लिया जा रहा है। जामगोद स्थित इस कंपनी से बांस के फर्नीचर और गेट और कई तरह के उत्पाद विदेश भेजे जा रहे हैं। कंपनी के सीईओ देवोपम मुखर्जी ने बताया पिछले कई महीनों से अलग-अलग देशाें में कटंगा बांस पर रिसर्च चल रहा था। इसी क्रम में डेनमार्क में प्रयोग सफल रहा और कंपनी को मंजूरी मिल गई। इसके तहत अब इंजीनियरिंग प्रोसेस से बांस की पंखुड़ियां बनाई जाएंगी।
खास बात यह है कि ब्लेड बनाने का काम दाे हजार महिलाएं करेंगी। इससे महिला सशक्तिकरण को भी बल मिलेगा। मुखर्जी बताते हैं,‘पहले से जिले में हजारों एकड़ भूमि में जंबू बांस का रोपण करा चुके हैं। 50 एकड़ जमीन में एक अलग फैक्टरी का निर्माण भी कराया जाएगा। ब्लेड निर्माण कार्य दो से तीन माह में शुरू हाे जाएगा। पवन चक्की की फाइबर ग्लास की ब्लेड का वजन 100 से 150 टन होता है। बांस की ब्लेड का वजन 25 प्रतिशत कम हो जाएगा। फाइबर ग्लास की तीन ब्लेड की कीमत करीब तीन कराेड़ रुपए है। जबकि 15 प्रतिशत कम कीमत में बांस की ब्लेड तैयार हाे जाएंगी। देश में अभी तक पवन चक्की विदेशाें से आ रही है, लेकिन बांस की ब्लेड का देश में पहला प्रयाेग देवास में किया जा रहा है।’





