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उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव: यूजीसी-एआईसीटीई-एनसीटीई का विलय,विकसित भारत शिक्षा बिल’से बदल जाएगा पूरा एजुकेशन सिस्टम

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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वतंत्र स्व-शासन वाले संस्थान बनाने के उद्देश्य से विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान, 2025 विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश किया. सरकार ने इसे संसद की एक संयुक्त समिति (जेपीसी) को भेजने पर सहमति जताई.बिल के मुताबिक केंद्र सरकार नीतिगत निर्देश दे सकेगी. प्रमुख पदों पर नियुक्ति भी करेगी, विदेशी विश्वविद्यालयों को मंजूरी देगी और जरूरत पड़ने पर आयोग या परिषदों को तय समय के लिए भंग भी कर सकेगी. सभी संस्थाएं सालाना रिपोर्ट, संसद की निगरानी और सीएजी ऑडिट के तहत जवाबदेह होंगी.

देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) का विलय कर अब एक नई संस्था विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (वीबीएसए) बनाई जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इससे जुड़ा विधेयक लोकसभा में पेश किया। यह विधेयक राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत तैयार किया गया है और इसके लागू होते ही देश की उच्च शिक्षा का पूरा ढांचा बदल जाएगा।

सरकार का कहना है कि अभी उच्च शिक्षा में अलग-अलग नियामक संस्थाएं होने से नियमों में दोहराव, देरी और भ्रम की स्थिति बनती है। वीबीएसए के गठन से यह समस्या खत्म होगी। अब विश्वविद्यालय, तकनीकी संस्थान और शिक्षक शिक्षा संस्थान एक ही ढांचे के तहत संचालित होंगे। इससे फैसले तेजी से होंगे, पारदर्शिता बढ़ेगी और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा। खास बात यह है कि पहली बार आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों को भी इस दायरे में लाया गया है, जो अब तक यूजीसी या एआईसीटीई के अधीन नहीं थे।

विधेयक का मकसद विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को सशक्त बनाना है ताकि वे शिक्षण, रिसर्च और इनोवेशन में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकें. विधेयक के अधिनियम का रूप लेने पर, यह केंद्र या राज्य के अधिनियम द्वारा स्थापित या संचालित विश्वविद्यालयों पर लागू होगा.

एक शीर्ष आयोग, तीन अलग-अलग परिषद
इस विधेयक के तहत उच्च शिक्षा के लिए एक कानूनी आयोग बनाया जाएगा, जो नीति निर्धारण और समन्वय की सर्वोच्च संस्था होगी. यह आयोग सरकार को सलाह देगा, भारत को शिक्षा का वैश्विक केंद्र बनाने पर काम करेगा और भारतीय ज्ञान परंपरा और भाषाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ेगा. आयोग में एक अध्यक्ष, वरिष्ठ शिक्षाविद, विशेषज्ञ, केंद्र सरकार के प्रतिनिधि और एक पूर्णकालिक सदस्य सचिव होंगे. आयोग के तहत तीन परिषदें काम करेंगी, ताकि किसी तरह का टकराव न हो.

तीनों परिषदों की क्या है जिम्मेदारी?
रेगुलेटरी काउंसिल उच्च शिक्षा की निगरानी करेगी. यह संस्थानों के प्रशासन, फाइनेंसियल ट्रांसपेरेंसी, शिकायत निवारण और शिक्षा के व्यावसायीकरण को रोकने का काम करेगी.
मान्यता परिषद संस्थानों की मान्यता की व्यवस्था देखेगी. यह मानदंड तय करेगी, मान्यता एजेंसियों को सूचीबद्ध करेगी और उससे जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करेगी.
स्टैंडर्ड्स काउंसिल शैक्षणिक मानक तय करेगी, पढ़ाई के नतीजे, क्रेडिट ट्रांसफर, छात्र आवाजाही और शिक्षकों के मानदंड निर्धारित करेगी.
इन संस्थानों पर होगा लागू
यह कानून केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों, डीम्ड यूनिवर्सिटी, IIT, NIT जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों, कॉलेजों, ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा संस्थानों और ‘इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस’ पर लागू होगा. हालांकि मेडिकल, कानून, फार्मेसी, नर्सिंग और संबद्ध स्वास्थ्य पाठ्यक्रम इस कानून के सीधे दायरे में नहीं होंगे, लेकिन उन्हें भी नए शैक्षणिक मानकों का पालन करना होगा.

