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रिकॉर्ड मैन्युफैक्चरिंग के बावजूद देश में फिर वेंटिलेटर का संकट; सरकार ने खरीदे, लेकिन अस्पतालों में लगाए नहीं

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मार्च 2020 की बात है। पूरी दुनिया में कोरोना के केस तेजी से बढ़ रहे थे। उसी रफ्तार से बढ़ रही थी वेंटिलेटर की मांग। मौके की नजाकत को समझते हुए सरकार एक्शन मोड में आ गई। अधिकारियों, कॉर्पोरेट घरानों और वेंटिलेटर मैन्युफैक्चरर्स के साथ बैठक की। सभी ने इस चुनौती को स्वीकार किया और रिकॉर्ड टाइम में 3.96 लाख वेंटिलेटर बना दिए।

सरकार ने जून 2020 में पीएम केयर फंड से 50 हजार वेंटिलेटर्स की सप्लाई का ऑर्डर भी दिया, लेकिन आगे चलकर हालात सुधरने से इनकी मांग घट गई। लिहाजा देश में वेंटिलेटर्स का जखीरा लग गया। इस वक्त देश कोरोना की दूसरी लहर पर सवार है। 14 अप्रैल को पिछले 24 घंटे में पहली बार रिकॉर्ड 1 लाख 85 हजार 104 नए मामले सामने आए। इसलिए देश में एक बार फिर वेंटिलेटर्स की कमी की खबरें आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब वेंटिलेटर्स इतने बड़े पैमाने पर बनाए गए तो दोबारा क्यों खड़ा हुआ संकट?

कोरोना की दूसरी लहर और वेंटिलेटर की कमी

  • पुणे के मेयर मुरलीधर मोहोल ने 7 अप्रैल को न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, ‘अगर इसी रफ्तार से केस बढ़ते रहे तो हमारे पास वेंटिलेटर बेड की कमी हो सकती है। मैंने सरकार को चिट्ठी लिखकर और वेंटिलेटर का अनुरोध किया है।’
  • मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नागपुर के किसी अस्पताल में वेंटिलेटर बेड खाली नहीं हैं। विदर्भ हॉस्पिटल एसोसिएशन के डॉ. अनूप मरार के मुताबिक यहां ICU बेड की तत्काल आवश्यकता है। कोविड का नया स्ट्रेन बहुत संक्रामक है। जिन मरीजों ने पहले ही ओरल एंटी वायरल कोर्स कर लिया है, उन्हें सीधा आईसीयू में भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है।
  • छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने एक मीडिया रिपोर्ट में कहा कि प्रदेश में आईसीयू बेड की कमी हो गई है। इस वक्त 80-90% बेड फुल हैं और जल्द ही हम ऐसी स्थिति में पहुंच जाएंगे, जहां कोई बेड खाली नहीं होगा।
  • 13 अप्रैल को देश की राजधानी में 13 हजार से अधिक मामले रिपोर्ट किए गए, जो अब तक का रिकॉर्ड है। दिल्ली सरकार की वेबसाइट के मुताबिक दिल्ली में 1177 वेंटिलेटर्स हैं जिसमें सिर्फ 83 खाली बचे हैं।

50 हजार से 3.96 लाख वेंटिलेटर का सफर
एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AiMed) ने मार्च 2020 के आखिर में वेंटिलेटर बनाने वाली यूनिट का दौरा किया। उस वक्त प्रति महीने 5500 से 5750 वेंटिलेटर प्रति महीने बनाने की क्षमता थी। AiMed के फोरम को-ऑर्डिनेटर राजीव नाथ ने एक प्रेस नोट में कहा था कि मई तक इस क्षमता को बढ़ाकर 50 हजार प्रति महीने कर लिया जाएगा।

केंद्र सरकार ने जून 2020 में 50 हजार वेंटिलेटर्स की सप्लाई का ऑर्डर दिया। इसके लिए पीएम केयर फंड से 2 हजार करोड़ रुपए जारी किए गए थे। इनमें 30 हजार वेंटिलेटर्स भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) से, 10 हजार AgVa हेल्थकेयर से, 5,650 AMTZ बेसिक से, 4000 वेंटिलेटर AMTZ हाई एंड से और 350 वेंटिलेटर अलायड मेडिकल से खरीदे गए।

जब इतने वेंटिलेटर खरीदे तो फिर अस्पतालों में कमी क्यों?

  • मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार ने 20-30 करोड़ रुपए के 290 वेंटिलेटर्स पिछले साल पंजाब को दिए थे, लेकिन इस साल मार्च तक उनकी पैकिंग भी नहीं खोली गई है। पंजाब हेल्थ सिस्टम कॉर्पोरेशन की मैनेजिंग डायरेक्टर तनु कश्यप ने कहा कि राज्य के मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल्स की तरफ से मांग ही नहीं की गई। सबसे बड़ी समस्या मेडिकल सेंटर्स में वेंटिलेटर चलाने वाले ट्रेंड टेक्नीशियन की कमी है।
  • AiMed के राजीव नाथ का कहना है कि प्रशिक्षित कर्मचारियों की भारी कमी है और यह प्रशिक्षण मिशन मोड पर किया जाना चाहिए। इन अत्याधुनिक मशीनों को चलाने के लिए अस्पताल के कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने की तत्काल आवश्यकता है। वेंटिलेटर कोई भी नहीं चला सकता।
  • वेंटिलेटर्स के कुछ ऐसे केस भी हैं, जहां सरकारी खरीद के बावजूद वो मैन्युफैक्चरर के पास ही पड़े हुए हैं। AgVa हेल्थकेयर के सीईओ दिवाकर वैश ने फोर्ब्स इंडिया को बताया कि सरकार ने अप्रैल 2020 में 10 हजार वेंटिलेटर्स का ऑर्डर दिया था। हमने मई में 10 हजार वेंटिलेटर बना दिए। उसके बाद 1 साल होने वाले हैं। सरकार ने अभी तक 5 हजार ऑर्डर ही उठाए हैं। बाकी 5 हजार वेंटिलेटर हमारे गोदाम में ही पड़े हुए हैं।
  • चेन्नई स्थित फिनिक्स मेडिकल सिस्टम्स के मैनेजिंग डायरेक्टर शशि कुमार ने मार्च में मीडिया से कहा कि आंध्र प्रदेश मेडिकल टेक्निकल जोन ने उनकाे पहला ऑर्डर दिया था, लेकिन अभी तक उठाया नहीं है। अब हम अपने 1 हजार वेंटिलेटर्स को प्राइवेट हेल्थकेयर सेक्टर में इक्का-दुक्का बेचने की कोशिश कर रहे हैं।
  • पीएम केयर फंड से जिन वेंटिलेटर्स की सप्लाई की गई है, उसमें खामियों की शिकायत भी आ रही हैं। राजस्थान और छत्तीसगढ़ इसके ताजा उदाहरण हैं। राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री ने हाल ही में कहा था कि केंद्र सरकार की ओर से राज्य को 1000 वेंटिलेटर भेजे गए थे, लेकिन इन्होंने दो-ढाई घंटे बाद ही काम करना बंद कर दिया। इसी तरह छत्तीसगढ़ में 69 में से 58 वेंटिलेटर खराब होने की बात सामने आई है।

दूसरी लहर की तैयारी में कहां हुई चूक?
वेंटिलेटर्स के मौजूदा संकट पर राजीव नाथ का कहना है कि जब कोविड-19 के केस कम हो रहे थे, सरकार को वेंटिलेटर खरीद कर अपनी क्षमता बढ़ा लेनी चाहिए थी। दूसरी लहर की तैयारी करनी थी, लेकिन सरकार ने स्टॉक को मैनुफैक्चरर के पास ही छोड़ दिया। मांग कम होने से कंपनियों को आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ रहा है। उनकी बनाई डिवाइस गोदामों में धूल फांक रही हैं।

स्कैनरे टेक्नोलॉजी के फाउंडर विश्वप्रसाद अल्वा कहते हैं, ये सिर्फ कोविड-19 की दूसरी लहर की बात नहीं है। सरकार को ऐसी इमरजेंसी के लिए तैयार रहना चाहिए, जहां वेंटिलेटर की मांग अचानक बढ़ जाती है। सरकार की जिम्मेदारी है कि जो करीब 60 हजार वेंटिलेटर्स खरीदे गए हैं, उन्हें अस्पतालों में लगाया जाए और नियमित रूप से देखभाल हो, वर्ना ये स्टॉक भी खराब हो जाएगा।

Ramswaroop Mantri

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