केंद्र सरकार का रोल
इसके मुताबिक केंद्र सरकार नीतिगत निर्देश दे सकेगी. प्रमुख पदों पर नियुक्ति भी करेगी, विदेशी विश्वविद्यालयों को मंजूरी देगी और जरूरत पड़ने पर आयोग या परिषदों को तय समय के लिए भंग भी कर सकेगी. सभी संस्थाएं सालाना रिपोर्ट, संसद की निगरानी और सीएजी ऑडिट के तहत जवाबदेह होंगी.

भविष्य के लिए तैयार होंगे शिक्षाविद
छात्र-केंद्रित और समग्र शिक्षा सुधारों से पहुंच का विस्तार होगा, विकास दर में वृद्धि होगी और उच्च कुशल एवं भविष्य के लिए शिक्षाविद तैयार होंगे. छात्रों की समस्याओं के समय पर और प्रभावी समाधान को सुनिश्चित करने के लिए सुदृढ़ शिकायत निवारण तंत्र उभरते क्षेत्रों में उच्च शिक्षा संस्थानों में समग्र शिक्षा की उपलब्धता आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देगी.

तीन परिषदों का नया ढांचा
विधेयक के तहत विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान के भीतर तीन स्वतंत्र स्तंभ बनाए जाएंगे। पहला होगा विकसित भारत शिक्षा विनियम परिषद, जो नियामक की भूमिका निभाएगी। दूसरा विकसित भारत शिक्षा गुणवत्ता परिषद, जो प्रत्यायन यानी मान्यता से जुड़े काम देखेगी। तीसरा विकसित भारत शिक्षा मानक परिषद, जो शैक्षणिक मानकों को तय करेगी। इन तीनों परिषदों के आपसी समन्वय की जिम्मेदारी वीबीएसए पर होगी, ताकि विनियमन, गुणवत्ता और मानक एक साथ मजबूत हो सकें।

सभी संस्थानों पर समान नियम
विधेयक के प्रावधान सभी प्रकार के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों पर समान रूप से लागू होंगे। इसमें केंद्रीय, राज्य, निजी विश्वविद्यालयों के साथ ओपन और डिस्टेंस लर्निंग, ऑनलाइन और डिजिटल शिक्षा संस्थान भी शामिल हैं। अभी तक सामान्य विश्वविद्यालयों का नियमन यूजीसी करता था, तकनीकी संस्थानों के लिए एआईसीटीई और शिक्षक शिक्षा के लिए एनसीटीई जिम्मेदार थी। अब यह पूरा काम एक ही संस्था के तहत होगा, जिससे शिक्षा व्यवस्था ज्यादा सरल और प्रभावी बनेगी।

जुर्माने और सख्त प्रावधान
वीबीएसए के तहत नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। नियामक परिषद को अधिनियम या नियमों के उल्लंघन पर 10 लाख से 75 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का अधिकार होगा। बिना अनुमति के उच्च शिक्षा संस्थान स्थापित करने पर दो करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसके अलावा नियामक परिषद किसी मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षा संस्थान को निर्धारित प्रक्रिया के तहत डिग्री देने के लिए अधिकृत भी कर सकेगी।

अध्यक्षों की नियुक्ति और शक्तियां
वीबीएसए और उसकी तीनों परिषदों के अध्यक्षों का चयन राष्ट्रपति करेंगे। अध्यक्ष की नियुक्ति तीन साल के लिए होगी, जिसे बढ़ाकर पांच साल तक किया जा सकता है। हर परिषद में 14 सदस्य होंगे। अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार की चयन समिति की सिफारिश पर होगी। कर्तव्य में लापरवाही बरतने पर राष्ट्रपति के पास अध्यक्ष और सदस्यों को हटाने का अधिकार भी रहेगा। जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार आयोग या परिषदों को भंग भी कर सकेगी।

शिक्षा व्यवस्था पर क्या होगा असर
सरकार का दावा है कि विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान से उच्च शिक्षा प्रणाली ज्यादा मजबूत, जवाबदेह और छात्र-केंद्रित बनेगी। एक ही नियामक ढांचा होने से संस्थानों को स्पष्ट दिशा मिलेगी। गुणवत्ता पर फोकस बढ़ेगा और शिक्षा को रोजगार से जोड़ने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर यह कदम विकसित भारत के लक्ष्य की ओर शिक्षा व्यवस्था को नई रफ्तार देने वाला माना जा रहा है।

Ramswaroop Mantri

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